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जिले में सभी 20 गांवों के शराब बंदी के आवेदन रिजेक्ट
Updated Thu, 22 Feb 2018 01:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
जिले में 20 गांवों की पंचायतों ने प्रस्ताव पारित कर शराबबंदी की मांग सरकार को भेजी थी। ये पंचायतें 2018-19 में शराब के ठेके बंद करना चाहती थीं। आबकारी नियमों के चलते इन सभी 20 गांवों में शराब बंद नहीं होगी, क्योंकि इन गांवों में शराब तस्करी के केस पाए गए, इसलिए इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया।
आबकारी अधिनियम के तहत अगर कोई गांव शराबबंदी कराना चाहता हो तो उसे 30 सितंबर तक आवेदन करना होता है। इसके गांव विभाग ऐसे आवेदनों की जांच कर मुख्यालय भेजता है। दिसंबर में ऐसे आवेदनों पर चंडीगढ़ में सुनवाई के बाद फैसला लिया जाता है। नियमों को पूरा करने वाले गांव में एक अप्रैल से शराब बंद कर दी जाती है। इस बार सितंबर तक जिले में केवल चार आवेदन आए थे। नवंबर में सीएम ने शराबबंदी के आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर कर दी। इसके बाद पंचायतों से दोबारा से आवेदन लिए गए। जिले में 20 गांवों की पंचायतों ने प्रस्ताव देकर शराब ठेके बंद कराने का अनुरोध किया। आबकारी विभाग ने इन सभी एप्लीकेशन को मुख्यालय भेजा। यहां फरवरी के पहले सप्ताह में सभी पंचायतों को सुनवाई के लिए बुलाया गया। इसके बाद फरवरी के दूसरे सप्ताह में मुख्यालय में आबकारी विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें जिले के सभी 20 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। किसी भी गांव में शराब का ठेका बंद नहीं किया जाएगा।
इन गांवों ने भेजे थे प्रस्ताव
सारंगपुर, आर्य नगर, पनिहार चक्क, धीरणवास, मंगाली झारा, भोजराज, बालावास, पायल, जगान, चमारखेड़ा, किनाला, संदलाना, सुलखनी, सरहेड़ा, नाड़ा, ढंढेरी, धमाना, मिलकपुर, बड़ाला।
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इसलिए रिजेक्ट हुए प्रस्ताव
आबकारी विभाग के नियमों के अनुसार जो गांव शराबबंदी कराना चाहता है, उसमें पिछले दो साल में शराब तस्करी का कोई केस नहीं होना चाहिए। अगर किसी गांव में एक भी केस हो तो उस गांव में ठेका बंद नहीं होता। इस नियम के चलते किसी भी गांव में शराबबंदी नहीं होगी।
शराब ठेके बंद कराने के लिए 20 गांवों के आवेदन आए थे। इन सभी गांवों का रिकॉर्ड मुख्यालय को उपलब्ध कराया गया था। हर एक गांव को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए मौका दिया गया। अब मुख्यालय की ओर से फैसला आना है। जिन गांवों में शराब तस्करी के केस हैं, वहां शराब ठेके बंद नहीं होंगे।
-एसएस सिवाच, आयुक्त, आबकारी एवं कराधान, हिसार
जिले में खुलेंगे 150 शराब ठेके
जिले में 150 शराब ठेके खोले जाने हैं। एक अप्रैल से नई शराब नीति के अनुसार यह ठेके खुलेंगे। इसके लिए मार्च में ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। पिछले साल नेशनल हाईवे से ठेके 500 मीटर दूर करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विभाग ने ठेकों को शिफ्ट करा दिया था। इस पर विभाग को काफी नुकसान हुआ था।
हमने अपने लेवल पर बहुत प्रयास किए। अधिकारी बंद ही नहीं करवाना चाहते थे। जल्द ग्रामीणों से बात करके आगे का निर्णय लिया जाएगा।
-जगदीश, सरपंच, ग्राम पंचायत आर्यनगर
पिछले दो साल से शराबबंदी के प्रस्ताव दे रहे हैं। हर बार अधिकारी अवैध शराब के केस बताकर शराब बंद नहीं करते। ग्रामीण विभाग से आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
-मनवीर पूनिया, ग्राम पंचायत सरेहड़ा
गांव में शराब ठेका बंद करवाने के लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा था। चंडीगढ़ मीटिंग में अपनी बात रखी थी। सरकार ने इस तरह का कोई मामला रिजेक्ट किया है तो हम अपनी ग्राम पंचायत ठेका खोलने का विरोध नहीं करेगी।
