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नगर निगम प्रशासन हुआ फेल तो सेक्टरवासियों ने जान जोखिम में डालकर खुद पकड़े लावारिस पशु
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। शहर को कैटल फ्री घोषित करने के बाद भी सड़कों से लावारिस पशु हटाने में नगर निगम प्रशासन पूरी तरह फेल हो गया है। इसी कारण अब इस परेशानी से निपटने के लिए शहरवासियों को अपना काम धंधा छोड़कर जान जोखिम में डालकर पशुओं को पकड़ना पड़ रहा है।
बुधवार को सेक्टर 16-17 की आरडब्ल्यूए ने सेक्टरवासियों के साथ मिलकर सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं को पकड़कर कम्युनिटी सेंटर में रोक लिया। आरडब्ल्यूए प्रधान जितेंद्र श्योराण के नेतृत्व में सेक्टरवासियों ने कुछ पशुओं को तो हांककर कम्युनिटी सेंटर में पहुंचाया जबकि कुछ पशुओं को पकड़ने के लिए उन्हें जान हथेली पर लेकर कोशिश करनी पड़ी। इतना सब कुछ होने के बाद भी नगर निगम प्रशासन के अधिकारियों को शर्म महसूस नहीं हुई। कम्युनिटी सेंटर में रोके गए सभी पशुओं को भी निगम अधिकारी गोशाला या नंदीशाला नहीं पहुंचा पाए। शाम को मात्र 10 नंदी निगम की नंदीशाला भेजे गए जबकि 6 गायों को गांव डोभी की गोशाला में पहुंचाया गया। बाकी पशु रात भर कम्युनिटी सेंटर में ही रोके रखे गए।
बार-बार सूचना देने के बाद भी दिनभर नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
बुधवार सुबह करीब 10 बजे आरडब्लयूए प्रधान जितेंद्र श्योराण अपने साथियों भूपसिंह, मनविन्द्र सेठी, सुजान सिंह बैनीवाल, डॉ. बलबीर ढांडी, डॉ. एसके चोपड़ा, ओपी चावला, चंद्र कटारिया, राजेश भुंबक, राजेन्द्र चौहान, कर्मबीर ढांडा, डा. राजीव बुड़ानिया, हंसराज ठकराल, अमित बेरवाल, साहिल दलाल, यशपाल व संदीप बामल सहित कई सेक्टरवासियों को साथ लेकर पशुओं को पकड़ने में जुट गए। श्योराण ने कई बार निगम के अधिकारियों को मौके पर आकर हालात देखने का आग्रह किया। मगर बार-बार सूचना देने के बाद भी दिन भर कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। शाम को निगम के वीएलडीए डॉ.सतबीर और ठेकेदार कम्युनिटी सेंटर तक आए और मात्र 16 पशु लेकर हाथ खड़े कर दिए।
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पहले से ही दिया था अल्टीमेटम फिर भी नहीं किए कोई प्रयास
सेक्टर 16-17 एवं 13 पार्ट-2 रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने सेक्टरों में घूम रही गायों और नंदियों को पकड़ने के लिए पहले ही निगम प्रशासन को 5 फरवरी तक का अल्टीमेटम दे दिया था। चेतावनी दी गई थी कि अगर पशु सड़कों से नहीं हटवाए गए तो उन्हें पकड़कर कम्युनिटी सेंटर में एकत्रित करना शुरू कर देंगे। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने कोई प्रयास नहीं किए। आखिरकार आरडब्ल्यूए को अल्टीमेटम पूरा होते ही पशुओं को कम्युनिटी सेंटर में रोकना पड़ा।
पशुपालक पहुंचे तो बनी टकराव की स्थिति
कम्युनिटी सेंटर में गायों को रोकने की सूचना पाकर ही गाय मालिकों में खलबली मच गई। कई गायों के मालिक तो कम्युनिटी सेंटर के पास आकर हालात देखते रहे। इस दौरान गाय मालिकों व सेक्टरवासियों में कई बार टकराव होते-होते बचा और माहौल तनावपूर्ण बना रहा। मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया गया तो पुलिस केवल एक बार गश्त लगाकर चली गई। सेक्टरवासियों ने आरोप लगाया कि इस दौरान नगर निगम का कोई अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा। जितेंद्र श्योराण व अन्य सेक्टरवासियों ने आरोप लगाया कि सड़कों पर घूम रही गाय पशुपालकों की ही है। सुबह और शाम को दो समय दूध निकालने के बाद पशुपालक इन गायों को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं।
