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प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा- पूरे घर में फैला था करंट, आग और करंट दोनों से बचकर निकालना था घायलों को
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अमर उजाला ब्यूरो
उकलाना मंडी। सुभाष की ढाणी के मकान में लगी आग के प्रत्यक्षदर्शियों जगदीश, बलवंत और महाबीर का कहना है कि वे साथ लगते खेतों में थे। सबसे पहले वे घटनास्थल पर पहुंचे थे, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि पूरे घर में करंट दौड़ रहा था और आग भी लगी थी। ऐसे में घायलों को बाहर निकालना खतरे से खाली नहीं था। फिर भी उन्होंने हिम्मत करके घायलों को बाहर निकाला। आइए जानते हैं इनकी जुबानी, क्या था मंजर...
किसान जगदीश
आग की लपटें देख मैं सबसे पहले वहां पहुंचा था। बरामदे के अंदर चारपाई के पास गिरे सुरेश को उठाने की कोशिश की तो मुझे भी करंट का झटका लगा। पूरे घर में करंट दौड़ रहा था। फिर सुरेश को कपड़ों से पकड़कर घसीटकर बाहर तक लाया। फिर किसान बलवंत व महाबीर भी पहुुंच गए। फिर आग और करंट से बचते हुए सबको बाहर निकालना शुरू किया। गांव में बिजली मिस्त्री लखीराम को बुलाया गया, उसने इनवर्टर का कनेक्शन काट कर करंट को खत्म किया।
किसान बलवंत
आग, धुंआ और चीख-पुकार सुनी तो तुरंत मौके पर गया। वहां का मंजर देख एक बार तो दिल दहल गया। जगदीश ने बताया बच के, चारों ओर करंट है। आग की लपटें भी उठ रही थीं। बचते-बचाते किसी तरह एक-एक करके हमने घायलों को बाहर निकालना शुरू किया। सुरेश की पत्नी सुमन व दोनों बेटियां बुरी तरह से झुलस चुकीं थीं।
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किसान महाबीर
मुझे थोड़ी देर बाद घटना का पता चला। मौके पर पहुंचा तो वहां जगदीश और बलवंत सहायता में जुटे थे। घर में धुआं ही धुआं था, आग की लपटें उठ रही थीं। सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। करंट से भी बचना था। मैंने भी जगदीश और बलवंत की मदद करना शुरू किया और घायलों को बाहर तक लाए।
मिस्त्री लखीराम
मुझे फोन आया तो मैं तुरंत मौके पर पहुंचा। वहां पर कई किसान सहायता में जुटे थे। सबसे पहले इनवर्टर का कनेक्शन काटकर घर से करंट को खत्म किया, जिससे घायलों को बाहर निकालने में मदद मिली। करंट खत्म होते ही घायलों को आग से बाहर निकाला गया।
शोक जताने पहुंचे
घटना की जानकारी मिलते ही विभिन्न संगठन और गणमान्य लोगों का मौके पर जमावड़ा लग गया। पूर्व विधायक नरेश सेलवाल मौके पर पहुुंचे और परिवार के लोगों को ढांढस बंधाया। इसके अलावा भाजपा नेता सुरजीत ख्यालिया, विधायक अनूप धानक, कीर्तिरतन शर्मा, वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के चेयरमैन श्रीनिवास गोयल, मार्केट कमेटी के चेयरमैन सत्यपाल, रामफल नैन लितानी, प्रवीण गिल, शमशेर गिल आदि पीड़ितों को सांत्वना देने पहुंचे। देर शाम एचएसएससी बोर्ड के सदस्य हर्षवर्धन भारद्वाज भी मौके पर पहुंचे और घटना पर शोक व्यक्त किया।
एक साथ जली तीन चिताएं, ग्रामीणों ने नम आंखों से दी विदाई
शनिवार को तीनों शवों का पोस्टमार्टम होने के बाद तीनों शवों का एक साथ अलग-अलग चिताओं में अंतिम संस्कार किया गया। गांव में एक साथ जली तीन चिताओं और परिवार की हालात देखते पूरे गांव मेें दिनभर मातम छाया रहा। ग्रामीणों ने देर साम करीब 6 बजे तीनों शवों को नम आंखों से विदाई दी। भारत भूषण अस्पताल में सुरेश और आरती तथा सोनी बर्न अस्पताल में गीता और पूजा का इलाज चल रहा है।
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उकलाना मंडी। सुभाष की ढाणी के मकान में लगी आग के प्रत्यक्षदर्शियों जगदीश, बलवंत और महाबीर का कहना है कि वे साथ लगते खेतों में थे। सबसे पहले वे घटनास्थल पर पहुंचे थे, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि पूरे घर में करंट दौड़ रहा था और आग भी लगी थी। ऐसे में घायलों को बाहर निकालना खतरे से खाली नहीं था। फिर भी उन्होंने हिम्मत करके घायलों को बाहर निकाला। आइए जानते हैं इनकी जुबानी, क्या था मंजर...
