{"_id":"593700254f1c1bdb538b4571","slug":"149677675616-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नए सिरे से होगी वार्डबंदी, कई नेता-पार्षदों के बिगड़ेंगे समीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नए सिरे से होगी वार्डबंदी, कई नेता-पार्षदों के बिगड़ेंगे समीकरण
Updated Wed, 07 Jun 2017 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार।
अगले वर्ष होने वाले नगर निगम के चुनाव से पहले शहर में फिर से वार्डबंदी होगी। शहरी स्थानीय निकाय ने इसको लेकर नगर निगम से वर्ष 2011 और मौजूदा की जनगणना रिपोर्ट मांगी है। साथ ही वार्डों के नक्शे के आधार पर आबादी की रिपोर्ट मांगी गई है।
हिसार सहित प्रदेश के सात निगमों, 16 परिषदों और पालिकाओं की चुनाव से पहले वार्डबंदी होगी। नगर निगम कमिश्नर ने इसको लेकर बिल्डिंग ब्रांच की ड्यूटी लगा दी है। नई वार्डबंदी की सूचना पर कई नेताओं में खलबली मच गई है। नई वार्डबंदी कइयों के समीकरण बिगाड़ेगी।
पिछले चार साल से सक्रिय नेताओं, पार्षदों को दिक्कत
नई वार्डबंदी होने से कई पार्षदों, पूर्व पार्षदों, भावी पार्षदों का खेल बिगड़ना तय है। नेताओं को भी इससे परेशानी हो सकती है। राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए पिछले चार साल से वर्किंग में जुटे थे।
विज्ञापन
सरकार ने कोर्ट में दिया था एफिडेविट
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में सात नगर निगमों, 16 परिषदों, पालिकाओं में वार्डबंदी करवाई थी। इसके विरोध में इन नगर निगमों और परिषदों से कई पार्षद उम्मीदवारों और पूर्व पार्षदों ने विरोध जताया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हालांकि कोर्ट के फैसले से पहले निगमों के चुनाव हो चुके थे। याचिका डालने वालों ने इलेक्शन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मामला कोर्ट में डाल दिया था। चुनाव होने के बाद सरकार की तरफ से कोर्ट में एफिडेविट दिया गया था कि अगले चुनाव से पहले सातों नगर निगमों, 16 परिषद और पालिकाओं में नए सिरे से वार्डबंदी करवाई जाएगी।
ये बनाया था आधार
नगर निगम हिसार के याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाया था। उन्होंने कहा था कि वार्डबंदी करते वक्त वर्ष 2011 की जनगणना का अवलोकन ही नहीं किया गया। नगर निगम बनने से पहले यानी परिषद के समय शहर में 31 वार्ड थे। वर्ष 2012 की वार्डबंदी में इन्हें घटाकर 20 वार्ड बना दिए गए। याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति जताई गई थी कि वार्डों में जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर भी असमानता है। सरकार की तरफ से दलील दी गई थी कि वार्डबंदी तक जनगणना प्रकाशित ही नहीं हुई। सरकार की तरफ से एफिडेविट (शपथपत्र) दिया गया कि चुनाव हो चुके हैं, फिर से चुनाव करवाने में दोबारा खर्च करना पड़ेगा। वर्ष 2018 में चुनाव होने से पहले नए सिरे से वार्डबंदी करवा दी जाएगी।
इन निगमों ने डाली थी याचिका
प्रदेश के सात नगर निगमों जिनमें हिसार, अंबाला, पानीपत, रोहतक, पंचकूला, करनाल और यमुनानगर सहित 16 अन्य पालिकाओं, परिषदों की तरफ ये याचिका डाली गई थी। हिसार में मौजूदा पार्षद टीनू जैन, पूर्व पार्षद पंकज दीवान, बीर सिंह ख्यालिया और राड़ा की तरफ से याचिका डाली गई थी।
यूएलबी की तरफ से मौजूदा आबादी के आंकड़े और वार्ड के नक्शे मांगे गए हैं। इसको लेकर बिल्डिंग ब्रांच की ड्यूटी लगा दी गई है। फिलहाल इसको लेकर अधिकारिक तौर पर मंथन किया जा रहा है।
- इंद्रजीत कुल्हड़िया, ईओ नगर निगम
.............
मौजूदा स्थिति...