आज सेक्टर-13 में पकड़ी जाएंगी गाय
जितेंद्र श्योराण ने बताया कि वीरवार को सेक्टर-13 में घूम रही गायों को पकड़कर सेक्टर-13 के कम्युनिटी सेंटर में एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद भी निगम अधिकारियों की आंखें नहीं खुली तो शहर की गायों व अन्य पशुओं को पकड़कर नगर निगम कार्यालय में एकत्रित किया जाएगा।
दो ठेकेदारों को दिया था ठेका, एक बीच में ही छोड़ गया
निगम प्रशासन ने पिछले सप्ताह ही दो ठेकेदारों को शहर में घूम रही गायों को पकड़ने का ठेका दिया था। अधिकारियों द्वारा कोई खास मदद नहीं मिल पाई इसलिए एक ठेकेदार ने तो बीच में ही ठेका छोड़ दिया। इन दोनों ठेकेदारों ने अब तक करीब 70 गाय पकड़ी हैं।
शहर को लावारिस पशुओं से मुक्ति नहीं दिला पाने के ये हैं जिम्मेदार
1. मेयर गौतम सरदाना
शहर का प्रथम व्यक्ति होने के कारण मेयर का यह कर्तव्य है कि वह शहरवासियों की समस्याओं का समाधान करवाए। हालांकि मौजूदा मेयर गौतम सरदाना को शपथ ग्रहण किए हुए मात्र 26 दिन हुए हैं। इसलिए वह यह कहकर जिम्मेदारी से बच सकते हैं कि वह सिस्टम को समझ रहे हैं।
2. निगम कमिश्नर अशोक बंसल
मेयर के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी निगम कमिश्नर की है। मौजूदा निगम कमिश्नर अशोक बंसल के पास पार्षदों से लेकर सामाजिक संगठनों की ओर से बार-बार लावारिस पशुओं से छुटकारा दिलाने की शिकायतें जाती रही हैं। मगर उनकी तरफ से किए गए प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। यहां तक कि कागजों में शहर को स्ट्रे कैटल फ्री भी घोषित करवा दिया गया है। इस बारे में उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
3. ठेकेदार विकास पूनिया
ठेकेदार विकास पूनिया के पास शहर में गायों को पकड़ने की जिम्मेदारी है। हालांकि उन्हें जनवरी महीने के अंतिम सप्ताह में ही ठेका मिला था। उन्होंने 26 जनवरी से पशुओं को पकड़ना शुरू किया था। उन्होंने 15 गायों को गोशाला में छुड़वाया है। बाद में गोशाला संचालकों ने मना कर दिया था।
क्या कहते हैं ठेकेेदार
ठेकेदार विकास पूनिया का कहना है कि पहले गोशाला संचालकों की ओर से 35 पशु रखने के बाद मना किया गया था। मगर बुधवार को निगम कमिश्नर की गोशाला संचालकों से बातचीत हुई है। उन्होंने पशु रखने की हामी भर दी है। वहीं गांव ढंढूर की नंदीशाला में भी अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसलिए आगामी 15 दिनों में इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण हो जाएगा।
लावारिस पशुओं की समस्या से पूरा शहर जूझ रहा है। आए दिन सड़कों पर पशुओं के झुंड देखे जा सकते हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत है। हमने भी मेयर व अधिकारियों से समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। हमने खुद भी रात को पशुओं के गले में रेडियम पट्टी लगाई थी। लगातार मुद्दा उठा रहे हैं।
- अमित ग्रोवर, पार्षद, वार्ड नंबर 14
:: वार्ड नंबर 13 का क्षेत्र अर्बन एस्टेट भी लावारिस पशुओं के कारण पशुबाड़ा बना हुआ है। हर रोज सुबह से लेकर रात भर पशु सड़कों पर झुंड बनाकर घूमते रहते हैं। निश्चित तौर पर इस समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।
- उदयवीर सिंह मिंटू, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड नंबर 13
मेयर गौतम सरदाना से सीधे सवाल
सवाल - एक्शन मोड में कब आओगे?