किसान जगदीश
आग की लपटें देख मैं सबसे पहले वहां पहुंचा था। बरामदे के अंदर चारपाई के पास गिरे सुरेश को उठाने की कोशिश की तो मुझे भी करंट का झटका लगा। पूरे घर में करंट दौड़ रहा था। फिर सुरेश को कपड़ों से पकड़कर घसीटकर बाहर तक लाया। फिर किसान बलवंत व महाबीर भी पहुुंच गए। फिर आग और करंट से बचते हुए सबको बाहर निकालना शुरू किया। गांव में बिजली मिस्त्री लखीराम को बुलाया गया, उसने इनवर्टर का कनेक्शन काट कर करंट को खत्म किया।
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किसान बलवंत
आग, धुंआ और चीख-पुकार सुनी तो तुरंत मौके पर गया। वहां का मंजर देख एक बार तो दिल दहल गया। जगदीश ने बताया बच के, चारों ओर करंट है। आग की लपटें भी उठ रही थीं। बचते-बचाते किसी तरह एक-एक करके हमने घायलों को बाहर निकालना शुरू किया। सुरेश की पत्नी सुमन व दोनों बेटियां बुरी तरह से झुलस चुकीं थीं।
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किसान महाबीर
मुझे थोड़ी देर बाद घटना का पता चला। मौके पर पहुंचा तो वहां जगदीश और बलवंत सहायता में जुटे थे। घर में धुआं ही धुआं था, आग की लपटें उठ रही थीं। सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। करंट से भी बचना था। मैंने भी जगदीश और बलवंत की मदद करना शुरू किया और घायलों को बाहर तक लाए।
मिस्त्री लखीराम
मुझे फोन आया तो मैं तुरंत मौके पर पहुंचा। वहां पर कई किसान सहायता में जुटे थे। सबसे पहले इनवर्टर का कनेक्शन काटकर घर से करंट को खत्म किया, जिससे घायलों को बाहर निकालने में मदद मिली। करंट खत्म होते ही घायलों को आग से बाहर निकाला गया।
शोक जताने पहुंचे
घटना की जानकारी मिलते ही विभिन्न संगठन और गणमान्य लोगों का मौके पर जमावड़ा लग गया। पूर्व विधायक नरेश सेलवाल मौके पर पहुुंचे और परिवार के लोगों को ढांढस बंधाया। इसके अलावा भाजपा नेता सुरजीत ख्यालिया, विधायक अनूप धानक, कीर्तिरतन शर्मा, वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के चेयरमैन श्रीनिवास गोयल, मार्केट कमेटी के चेयरमैन सत्यपाल, रामफल नैन लितानी, प्रवीण गिल, शमशेर गिल आदि पीड़ितों को सांत्वना देने पहुंचे। देर शाम एचएसएससी बोर्ड के सदस्य हर्षवर्धन भारद्वाज भी मौके पर पहुंचे और घटना पर शोक व्यक्त किया।
एक साथ जली तीन चिताएं, ग्रामीणों ने नम आंखों से दी विदाई
शनिवार को तीनों शवों का पोस्टमार्टम होने के बाद तीनों शवों का एक साथ अलग-अलग चिताओं में अंतिम संस्कार किया गया। गांव में एक साथ जली तीन चिताओं और परिवार की हालात देखते पूरे गांव मेें दिनभर मातम छाया रहा। ग्रामीणों ने देर साम करीब 6 बजे तीनों शवों को नम आंखों से विदाई दी। भारत भूषण अस्पताल में सुरेश और आरती तथा सोनी बर्न अस्पताल में गीता और पूजा का इलाज चल रहा है।