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एचएयू में जर्मन तकनीक की कंबाइन हार्वेस्टिंग टेक्नोलॉजी लैब का उद्घाटन
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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने सोमवार को कंबाइन हार्वेस्टिंग टेक्नोलॉजी लैब का उद्घाटन किया। इस लैब को विश्वविद्यालय के एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज के फार्म मशीनरी एंड पावर इंजीनियरिंग विभाग में जर्मनी के सीएलएएएस (क्लास) ग्रुप के सहयोग से स्थापित किया गया है। इस अवसर पर जर्मनी के सीएलएएएस ग्रुप के सेवा समूह की प्रमुख एला डिस्कोटा भी उपस्थित थीं। प्रो. सिंह ने कॉलेज के डीन डॉ. आरके झोरड़ तथा फार्म मशीनरी एंड इंजीनियरिंग विभाग की अध्यक्षा डॉ. विजया रानी की अगुवाई में इस लैब में जुटाई गई सुविधाओं का अवलोकन किया।
कुलपति ने इस प्रकार की लैब की आवश्यकता जताते हुए कहा कि कृषि में जितना महत्व बीज व कृषि क्रियाओं का है, उतना ही फार्म मशीनरी का भी है। खेत की तैयारी से लेकर फसल की कटाई तथा थ्रेशिंग (हार्वेस्टिंग) सभी कार्य मशीनों से किए जाते हैं। उन्होंने कहा यदि मशीनें गुणवत्ता तथा क्षमता में बेहतर होंगी और इनको प्रयोग करने वाला भलीभांति प्रशिक्षित होगा तो न केवल कृषि कार्य समय पर व सुगमता से पूरे होंगे, बल्कि इनसे कृषि पैदावार में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा इस प्रयोगशाला का किसानों और छात्रों को अत्यंत लाभ होगा। इस प्रयोगशाला की स्थापना कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत कॉरपोरेट घरानों को शामिल करने और उद्योग-संस्थान लिंकेज को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय की एक पहल है।
डिस्कोटा ने कहा और मजबूत किए जाएंगे रिश्ते
जर्मनी के सीएलएएएस ग्रुप के सेवा समूह की प्रमुख एला डिस्कोटा ने भविष्य में सीएलएएएस द्वारा छात्रवृत्ति, इन-प्लांट प्रशिक्षण, व्याख्यान-सेमिनार द्वारा सहयोग को अगले स्तर तक ले जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा इस विश्वविद्यालय के साथ सहयोग उनका पहला कदम है। इस सहयोग को और भी मजबूत किया जाएगा। उन्होंने हकृवि के छात्रों को कंपनी प्लेसमेंट देने में भी रुचि दिखाई।
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लैब में वर्किंग मॉडल का प्रदर्शन
डॉ. आरके झोरड़ ने बताया कि इस लैब में कंबाइन हार्वेस्टर के विभिन्न घटकों का वर्किंग मॉडल प्रदर्शित किया गया है। विश्व स्तरीय नई ढांचागत सुविधाएं जैसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, नए क्लास रूम, प्रयोगशालाओं का नवीकरण और 6 करोड़ रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट का निर्माण आदि जुटाने और नई फैकल्टी नियुक्त करने पर कुलपति का आभार व्यक्त किया। इस लैब से कंबाइन हार्वेस्टर के कार्य को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी तथा सीएलएएएस ग्रुप से श्रीराम कन्नन, नरेंद्र नैन, संदीप हुड्डा भी उपस्थित थे।
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कुलपति ने इस प्रकार की लैब की आवश्यकता जताते हुए कहा कि कृषि में जितना महत्व बीज व कृषि क्रियाओं का है, उतना ही फार्म मशीनरी का भी है। खेत की तैयारी से लेकर फसल की कटाई तथा थ्रेशिंग (हार्वेस्टिंग) सभी कार्य मशीनों से किए जाते हैं। उन्होंने कहा यदि मशीनें गुणवत्ता तथा क्षमता में बेहतर होंगी और इनको प्रयोग करने वाला भलीभांति प्रशिक्षित होगा तो न केवल कृषि कार्य समय पर व सुगमता से पूरे होंगे, बल्कि इनसे कृषि पैदावार में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा इस प्रयोगशाला का किसानों और छात्रों को अत्यंत लाभ होगा। इस प्रयोगशाला की स्थापना कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत कॉरपोरेट घरानों को शामिल करने और उद्योग-संस्थान लिंकेज को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय की एक पहल है।
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डिस्कोटा ने कहा और मजबूत किए जाएंगे रिश्ते
जर्मनी के सीएलएएएस ग्रुप के सेवा समूह की प्रमुख एला डिस्कोटा ने भविष्य में सीएलएएएस द्वारा छात्रवृत्ति, इन-प्लांट प्रशिक्षण, व्याख्यान-सेमिनार द्वारा सहयोग को अगले स्तर तक ले जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा इस विश्वविद्यालय के साथ सहयोग उनका पहला कदम है। इस सहयोग को और भी मजबूत किया जाएगा। उन्होंने हकृवि के छात्रों को कंपनी प्लेसमेंट देने में भी रुचि दिखाई।
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लैब में वर्किंग मॉडल का प्रदर्शन
डॉ. आरके झोरड़ ने बताया कि इस लैब में कंबाइन हार्वेस्टर के विभिन्न घटकों का वर्किंग मॉडल प्रदर्शित किया गया है। विश्व स्तरीय नई ढांचागत सुविधाएं जैसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, नए क्लास रूम, प्रयोगशालाओं का नवीकरण और 6 करोड़ रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट का निर्माण आदि जुटाने और नई फैकल्टी नियुक्त करने पर कुलपति का आभार व्यक्त किया। इस लैब से कंबाइन हार्वेस्टर के कार्य को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी तथा सीएलएएएस ग्रुप से श्रीराम कन्नन, नरेंद्र नैन, संदीप हुड्डा भी उपस्थित थे।