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12 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म मामले में अदालत ने फिर दिए जांच के आदेश
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हिसार। 12 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी युवक को बरी करने के करीब डेढ़ माह बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत ने हांसी पुलिस को अतिरिक्त जांच के आदेश दिए हैं। इससे पूर्व अदालत में दिए अपने जवाब में हांसी की पुलिस अधीक्षक निकिता गहलोत ने मामले में अतिरिक्त जांच की जरूरत से इनकार किया था।
गत 18 फरवरी को अदालत ने आरोपी युवक को बरी करते हुए हिसार उपायुक्त व हांसी पुलिस अधीक्षक को यह भी आदेश दिया था कि वे जांच में लापरवाही बरतने पर हांसी के डीएसपी व दो इंस्पेक्टर की तनख्वाह से दो लाख रुपये काटकर बरी किए गए आरोपी को मुआवजा के तौर पर दें। इस मामले में एक आरोपी भूप सिंह करीब डेढ़ माह तक जेल में रह चुका है जिसको पुलिस ने जांच में डिस्चार्ज कर दिया था जबकि बाद में मुकेश को गिरफ्तार किया जिसकी पीड़ित बालिका व अन्य शिकायतकर्ता ने दुष्कर्मी के रूप में पहचान नहीं की थी। इस बारे में हांसी पुलिस ने गत 19 फरवरी 2021 को 12 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने, जान से मारने की धमकी देने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 व 506 और पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया था।
नौ माह तक हिरासत में रहा था निर्दोष युवक
एफआईआर के अनुसार 12 वर्षीय बालिका को जब उसकी मां नहला रही थी तो उसके कपड़ों में खून लगा हुआ दिखाई दिया। खून के बारे में बालिका ने बताया कि 11 फरवरी, 2021 को दो युवक उसको गांव की धर्मशाला के पीछे सुनसान जगह में ले गए और एक लड़के ने उसके साथ दुष्कर्म किया। बालिका के अनुसार आरोपियों ने उसको चाकू दिखाकर धमकी दी कि इस बारे में किसी को शिकायत की तो वे उसको जान से मार देंगे जिसके कारण उसने इस बारे में परिजनों को शिकायत नहीं की। इसके बाद बालिका की पहचान पर जब उसके पिता ने युवक भूप सिंह से बात की तो उसने मारपीट की जिसके बाद ग्रामीण एकत्रित हो गए और मामले का पता चलने पर युवक की धुनाई की। पुलिस ने भूप सिंह को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया जिसके बाद उसको न्यायिक हिरासत में भेज दिया। करीब डेढ़ माह के बाद पुलिस ने भूप सिंह को निर्दोष बताते हुए मामले से डिस्चार्ज कर दिया और मुकेश को गिरफ्तार कर लिया। मुकेश करीब 9 माह तक न्यायिक हिरासत में रहा जिसकी पीड़िता और अन्य गवाहों ने दुष्कर्मी के तौर पर शिनाख्त नहीं की और अदालत ने उसको बरी कर दिया।
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इस मामले में अदालत ने अतिरिक्त जांच की जरूरत पर हांसी पुलिस अधीक्षक से जवाब मांगा था। हांसी पुलिस अधीक्षक ने अपने जवाब में अतिरिक्त जांच की जरूरत से इनकार किया लेकिन अदालत ने गत 4 अप्रैल को आदेश जारी कर अतिरिक्त जांच के आदेश दिए हैं।
मामले के बारे में जब हांसी पुलिस अधीक्षक नीकिता गहलौत से बात की तो उन्होंने कहा कि अदालत ने अतिरिक्त जांच के आदेश दिए हैं, इसलिए मामले में अतिरिक्त जांच की जाएगी।
अदालत ने इस आधार पर दिए अतिरिक्त जांच के आदेश
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले के आरोपी मुकेश के खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी जिसके कारण उसको बरी कर दिया लेकिन दुष्कर्म के आरोप अभी मौजूद है। पीड़िता के आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दिए बयान और मामले के आरोपी भूप सिंह, जिसको पुलिस ने डिस्चार्ज कर दिया, उसके बयान अभी भी फाइल पर हैं और पुलिस ने इस मामले में टेस्ट आईडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) भी नहीं करवाई। इसलिए पुलिस को मामले की अतिरिक्त जांच करनी चाहिए जिसके लिए हांसी पुलिस अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दे दिए हैं।
मुआवजे के खिलाफ हाईकोर्ट में गए पुलिस, बरी के खिलाफ भी जाने की तैयारी