-धर्मपाल सांगा, सरपंच प्रतिनिधि सुलखनी
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हिसार।
जिले में 20 गांवों की पंचायतों ने प्रस्ताव पारित कर शराबबंदी की मांग सरकार को भेजी थी। ये पंचायतें 2018-19 में शराब के ठेके बंद करना चाहती थीं। आबकारी नियमों के चलते इन सभी 20 गांवों में शराब बंद नहीं होगी, क्योंकि इन गांवों में शराब तस्करी के केस पाए गए, इसलिए इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया।
आबकारी अधिनियम के तहत अगर कोई गांव शराबबंदी कराना चाहता हो तो उसे 30 सितंबर तक आवेदन करना होता है। इसके गांव विभाग ऐसे आवेदनों की जांच कर मुख्यालय भेजता है। दिसंबर में ऐसे आवेदनों पर चंडीगढ़ में सुनवाई के बाद फैसला लिया जाता है। नियमों को पूरा करने वाले गांव में एक अप्रैल से शराब बंद कर दी जाती है। इस बार सितंबर तक जिले में केवल चार आवेदन आए थे। नवंबर में सीएम ने शराबबंदी के आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर कर दी। इसके बाद पंचायतों से दोबारा से आवेदन लिए गए। जिले में 20 गांवों की पंचायतों ने प्रस्ताव देकर शराब ठेके बंद कराने का अनुरोध किया। आबकारी विभाग ने इन सभी एप्लीकेशन को मुख्यालय भेजा। यहां फरवरी के पहले सप्ताह में सभी पंचायतों को सुनवाई के लिए बुलाया गया। इसके बाद फरवरी के दूसरे सप्ताह में मुख्यालय में आबकारी विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें जिले के सभी 20 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। किसी भी गांव में शराब का ठेका बंद नहीं किया जाएगा।
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इन गांवों ने भेजे थे प्रस्ताव
सारंगपुर, आर्य नगर, पनिहार चक्क, धीरणवास, मंगाली झारा, भोजराज, बालावास, पायल, जगान, चमारखेड़ा, किनाला, संदलाना, सुलखनी, सरहेड़ा, नाड़ा, ढंढेरी, धमाना, मिलकपुर, बड़ाला।
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इसलिए रिजेक्ट हुए प्रस्ताव
आबकारी विभाग के नियमों के अनुसार जो गांव शराबबंदी कराना चाहता है, उसमें पिछले दो साल में शराब तस्करी का कोई केस नहीं होना चाहिए। अगर किसी गांव में एक भी केस हो तो उस गांव में ठेका बंद नहीं होता। इस नियम के चलते किसी भी गांव में शराबबंदी नहीं होगी।
शराब ठेके बंद कराने के लिए 20 गांवों के आवेदन आए थे। इन सभी गांवों का रिकॉर्ड मुख्यालय को उपलब्ध कराया गया था। हर एक गांव को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए मौका दिया गया। अब मुख्यालय की ओर से फैसला आना है। जिन गांवों में शराब तस्करी के केस हैं, वहां शराब ठेके बंद नहीं होंगे।
-एसएस सिवाच, आयुक्त, आबकारी एवं कराधान, हिसार
जिले में खुलेंगे 150 शराब ठेके
जिले में 150 शराब ठेके खोले जाने हैं। एक अप्रैल से नई शराब नीति के अनुसार यह ठेके खुलेंगे। इसके लिए मार्च में ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। पिछले साल नेशनल हाईवे से ठेके 500 मीटर दूर करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विभाग ने ठेकों को शिफ्ट करा दिया था। इस पर विभाग को काफी नुकसान हुआ था।
हमने अपने लेवल पर बहुत प्रयास किए। अधिकारी बंद ही नहीं करवाना चाहते थे। जल्द ग्रामीणों से बात करके आगे का निर्णय लिया जाएगा।
-जगदीश, सरपंच, ग्राम पंचायत आर्यनगर
पिछले दो साल से शराबबंदी के प्रस्ताव दे रहे हैं। हर बार अधिकारी अवैध शराब के केस बताकर शराब बंद नहीं करते। ग्रामीण विभाग से आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
-मनवीर पूनिया, ग्राम पंचायत सरेहड़ा
गांव में शराब ठेका बंद करवाने के लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा था। चंडीगढ़ मीटिंग में अपनी बात रखी थी। सरकार ने इस तरह का कोई मामला रिजेक्ट किया है तो हम अपनी ग्राम पंचायत ठेका खोलने का विरोध नहीं करेगी।
-धर्मपाल सांगा, सरपंच प्रतिनिधि सुलखनी