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पिछले दो साल से निगम प्रशासन ने नहीं लगाया बंदर पकड़ने का टेंडर
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। शहर में बंदरों की बढ़ रही संख्या लगातार लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कभी बंदरों का झुंड घरों पर मंडराता नजर आता है तो कभी सड़कों पर घूमता मिलता है। खासकर गलियों में खेलते बच्चों के लिए भय का माहौल रहता है। हालांकि सेक्टरों में बंदरों की संख्या अधिक नहीं है, लेकिन कुछ चुनिंदा कॉलोनियों में इनके झुंड आसानी से दिख जाते हैं। इनमें एचएयू के साथ लगती कॉलोनियों के अलावा कृष्णा नगर, जयदेव नगर, सूर्यनगर आदि क्षेत्र शामिल हैं। बंदरों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है कि पिछले दो साल से नगर निगम प्रशासन ने बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर नहीं लगाया है। दो साल पहले निजी एजेंसी को बंदर पकड़ने का टेंडर दिया गया था। उस समय एजेंसी ने करीब एक हजार बंदरों को पकड़कर यमुनानगर के पास कलेसर के जंगल में छोड़ा था।
कॉलोनियों में खड़े वाहनों में हो जाते हैं सवार
शहर की कॉलोनियों में झुंड में घूमने वाले बंदर अक्सर खाली खड़े ऑटो या अन्य वाहनों में सवार हो जाते हैं। इसके बाद अठखेलियां करते भी नजर आते हैं। शहरवासी अशोक कुमार, समुंद्र सिंह, शीशपाल, राकेश वर्मा, साधुराम, दीपक आदि बताते हैं कि इन दिनों में बंदरों के काटने या उनकी वजह से किसी हादसे जैसी सूचना तो नहीं आई है। मगर कॉलोनियों में घूमते इनके झुंड भय का कारण जरूर बनते हैं। दो साल पहले बंदर पकड़ने का अभियान चलने से कुछ कमी आई थी। अब दोबारा निगम प्रशासन को अभियान चलाने के लिए टेंडर लगाना चाहिए।
नगर निगम प्रशासन ने दो साल पहले बंदर पकड़ने के लिए टेंडर लगाया था। उस समय करीब एक हजार बंदर पकड़े गए थे, जिन्हें बाद में कलेसर की पहाड़ियों में छोड़ा गया। अब तो आचार संहिता लगी हुई है। दोबारा हाउस की बैठक होगी, तब इसके लिए टेंडर लगाने का मुद्दा उठाएंगे।
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- ज्योति महाजन, पार्षद, वार्ड नंबर 5
सेक्टर 16-17 में कभी-कभार बंदरों के झुंड दिखते हैं। 60 गज के मकानों वाले ब्लॉक में बंदरों को कई बार देखा गया है। निगम प्रशासन को बंदरों को पकड़ने के लिए फिर से टेंडर लगाना चाहिए।
जितेंद्र श्योराण, प्रधान, सेक्टर 16-17 आरडब्ल्यूए
इस समय आचार संहिता लगी हुई है। वहीं हम प्रॉपर्टी टैक्स के कामकाज में व्यस्त हैं। आचार संहिता हटने के बाद इस विषय में मंत्रणा करके निर्णय लिया जाएगा।
- हरदीप सिंह, ईओ, नगर निगम
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हिसार। शहर में बंदरों की बढ़ रही संख्या लगातार लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कभी बंदरों का झुंड घरों पर मंडराता नजर आता है तो कभी सड़कों पर घूमता मिलता है। खासकर गलियों में खेलते बच्चों के लिए भय का माहौल रहता है। हालांकि सेक्टरों में बंदरों की संख्या अधिक नहीं है, लेकिन कुछ चुनिंदा कॉलोनियों में इनके झुंड आसानी से दिख जाते हैं। इनमें एचएयू के साथ लगती कॉलोनियों के अलावा कृष्णा नगर, जयदेव नगर, सूर्यनगर आदि क्षेत्र शामिल हैं। बंदरों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है कि पिछले दो साल से नगर निगम प्रशासन ने बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर नहीं लगाया है। दो साल पहले निजी एजेंसी को बंदर पकड़ने का टेंडर दिया गया था। उस समय एजेंसी ने करीब एक हजार बंदरों को पकड़कर यमुनानगर के पास कलेसर के जंगल में छोड़ा था।
कॉलोनियों में खड़े वाहनों में हो जाते हैं सवार
शहर की कॉलोनियों में झुंड में घूमने वाले बंदर अक्सर खाली खड़े ऑटो या अन्य वाहनों में सवार हो जाते हैं। इसके बाद अठखेलियां करते भी नजर आते हैं। शहरवासी अशोक कुमार, समुंद्र सिंह, शीशपाल, राकेश वर्मा, साधुराम, दीपक आदि बताते हैं कि इन दिनों में बंदरों के काटने या उनकी वजह से किसी हादसे जैसी सूचना तो नहीं आई है। मगर कॉलोनियों में घूमते इनके झुंड भय का कारण जरूर बनते हैं। दो साल पहले बंदर पकड़ने का अभियान चलने से कुछ कमी आई थी। अब दोबारा निगम प्रशासन को अभियान चलाने के लिए टेंडर लगाना चाहिए।
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नगर निगम प्रशासन ने दो साल पहले बंदर पकड़ने के लिए टेंडर लगाया था। उस समय करीब एक हजार बंदर पकड़े गए थे, जिन्हें बाद में कलेसर की पहाड़ियों में छोड़ा गया। अब तो आचार संहिता लगी हुई है। दोबारा हाउस की बैठक होगी, तब इसके लिए टेंडर लगाने का मुद्दा उठाएंगे।
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- ज्योति महाजन, पार्षद, वार्ड नंबर 5
सेक्टर 16-17 में कभी-कभार बंदरों के झुंड दिखते हैं। 60 गज के मकानों वाले ब्लॉक में बंदरों को कई बार देखा गया है। निगम प्रशासन को बंदरों को पकड़ने के लिए फिर से टेंडर लगाना चाहिए।
जितेंद्र श्योराण, प्रधान, सेक्टर 16-17 आरडब्ल्यूए
इस समय आचार संहिता लगी हुई है। वहीं हम प्रॉपर्टी टैक्स के कामकाज में व्यस्त हैं। आचार संहिता हटने के बाद इस विषय में मंत्रणा करके निर्णय लिया जाएगा।
- हरदीप सिंह, ईओ, नगर निगम