मेयर - गोशाला संचालकों के साथ बैठक कर उनसे आग्रह किया है। उन्होंने सहमति दे दी है।
सवाल - लोग पशु पकड़ेंगे, फिर उन्हें गोशाला भेजेंगे। निगम की टीमें क्या करेंगी?
मेयर - अगले 7 दिनों में पकड़े जाने वाले पशुओं को रखने के लिए हमारे पास व्यवस्था हो गई है।
सवाल - उसके बाद क्या होगा?
मेयर - उसके बाद हम गो-अभ्यारणय को भी जल्द तैयार करवा रहे हैं। फिर पशु वहां भेजे जाएंगे।
सवाल - पशुपालक ही सड़कों पर पशु छोड़ रहे हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
मेयर - मैंने अधिकारियों से कह दिया है कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई करो।
सवाल - लावारिस पशुओं का स्थायी समाधान कब होगा?
मेयर - मैं अपने भरसक प्रयास करूंगा। अब कागजों में शहर को कैटल फ्री नहीं होने देंगे। शहरवासियों के सहयोग की भी पूरी जरूरत है।
कैटल फ्री शहर करने का अब सबसे बड़ा मौका : श्योराण
सेक्टर 16-17 आरडब्लयूए प्रधान जितेंद्र श्योराण का कहना है कि पहले तो अधिकारियों ने कागजों में कैटल फ्री शहर कर दिया। मगर अब शहरवासियों के पास शहर को सही मायनों में कैटल फ्री करने का मौका है। हमने मुहिम छेड़ दी है। अगर शहर के हर सेक्टर और कालोनी में इसी तरह प्रयास होने लगे तो अधिकारी हरकत में आएंगे। अब शहरवासियों को एकजुट होकर लावारिस पशु मुक्त शहर बनाना ही चाहिए।
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हिसार। शहर को कैटल फ्री घोषित करने के बाद भी सड़कों से लावारिस पशु हटाने में नगर निगम प्रशासन पूरी तरह फेल हो गया है। इसी कारण अब इस परेशानी से निपटने के लिए शहरवासियों को अपना काम धंधा छोड़कर जान जोखिम में डालकर पशुओं को पकड़ना पड़ रहा है।
बुधवार को सेक्टर 16-17 की आरडब्ल्यूए ने सेक्टरवासियों के साथ मिलकर सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं को पकड़कर कम्युनिटी सेंटर में रोक लिया। आरडब्ल्यूए प्रधान जितेंद्र श्योराण के नेतृत्व में सेक्टरवासियों ने कुछ पशुओं को तो हांककर कम्युनिटी सेंटर में पहुंचाया जबकि कुछ पशुओं को पकड़ने के लिए उन्हें जान हथेली पर लेकर कोशिश करनी पड़ी। इतना सब कुछ होने के बाद भी नगर निगम प्रशासन के अधिकारियों को शर्म महसूस नहीं हुई। कम्युनिटी सेंटर में रोके गए सभी पशुओं को भी निगम अधिकारी गोशाला या नंदीशाला नहीं पहुंचा पाए। शाम को मात्र 10 नंदी निगम की नंदीशाला भेजे गए जबकि 6 गायों को गांव डोभी की गोशाला में पहुंचाया गया। बाकी पशु रात भर कम्युनिटी सेंटर में ही रोके रखे गए।
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बुधवार सुबह करीब 10 बजे आरडब्लयूए प्रधान जितेंद्र श्योराण अपने साथियों भूपसिंह, मनविन्द्र सेठी, सुजान सिंह बैनीवाल, डॉ. बलबीर ढांडी, डॉ. एसके चोपड़ा, ओपी चावला, चंद्र कटारिया, राजेश भुंबक, राजेन्द्र चौहान, कर्मबीर ढांडा, डा. राजीव बुड़ानिया, हंसराज ठकराल, अमित बेरवाल, साहिल दलाल, यशपाल व संदीप बामल सहित कई सेक्टरवासियों को साथ लेकर पशुओं को पकड़ने में जुट गए। श्योराण ने कई बार निगम के अधिकारियों को मौके पर आकर हालात देखने का आग्रह किया। मगर बार-बार सूचना देने के बाद भी दिन भर कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। शाम को निगम के वीएलडीए डॉ.सतबीर और ठेकेदार कम्युनिटी सेंटर तक आए और मात्र 16 पशु लेकर हाथ खड़े कर दिए।
