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राष्ट्रीय चैंपियन धन्नो की एक दिन की कटड़ी ढाई लाख में बिकी
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नारनौंद। गांव सिंघवा खास में मुर्राह नस्ल की नस्ल की एक दिन की कटड़ी 2.51 लाख रुपये में बिकी है। सिंघवा खास निवासी मास्टर से इंडिया चैंपियन झोटा युवराज के मालिक कुरुक्षेत्र जिले के सुनारिया निवासी कर्मबीर ने खरीदा है। कटड़ी की मां धन्नो सात बार पशु प्रतियोगिता में नेशनल चैंपियन रह चुकी है और उसकी कीमत भी करोड़ों में है। धन्नो की एक करोड़ की कीमत लगने पर भी मास्टर होशियार सिंह ने उसे बेचने से इनकार कर दिया।
सिंघवा गांव के किसानों ने मिसाल कायम करते हुए खेती के साथ मुर्राह नस्ल की भैंसों को पालकर अपनी कमाई को बनाए रखा है। अनेक प्रतियोगिताओं में आयोजित रैंप शो में भी इस गांव की भैंसों ने अपना जलवा बिखेरा है। पशुपालक कर्मबीर ने बताया कि वो मुर्राह नस्ल की भैंसों व बुल्स को पालने का काम पिछले काफी सालों से कर रहे हैं। इससे उसने करोड़ों रुपयों का मुनाफा कमाया है।
देशभर में लोकप्रिय है सिंघवा खास
जिले के सिंघवा खास की मुर्राह नस्ल की भैंसें पूरे देशभर में लोकप्रिय हैं और इनकी काफी मांग है। प्रदेश की मुर्राह भैंसें कुछ साल पहले ही तब चर्चा में आई थीं, जब सिंघवा खास गांव के एक किसान की भैंस लक्ष्मी को आंध्र प्रदेश के एक किसान ने 25 लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद दूसरे प्रदेशों के किसान बड़ी संख्या में यहां की मुर्राह भैंसों की खरीदारी करने आने लगे। 20 से 15 लाख के बीच बिकी भैंसों की गिनती तो कई सैकड़ों पार कर चुकी है। गांव के ही किसान कपूर सिंह के पास एक मुर्राह नस्ल का झोटा हीरा है, जिसकी कीमत 50 लाख लग चुकी है। मगर मालिक ने हीरा को बेशकीमती मानकर उसको बेचने से इनकार कर दिया। वहीं रानी के नाम भी रिकार्ड है कि उसने 27 किलोग्राम दूध देकर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
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सिंघवा गांव के किसानों ने मिसाल कायम करते हुए खेती के साथ मुर्राह नस्ल की भैंसों को पालकर अपनी कमाई को बनाए रखा है। अनेक प्रतियोगिताओं में आयोजित रैंप शो में भी इस गांव की भैंसों ने अपना जलवा बिखेरा है। पशुपालक कर्मबीर ने बताया कि वो मुर्राह नस्ल की भैंसों व बुल्स को पालने का काम पिछले काफी सालों से कर रहे हैं। इससे उसने करोड़ों रुपयों का मुनाफा कमाया है।
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देशभर में लोकप्रिय है सिंघवा खास
जिले के सिंघवा खास की मुर्राह नस्ल की भैंसें पूरे देशभर में लोकप्रिय हैं और इनकी काफी मांग है। प्रदेश की मुर्राह भैंसें कुछ साल पहले ही तब चर्चा में आई थीं, जब सिंघवा खास गांव के एक किसान की भैंस लक्ष्मी को आंध्र प्रदेश के एक किसान ने 25 लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद दूसरे प्रदेशों के किसान बड़ी संख्या में यहां की मुर्राह भैंसों की खरीदारी करने आने लगे। 20 से 15 लाख के बीच बिकी भैंसों की गिनती तो कई सैकड़ों पार कर चुकी है। गांव के ही किसान कपूर सिंह के पास एक मुर्राह नस्ल का झोटा हीरा है, जिसकी कीमत 50 लाख लग चुकी है। मगर मालिक ने हीरा को बेशकीमती मानकर उसको बेचने से इनकार कर दिया। वहीं रानी के नाम भी रिकार्ड है कि उसने 27 किलोग्राम दूध देकर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
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