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खेमका ने भी बेचा था 15 नवंबर के बाद गेहूं बीज
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 13 Dec 2013 01:57 AM IST
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हरियाणा बीज विकास निगम के एमडी रहे अशोक खेमका के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सिरसा में पिछले सप्ताह हुए गेहूं बीज घोटाले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग के बाद मौजूदा एमडी डॉ. बीएस दुग्गल ने दावा किया है कि खेमका के कार्यकाल में पिछले साल गेहूं की डीबीडब्ल्यू 17 किस्म का बीज 15 नवंबर के बाद बेचा गया था।
अब खेमका किस आधार पर कह रहे हैं कि 15 नवंबर के बाद इस गेहूं की बिजाई नहीं होती और 15 नवंबर के बाद बेचे गए बीज की जांच हो।
दुग्गल ने पूछने पर बताया कि पिछले साल निगम के पास 87000 क्विंटल गेहूं बीज बच गया था।
इसमें से 45000 क्विंटल डीबीडब्ल्यू 17 किस्म का बीज था। इस साल 22 नवंबर तक यह बीज 2100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा गया, मगर जब मांग कम हुई तो निगम ने यह बीज 2000 रुपये क्विंटल की दर से बेचा।
अब किसानों की तरफ से शिकायतें मिल रही हैं कि पुराने बीज से गेहूं की फसल कम पैदा हो रही है। अब पिछले साल के बचे डीबीडब्ल्यू किस्म का 13000 क्विंटल बीज बिकने से बच गया है।
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उन्होंने कहा उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार डीबीडब्ल्यू 17 किस्म के बीज की बिजाई 25 नवंबर तक कर लेनी चाहिए, मगर यह मौसम पर निर्भर करता है और किसान दिसंबर के अंत तक इसकी बिजाई करते रहते हैं।
देरी से बिजाई करने पर उत्पादकता पर असर पड़ता है। दुग्गल ने कहा कि पिछले साल 15 नवंबर के बाद डीबीडब्ल्यू 17 किस्म का बीज 13438 क्विंटल बेचा गया था। तब 500 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी दी गई थी।
यह सब्सिडी 67 लाख रुपये बनती है। उन्होंने कहा कि पिछले साल 12 दिसंबर के बाद सीड विलेज स्कीम के तहत डीबीडब्ल्यू 17 किस्म का बीज आधे रेट पर 2128 क्विंटल बेचा गया था।
आधे रेट पर दी गई सब्सिडी 27 लाख बनती है।
सिरसा के आठ लोग सस्पेंड, चार्जशीट हुए
निगम के एमडी डॉ. बीएस दुग्गल ने बताया कि सिरसा बीज घोटाले में संलिप्त मैनेजर ओपीएस पंवार को तुरंत बर्खास्त कर दिया गया है।
इसके अलावा सहायक मार्केटिंग मैनेजर दूनी चंद, सहायक स्टोर कीपर देवराज और छह सेल्समैन को निलंबित कर दिया गया है। आठों के खिलाफ कड़े दंड की चार्जशीट जारी की गई है।
सिरसा में गेहूं का बीज 360 क्विंटल पकड़ा गया था। यह बीज किसानों को 2000 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाना था।
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अब खेमका किस आधार पर कह रहे हैं कि 15 नवंबर के बाद इस गेहूं की बिजाई नहीं होती और 15 नवंबर के बाद बेचे गए बीज की जांच हो।
दुग्गल ने पूछने पर बताया कि पिछले साल निगम के पास 87000 क्विंटल गेहूं बीज बच गया था।
इसमें से 45000 क्विंटल डीबीडब्ल्यू 17 किस्म का बीज था। इस साल 22 नवंबर तक यह बीज 2100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा गया, मगर जब मांग कम हुई तो निगम ने यह बीज 2000 रुपये क्विंटल की दर से बेचा।
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अब किसानों की तरफ से शिकायतें मिल रही हैं कि पुराने बीज से गेहूं की फसल कम पैदा हो रही है। अब पिछले साल के बचे डीबीडब्ल्यू किस्म का 13000 क्विंटल बीज बिकने से बच गया है।
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उन्होंने कहा उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार डीबीडब्ल्यू 17 किस्म के बीज की बिजाई 25 नवंबर तक कर लेनी चाहिए, मगर यह मौसम पर निर्भर करता है और किसान दिसंबर के अंत तक इसकी बिजाई करते रहते हैं।
देरी से बिजाई करने पर उत्पादकता पर असर पड़ता है। दुग्गल ने कहा कि पिछले साल 15 नवंबर के बाद डीबीडब्ल्यू 17 किस्म का बीज 13438 क्विंटल बेचा गया था। तब 500 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी दी गई थी।
यह सब्सिडी 67 लाख रुपये बनती है। उन्होंने कहा कि पिछले साल 12 दिसंबर के बाद सीड विलेज स्कीम के तहत डीबीडब्ल्यू 17 किस्म का बीज आधे रेट पर 2128 क्विंटल बेचा गया था।
आधे रेट पर दी गई सब्सिडी 27 लाख बनती है।
सिरसा के आठ लोग सस्पेंड, चार्जशीट हुए
निगम के एमडी डॉ. बीएस दुग्गल ने बताया कि सिरसा बीज घोटाले में संलिप्त मैनेजर ओपीएस पंवार को तुरंत बर्खास्त कर दिया गया है।
इसके अलावा सहायक मार्केटिंग मैनेजर दूनी चंद, सहायक स्टोर कीपर देवराज और छह सेल्समैन को निलंबित कर दिया गया है। आठों के खिलाफ कड़े दंड की चार्जशीट जारी की गई है।
सिरसा में गेहूं का बीज 360 क्विंटल पकड़ा गया था। यह बीज किसानों को 2000 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाना था।