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सेक्टर 16-17 एवं 13 पार्ट-2 रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने सेक्टरों में घूम रही गायों और नंदियों को पकड़ने के लिए पहले ही निगम प्रशासन को 5 फरवरी तक का अल्टीमेटम दे दिया था। चेतावनी दी गई थी कि अगर पशु सड़कों से नहीं हटवाए गए तो उन्हें पकड़कर कम्युनिटी सेंटर में एकत्रित करना शुरू कर देंगे। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने कोई प्रयास नहीं किए। आखिरकार आरडब्ल्यूए को अल्टीमेटम पूरा होते ही पशुओं को कम्युनिटी सेंटर में रोकना पड़ा।
पशुपालक पहुंचे तो बनी टकराव की स्थिति
कम्युनिटी सेंटर में गायों को रोकने की सूचना पाकर ही गाय मालिकों में खलबली मच गई। कई गायों के मालिक तो कम्युनिटी सेंटर के पास आकर हालात देखते रहे। इस दौरान गाय मालिकों व सेक्टरवासियों में कई बार टकराव होते-होते बचा और माहौल तनावपूर्ण बना रहा। मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया गया तो पुलिस केवल एक बार गश्त लगाकर चली गई। सेक्टरवासियों ने आरोप लगाया कि इस दौरान नगर निगम का कोई अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा। जितेंद्र श्योराण व अन्य सेक्टरवासियों ने आरोप लगाया कि सड़कों पर घूम रही गाय पशुपालकों की ही है। सुबह और शाम को दो समय दूध निकालने के बाद पशुपालक इन गायों को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं।
आज सेक्टर-13 में पकड़ी जाएंगी गाय
जितेंद्र श्योराण ने बताया कि वीरवार को सेक्टर-13 में घूम रही गायों को पकड़कर सेक्टर-13 के कम्युनिटी सेंटर में एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद भी निगम अधिकारियों की आंखें नहीं खुली तो शहर की गायों व अन्य पशुओं को पकड़कर नगर निगम कार्यालय में एकत्रित किया जाएगा।
दो ठेकेदारों को दिया था ठेका, एक बीच में ही छोड़ गया
निगम प्रशासन ने पिछले सप्ताह ही दो ठेकेदारों को शहर में घूम रही गायों को पकड़ने का ठेका दिया था। अधिकारियों द्वारा कोई खास मदद नहीं मिल पाई इसलिए एक ठेकेदार ने तो बीच में ही ठेका छोड़ दिया। इन दोनों ठेकेदारों ने अब तक करीब 70 गाय पकड़ी हैं।
शहर को लावारिस पशुओं से मुक्ति नहीं दिला पाने के ये हैं जिम्मेदार
1. मेयर गौतम सरदाना
शहर का प्रथम व्यक्ति होने के कारण मेयर का यह कर्तव्य है कि वह शहरवासियों की समस्याओं का समाधान करवाए। हालांकि मौजूदा मेयर गौतम सरदाना को शपथ ग्रहण किए हुए मात्र 26 दिन हुए हैं। इसलिए वह यह कहकर जिम्मेदारी से बच सकते हैं कि वह सिस्टम को समझ रहे हैं।
2. निगम कमिश्नर अशोक बंसल
मेयर के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी निगम कमिश्नर की है। मौजूदा निगम कमिश्नर अशोक बंसल के पास पार्षदों से लेकर सामाजिक संगठनों की ओर से बार-बार लावारिस पशुओं से छुटकारा दिलाने की शिकायतें जाती रही हैं। मगर उनकी तरफ से किए गए प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। यहां तक कि कागजों में शहर को स्ट्रे कैटल फ्री भी घोषित करवा दिया गया है। इस बारे में उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
