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अपने तीन महीने के बेटे को गोद में भी नहीं ले सके सैनिक संदीप-------
Updated Sat, 24 Mar 2018 01:44 AM IST
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हिसार।
सैनिक संदीप सिंह पूनिया अपने तीन महीने के बेटे जितेश को गोद में भी नहीं उठा सके। संदीप आखिरी बार घर में पांच महीने पहले अक्तूबर में आए थे, जबकि उनके जाने के दो महीने बाद दिसंबर में बेटे ने जन्म लिया। परिजनों ने बच्चे के जन्म पर छोटा सा जलवा पूजन का कार्यक्रम किया। बड़ा जश्न मनाने के लिए संदीप के आने का इंतजार था, लेकिन लौटा तो सिर्फ ताबूत में बंद संदीप का पार्थिव शरीर। तीन महीने के बेटे जितेश को जब उनके पिता के अंतिम दर्शन करवाए गए तो वहां मौजूद हर ग्रामीण की आंख से आंसू निकल आए। बेटे की सूचना मिलने पर संदीप के परिजन वीरवार दोपहर बाद नागपुर से गांव में फ्लाइट से आया।
भाई से कहा था, जल्दी आऊंगा
संदीप के जुड़वां भाई मंदीप ने बताया कि उसकी आखिरी बार संदीप से बुधवार रात को बात हुई थी। संदीप ने उससे कहा था कि मैं ठीक हूं, जल्दी ही घर आऊंगा। संदीप ने मंदीप से अच्छा कॅरिअर बनाने के लिए मन लगाकर तैयारी करने को भी कहा था।
बीवी के साथ हुई थी आखिरी बातचीत
मंदीप के मुताबिक संदीप के साथ आखिरी बातचीत उसकी भाभी रेखा से हुई थी। रेखा को उसने बताया था कि अब वह तैयार होकर ड्यूटी के लिए जा रहा है। दोनों वे व्हाट्स ऐप के जरिये वीडियो कालिंग भी की थी, लेकिन रेखा को इस बात का जरा सा भी अहसास नहीं था कि इसके बाद वह दोबारा कभी भी अपने पति से बात नहीं कर पाएंगी।
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पिता नहीं जा पाए सेना में, दादा के नक्शेकदम पर चला पोता
परिवार के अन्य सदस्य बताते हैं कि संदीप के दादा टेकचंद सेना से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हुए थे। संदीप का जन्म दादा के निधन के बाद हुआ था। संदीप के पिता बलबीर सिंह भी सेना में जाना चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं जा पाए, लेकिन संदीप हमेशा सेना में ही जाना चाहता था। इसलिए स्कूल में भी उसने एनसीसी ली।
दूसरी बार में पाई सफलता
भाई मंदीप ने बताया कि संदीप ने नागपुर में ही 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त करते हुए सेना की तैयारी शुरू कर दी। पहली बार में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन चयन नहीं हो सका। इसके बाद फिर से मेहनत की और दूसरी बार में स्टोर कीपर के तौर पर मात्र 18 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए।
भाई बोला, मैं भी जाना चाहता हूं सेना में
मंदीप ने बताया कि सेना की नौकरी इज्जत से भरी है। कौन ऐसा होगा, जो सेना में नहीं जाना चाहेगा। अपने भाई से प्रेरणा लेकर वो भी सेना में जाने के लिए प्रयास करेंगे।
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सैनिक संदीप सिंह पूनिया अपने तीन महीने के बेटे जितेश को गोद में भी नहीं उठा सके। संदीप आखिरी बार घर में पांच महीने पहले अक्तूबर में आए थे, जबकि उनके जाने के दो महीने बाद दिसंबर में बेटे ने जन्म लिया। परिजनों ने बच्चे के जन्म पर छोटा सा जलवा पूजन का कार्यक्रम किया। बड़ा जश्न मनाने के लिए संदीप के आने का इंतजार था, लेकिन लौटा तो सिर्फ ताबूत में बंद संदीप का पार्थिव शरीर। तीन महीने के बेटे जितेश को जब उनके पिता के अंतिम दर्शन करवाए गए तो वहां मौजूद हर ग्रामीण की आंख से आंसू निकल आए। बेटे की सूचना मिलने पर संदीप के परिजन वीरवार दोपहर बाद नागपुर से गांव में फ्लाइट से आया।
भाई से कहा था, जल्दी आऊंगा
संदीप के जुड़वां भाई मंदीप ने बताया कि उसकी आखिरी बार संदीप से बुधवार रात को बात हुई थी। संदीप ने उससे कहा था कि मैं ठीक हूं, जल्दी ही घर आऊंगा। संदीप ने मंदीप से अच्छा कॅरिअर बनाने के लिए मन लगाकर तैयारी करने को भी कहा था।
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बीवी के साथ हुई थी आखिरी बातचीत
मंदीप के मुताबिक संदीप के साथ आखिरी बातचीत उसकी भाभी रेखा से हुई थी। रेखा को उसने बताया था कि अब वह तैयार होकर ड्यूटी के लिए जा रहा है। दोनों वे व्हाट्स ऐप के जरिये वीडियो कालिंग भी की थी, लेकिन रेखा को इस बात का जरा सा भी अहसास नहीं था कि इसके बाद वह दोबारा कभी भी अपने पति से बात नहीं कर पाएंगी।
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पिता नहीं जा पाए सेना में, दादा के नक्शेकदम पर चला पोता
परिवार के अन्य सदस्य बताते हैं कि संदीप के दादा टेकचंद सेना से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हुए थे। संदीप का जन्म दादा के निधन के बाद हुआ था। संदीप के पिता बलबीर सिंह भी सेना में जाना चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं जा पाए, लेकिन संदीप हमेशा सेना में ही जाना चाहता था। इसलिए स्कूल में भी उसने एनसीसी ली।
दूसरी बार में पाई सफलता
भाई मंदीप ने बताया कि संदीप ने नागपुर में ही 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त करते हुए सेना की तैयारी शुरू कर दी। पहली बार में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन चयन नहीं हो सका। इसके बाद फिर से मेहनत की और दूसरी बार में स्टोर कीपर के तौर पर मात्र 18 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए।
भाई बोला, मैं भी जाना चाहता हूं सेना में
मंदीप ने बताया कि सेना की नौकरी इज्जत से भरी है। कौन ऐसा होगा, जो सेना में नहीं जाना चाहेगा। अपने भाई से प्रेरणा लेकर वो भी सेना में जाने के लिए प्रयास करेंगे।