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गुंजार के किसानों का फसल बीमा अटका
Updated Mon, 30 Oct 2017 12:59 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
गांव गुंजार के किसानों का फसल बीमा बैंक की लिमिट के कारण अटक गया है। पिछले साल खरीफ की फसलों का पीएनबी से बीमा कराने वाले किसानों को अब तक बीमा नहीं मिल सका।
गांव गुंजार के किसान रामानंद, धर्मपाल, सीताराम प्रधान, ओमप्रकाश, बलवान सिंह, मुकेश ,राजेश, प्रदीप, रामगिरी, दलबीर, कंवर सिंह,महाबीर सिंह, हरि सिंह, पृथ्वी सिंह, चंदगीराम, प्रताप सिंह, प्रताप सिंह, रेवती देवी, रोहताश, रामफल, महेंद्र, सतपाल, दुलीचंद, धर्मबीर, धर्मसिंह, रतन सिंह, रोहताश सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि उनके गांव में बैंक नहीं है। इस कारण किसानों ने पीएनबी नलवा में अपना खाता खोल रखा है। पिछले साल धान व कपास की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत इन गांव के किसानों ने प्रीमियम अदा किया। इसी गांव के कुछ किसानों ने मंगाली गांव स्थित एसबीआई से इंश्योरेंस कराया। कपास में काफी नुकसान होने पर बीमा कंपनी ने सर्वे किया। इसमें एसबीआई से बीमा कराने वाले किसानों को मुआवजा मिल गया। पीएनबी से बीमा कराने वालों को कोई मुआवजा नहीं मिला।
किसानों ने इस बारे में बीमा कंपनी से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि बैंक ने गुंजार को नोटिफाई एरिया नहीं दिखाया है। बैंक ने इन सभी खाता धारकों की रिहायशी एरिया गुंजार की बजाए नलवा दिखा रखा। इन सभी के खेत गुंजार में हैं। इस कारण किसानों को बीमा नहीं दिया जा सकता। इसके बाद किसानों ने डीसी निखिल गजराज को शिकायत दी। डीसी के बाद उप कृषि निदेशक को भी अवगत कराया। उप कृषि निदेशक ने इस बारे में लीड बैंक मैनेजर को लेटर भेजा। पिछले एक साल से चक्कर लगा रहे किसानों को अब तक बीमा नहीं मिला।
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बैंक और बीमा कंपनी के बीच कम्युनिकेशन गैप के कारण मुआवजा अटका होगा। इस बारे में एलबीएम को भी लिखा हुुआ है। किसानों को मुआवजा हर हाल में दिलाएंगे।
-डॉ. वीएस फौगाट, उप कृषि निदेशक, हिसार।
साइक्लोन लिखने से अटका बीमा
फसल बीमा योजना में पिछले दिनों सर्दी के मौसम में तेज ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी। इसमें एक किसान ने फसल खराब होने का कारण साइक्लोन लिख दिया। इससे किसान को मुआवजा नहीं मिल सका।
बीमा कराने वाले किसान एक साल में 14 हजार घटे
पिछले साल 69830 किसानों ने खरीफ फसलों का बीमा कराया था। इस साल खरीफ की फसलों के लिए 55757 किसानों ने ही बीमा कराया है। पिछले साल की तुलना में करीब 14 हजार किसानों ने बीमा कम कराया है।
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हिसार।
गांव गुंजार के किसानों का फसल बीमा बैंक की लिमिट के कारण अटक गया है। पिछले साल खरीफ की फसलों का पीएनबी से बीमा कराने वाले किसानों को अब तक बीमा नहीं मिल सका।
गांव गुंजार के किसान रामानंद, धर्मपाल, सीताराम प्रधान, ओमप्रकाश, बलवान सिंह, मुकेश ,राजेश, प्रदीप, रामगिरी, दलबीर, कंवर सिंह,महाबीर सिंह, हरि सिंह, पृथ्वी सिंह, चंदगीराम, प्रताप सिंह, प्रताप सिंह, रेवती देवी, रोहताश, रामफल, महेंद्र, सतपाल, दुलीचंद, धर्मबीर, धर्मसिंह, रतन सिंह, रोहताश सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि उनके गांव में बैंक नहीं है। इस कारण किसानों ने पीएनबी नलवा में अपना खाता खोल रखा है। पिछले साल धान व कपास की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत इन गांव के किसानों ने प्रीमियम अदा किया। इसी गांव के कुछ किसानों ने मंगाली गांव स्थित एसबीआई से इंश्योरेंस कराया। कपास में काफी नुकसान होने पर बीमा कंपनी ने सर्वे किया। इसमें एसबीआई से बीमा कराने वाले किसानों को मुआवजा मिल गया। पीएनबी से बीमा कराने वालों को कोई मुआवजा नहीं मिला।
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किसानों ने इस बारे में बीमा कंपनी से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि बैंक ने गुंजार को नोटिफाई एरिया नहीं दिखाया है। बैंक ने इन सभी खाता धारकों की रिहायशी एरिया गुंजार की बजाए नलवा दिखा रखा। इन सभी के खेत गुंजार में हैं। इस कारण किसानों को बीमा नहीं दिया जा सकता। इसके बाद किसानों ने डीसी निखिल गजराज को शिकायत दी। डीसी के बाद उप कृषि निदेशक को भी अवगत कराया। उप कृषि निदेशक ने इस बारे में लीड बैंक मैनेजर को लेटर भेजा। पिछले एक साल से चक्कर लगा रहे किसानों को अब तक बीमा नहीं मिला।
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बैंक और बीमा कंपनी के बीच कम्युनिकेशन गैप के कारण मुआवजा अटका होगा। इस बारे में एलबीएम को भी लिखा हुुआ है। किसानों को मुआवजा हर हाल में दिलाएंगे।
-डॉ. वीएस फौगाट, उप कृषि निदेशक, हिसार।
साइक्लोन लिखने से अटका बीमा
फसल बीमा योजना में पिछले दिनों सर्दी के मौसम में तेज ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी। इसमें एक किसान ने फसल खराब होने का कारण साइक्लोन लिख दिया। इससे किसान को मुआवजा नहीं मिल सका।
बीमा कराने वाले किसान एक साल में 14 हजार घटे
पिछले साल 69830 किसानों ने खरीफ फसलों का बीमा कराया था। इस साल खरीफ की फसलों के लिए 55757 किसानों ने ही बीमा कराया है। पिछले साल की तुलना में करीब 14 हजार किसानों ने बीमा कम कराया है।