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नशा छोड़ने के लिए 105 मरीज हर रोज ले रहे नागरिक अस्पताल के ओएसटी सेंटर से दवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Oct 2022 11:15 PM IST
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105 patients taking medicines from civic hospital's OST centre every day to quit drugs
युवाओं को नशे से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी देते मनोरोग चिकित्सक। - फोटो : Hisar
हिसार। कभी शौकियां तो कभी दोस्तों के बीच स्टेटस सिंबल के रूप में नशे की शुरुआत लोगों की जिंदगी को दलदल में ढकेल रही है। नागरिक अस्पताल के ओएसटी सेंटर में हर रोज 105 मरीज नशे की लत को छोड़ने के लिए दवा लेने आ रहे हैं। जिले के 625 मरीज पंजीकृत हैं। कुछ मरीज सेंटर में भर्ती भी हैं। नशा छोड़ने आने वाले युवाओं की पहले काउंसिलिंग की जाती है। यह कहना है मनो चिकित्सक डॉ. प्रशांत का।
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उन्होंने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हमेशा नशे की लत की गंभीरता को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया। इसी के चलते उनके जन्मदिवस के अवसर पर लोगों को नशे की गंभीरता के बारे में जागरूक करने और उन्हें इस आदत से दूर रहने के लिए 2 अक्तूबर को राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया जाता है।
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नशा समाज के लिए सबसे बड़ी बुराई
नागरिक अस्पताल के मनो चिकित्सक प्रशांत ने बताया कि मादक पदार्थों के सेवन से मस्तिष्क संबंधी बीमारियों होती हैं। यह न केवल व्यक्ति बल्कि समाज को प्रभावित करता है। नशा व्यक्ति को परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से अलग कर देेता है। शुरुआत में अधिकतर युवा दोस्तों के दबाव में या फिर मस्ती और जिज्ञासा में नशे का इस्तेमाल करते थे। धीरे-धीरे वह इसके आदी हो जाते हैं और अपनी जान तक गवां बैठते हैं।
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उन्होंने बताया कि नागरिक अस्पताल में आने वाले मरीजों की पहले काउंसिलिंग की जाती है। काउंसिलिंग के दौरान पता चल जाता है कि मरीज नशा छोड़ना चाहता है या नहीं। इसके बाद मरीज को हर रोज दवा लेने के लिए अस्पताल बुलाया जाता है। मरीज की ज्यादा तबीयत खराब हो तो उसे उपचार के लिए सेंटर में भर्ती कर दिया जाता है।
नशा करने वालों के लक्षण
अवसाद में रहना।
नींद न आना।
ज्यादा पसीना आना।
नाक बहना।
पांव का भड़कना।
उल्टी आना।
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