इस मामले में अदालत ने एक डीएसपी व दो पुलिस इंस्पेक्टर की तनख्वाह से दो लाख रुपये काटकर उस राशि को मुआवजे के तौर पर पीड़िता को देने के आदेश दिए थे, जिसके खिलाफ तीनों अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हांसी पुलिस इस मामले में आरोपी को बरी किए जाने के फैसले व अतिरिक्त जांच के आदेश के फैसले के खिलाफ भी हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रही है।
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गत 18 फरवरी को अदालत ने आरोपी युवक को बरी करते हुए हिसार उपायुक्त व हांसी पुलिस अधीक्षक को यह भी आदेश दिया था कि वे जांच में लापरवाही बरतने पर हांसी के डीएसपी व दो इंस्पेक्टर की तनख्वाह से दो लाख रुपये काटकर बरी किए गए आरोपी को मुआवजा के तौर पर दें। इस मामले में एक आरोपी भूप सिंह करीब डेढ़ माह तक जेल में रह चुका है जिसको पुलिस ने जांच में डिस्चार्ज कर दिया था जबकि बाद में मुकेश को गिरफ्तार किया जिसकी पीड़ित बालिका व अन्य शिकायतकर्ता ने दुष्कर्मी के रूप में पहचान नहीं की थी। इस बारे में हांसी पुलिस ने गत 19 फरवरी 2021 को 12 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने, जान से मारने की धमकी देने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 व 506 और पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया था।
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नौ माह तक हिरासत में रहा था निर्दोष युवक
एफआईआर के अनुसार 12 वर्षीय बालिका को जब उसकी मां नहला रही थी तो उसके कपड़ों में खून लगा हुआ दिखाई दिया। खून के बारे में बालिका ने बताया कि 11 फरवरी, 2021 को दो युवक उसको गांव की धर्मशाला के पीछे सुनसान जगह में ले गए और एक लड़के ने उसके साथ दुष्कर्म किया। बालिका के अनुसार आरोपियों ने उसको चाकू दिखाकर धमकी दी कि इस बारे में किसी को शिकायत की तो वे उसको जान से मार देंगे जिसके कारण उसने इस बारे में परिजनों को शिकायत नहीं की। इसके बाद बालिका की पहचान पर जब उसके पिता ने युवक भूप सिंह से बात की तो उसने मारपीट की जिसके बाद ग्रामीण एकत्रित हो गए और मामले का पता चलने पर युवक की धुनाई की। पुलिस ने भूप सिंह को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया जिसके बाद उसको न्यायिक हिरासत में भेज दिया। करीब डेढ़ माह के बाद पुलिस ने भूप सिंह को निर्दोष बताते हुए मामले से डिस्चार्ज कर दिया और मुकेश को गिरफ्तार कर लिया। मुकेश करीब 9 माह तक न्यायिक हिरासत में रहा जिसकी पीड़िता और अन्य गवाहों ने दुष्कर्मी के तौर पर शिनाख्त नहीं की और अदालत ने उसको बरी कर दिया।
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इस मामले में अदालत ने अतिरिक्त जांच की जरूरत पर हांसी पुलिस अधीक्षक से जवाब मांगा था। हांसी पुलिस अधीक्षक ने अपने जवाब में अतिरिक्त जांच की जरूरत से इनकार किया लेकिन अदालत ने गत 4 अप्रैल को आदेश जारी कर अतिरिक्त जांच के आदेश दिए हैं।
मामले के बारे में जब हांसी पुलिस अधीक्षक नीकिता गहलौत से बात की तो उन्होंने कहा कि अदालत ने अतिरिक्त जांच के आदेश दिए हैं, इसलिए मामले में अतिरिक्त जांच की जाएगी।
अदालत ने इस आधार पर दिए अतिरिक्त जांच के आदेश
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले के आरोपी मुकेश के खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी जिसके कारण उसको बरी कर दिया लेकिन दुष्कर्म के आरोप अभी मौजूद है। पीड़िता के आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दिए बयान और मामले के आरोपी भूप सिंह, जिसको पुलिस ने डिस्चार्ज कर दिया, उसके बयान अभी भी फाइल पर हैं और पुलिस ने इस मामले में टेस्ट आईडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) भी नहीं करवाई। इसलिए पुलिस को मामले की अतिरिक्त जांच करनी चाहिए जिसके लिए हांसी पुलिस अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दे दिए हैं।
मुआवजे के खिलाफ हाईकोर्ट में गए पुलिस, बरी के खिलाफ भी जाने की तैयारी
इस मामले में अदालत ने एक डीएसपी व दो पुलिस इंस्पेक्टर की तनख्वाह से दो लाख रुपये काटकर उस राशि को मुआवजे के तौर पर पीड़िता को देने के आदेश दिए थे, जिसके खिलाफ तीनों अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हांसी पुलिस इस मामले में आरोपी को बरी किए जाने के फैसले व अतिरिक्त जांच के आदेश के फैसले के खिलाफ भी हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रही है।