- नगर निगम में कुल 20 वार्ड
- निगम एरिया की कुल 4 लाख के करीब आबादी
- जून 2018 में खत्म होगा निगम का कार्यकाल
-निगम में कांग्रेस समर्थित मेयर
विज्ञापन
अगले वर्ष होने वाले नगर निगम के चुनाव से पहले शहर में फिर से वार्डबंदी होगी। शहरी स्थानीय निकाय ने इसको लेकर नगर निगम से वर्ष 2011 और मौजूदा की जनगणना रिपोर्ट मांगी है। साथ ही वार्डों के नक्शे के आधार पर आबादी की रिपोर्ट मांगी गई है।
हिसार सहित प्रदेश के सात निगमों, 16 परिषदों और पालिकाओं की चुनाव से पहले वार्डबंदी होगी। नगर निगम कमिश्नर ने इसको लेकर बिल्डिंग ब्रांच की ड्यूटी लगा दी है। नई वार्डबंदी की सूचना पर कई नेताओं में खलबली मच गई है। नई वार्डबंदी कइयों के समीकरण बिगाड़ेगी।
विज्ञापन
पिछले चार साल से सक्रिय नेताओं, पार्षदों को दिक्कत
नई वार्डबंदी होने से कई पार्षदों, पूर्व पार्षदों, भावी पार्षदों का खेल बिगड़ना तय है। नेताओं को भी इससे परेशानी हो सकती है। राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए पिछले चार साल से वर्किंग में जुटे थे।
विज्ञापन
सरकार ने कोर्ट में दिया था एफिडेविट
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में सात नगर निगमों, 16 परिषदों, पालिकाओं में वार्डबंदी करवाई थी। इसके विरोध में इन नगर निगमों और परिषदों से कई पार्षद उम्मीदवारों और पूर्व पार्षदों ने विरोध जताया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हालांकि कोर्ट के फैसले से पहले निगमों के चुनाव हो चुके थे। याचिका डालने वालों ने इलेक्शन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मामला कोर्ट में डाल दिया था। चुनाव होने के बाद सरकार की तरफ से कोर्ट में एफिडेविट दिया गया था कि अगले चुनाव से पहले सातों नगर निगमों, 16 परिषद और पालिकाओं में नए सिरे से वार्डबंदी करवाई जाएगी।
ये बनाया था आधार
नगर निगम हिसार के याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाया था। उन्होंने कहा था कि वार्डबंदी करते वक्त वर्ष 2011 की जनगणना का अवलोकन ही नहीं किया गया। नगर निगम बनने से पहले यानी परिषद के समय शहर में 31 वार्ड थे। वर्ष 2012 की वार्डबंदी में इन्हें घटाकर 20 वार्ड बना दिए गए। याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति जताई गई थी कि वार्डों में जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर भी असमानता है। सरकार की तरफ से दलील दी गई थी कि वार्डबंदी तक जनगणना प्रकाशित ही नहीं हुई। सरकार की तरफ से एफिडेविट (शपथपत्र) दिया गया कि चुनाव हो चुके हैं, फिर से चुनाव करवाने में दोबारा खर्च करना पड़ेगा। वर्ष 2018 में चुनाव होने से पहले नए सिरे से वार्डबंदी करवा दी जाएगी।
इन निगमों ने डाली थी याचिका
प्रदेश के सात नगर निगमों जिनमें हिसार, अंबाला, पानीपत, रोहतक, पंचकूला, करनाल और यमुनानगर सहित 16 अन्य पालिकाओं, परिषदों की तरफ ये याचिका डाली गई थी। हिसार में मौजूदा पार्षद टीनू जैन, पूर्व पार्षद पंकज दीवान, बीर सिंह ख्यालिया और राड़ा की तरफ से याचिका डाली गई थी।
यूएलबी की तरफ से मौजूदा आबादी के आंकड़े और वार्ड के नक्शे मांगे गए हैं। इसको लेकर बिल्डिंग ब्रांच की ड्यूटी लगा दी गई है। फिलहाल इसको लेकर अधिकारिक तौर पर मंथन किया जा रहा है।
- इंद्रजीत कुल्हड़िया, ईओ नगर निगम
.............
मौजूदा स्थिति...
- नगर निगम में कुल 20 वार्ड
- निगम एरिया की कुल 4 लाख के करीब आबादी
- जून 2018 में खत्म होगा निगम का कार्यकाल
-निगम में कांग्रेस समर्थित मेयर