3. ठेकेदार विकास पूनिया
ठेकेदार विकास पूनिया के पास शहर में गायों को पकड़ने की जिम्मेदारी है। हालांकि उन्हें जनवरी महीने के अंतिम सप्ताह में ही ठेका मिला था। उन्होंने 26 जनवरी से पशुओं को पकड़ना शुरू किया था। उन्होंने 15 गायों को गोशाला में छुड़वाया है। बाद में गोशाला संचालकों ने मना कर दिया था।
क्या कहते हैं ठेकेेदार
ठेकेदार विकास पूनिया का कहना है कि पहले गोशाला संचालकों की ओर से 35 पशु रखने के बाद मना किया गया था। मगर बुधवार को निगम कमिश्नर की गोशाला संचालकों से बातचीत हुई है। उन्होंने पशु रखने की हामी भर दी है। वहीं गांव ढंढूर की नंदीशाला में भी अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसलिए आगामी 15 दिनों में इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण हो जाएगा।
लावारिस पशुओं की समस्या से पूरा शहर जूझ रहा है। आए दिन सड़कों पर पशुओं के झुंड देखे जा सकते हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत है। हमने भी मेयर व अधिकारियों से समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। हमने खुद भी रात को पशुओं के गले में रेडियम पट्टी लगाई थी। लगातार मुद्दा उठा रहे हैं।
- अमित ग्रोवर, पार्षद, वार्ड नंबर 14
:: वार्ड नंबर 13 का क्षेत्र अर्बन एस्टेट भी लावारिस पशुओं के कारण पशुबाड़ा बना हुआ है। हर रोज सुबह से लेकर रात भर पशु सड़कों पर झुंड बनाकर घूमते रहते हैं। निश्चित तौर पर इस समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।
- उदयवीर सिंह मिंटू, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड नंबर 13
मेयर गौतम सरदाना से सीधे सवाल
सवाल - एक्शन मोड में कब आओगे?
मेयर - गोशाला संचालकों के साथ बैठक कर उनसे आग्रह किया है। उन्होंने सहमति दे दी है।
सवाल - लोग पशु पकड़ेंगे, फिर उन्हें गोशाला भेजेंगे। निगम की टीमें क्या करेंगी?
मेयर - अगले 7 दिनों में पकड़े जाने वाले पशुओं को रखने के लिए हमारे पास व्यवस्था हो गई है।
सवाल - उसके बाद क्या होगा?
मेयर - उसके बाद हम गो-अभ्यारणय को भी जल्द तैयार करवा रहे हैं। फिर पशु वहां भेजे जाएंगे।
सवाल - पशुपालक ही सड़कों पर पशु छोड़ रहे हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
मेयर - मैंने अधिकारियों से कह दिया है कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई करो।
सवाल - लावारिस पशुओं का स्थायी समाधान कब होगा?
मेयर - मैं अपने भरसक प्रयास करूंगा। अब कागजों में शहर को कैटल फ्री नहीं होने देंगे। शहरवासियों के सहयोग की भी पूरी जरूरत है।
कैटल फ्री शहर करने का अब सबसे बड़ा मौका : श्योराण
सेक्टर 16-17 आरडब्लयूए प्रधान जितेंद्र श्योराण का कहना है कि पहले तो अधिकारियों ने कागजों में कैटल फ्री शहर कर दिया। मगर अब शहरवासियों के पास शहर को सही मायनों में कैटल फ्री करने का मौका है। हमने मुहिम छेड़ दी है। अगर शहर के हर सेक्टर और कालोनी में इसी तरह प्रयास होने लगे तो अधिकारी हरकत में आएंगे। अब शहरवासियों को एकजुट होकर लावारिस पशु मुक्त शहर बनाना ही चाहिए।