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Haryana: आधुनिकता संग बदला दीयों का आकार, अच्छी बिक्री की उम्मीद, कुरुक्षेत्र से देखिए ये रिपोर्ट
सार
दीपावली पर्व पर घरों को मिट्टी के दीयों से रोशन करने की सदियों पुरानी परंपरा है। चाइनीज लाइटों के आने से बिक्री पर असर पड़ रहा है, लेकिन मिट्टी से बने सामान की बाजार में अभी भी मांग है।
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बनाए गए दीये।
- फोटो : संवाद
विस्तार
दीपावली पर घरों को मिट्टी के दीयों से रोशन करने की परंपरा सदियों पुरानी रही है। हर साल लोग दीपावली पर मिट्टी के दीये खरीद कर इस परंपरा को निभाते हैं। इस पर्व को लेकर पुश्तैनी कार्य कर रहे संबंधित लोग पिछले दो महीने से मिट्टी के दीयों को कई प्रकार के आकार देने और उनकी सजावट करने में जुटे हैं। इस बार भी दीपावली पर्व पर आधुनिकता की चकाचौंध के बीच मिट्टी के दीयों से हर घर रोशन होगा।
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हालांकि समय बदलने के साथ-साथ आधुनिकता का असर अब मिट्टी के दीयों पर भी देखा जाने लगा है, जिसके चलते इन मिट्टी के दीयों को कई तरह का आकार भी दिया जाने लगा है। साथ ही दीयों पर कई तरह के सामान लगाकर उनकी सुंदरता को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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दीपावली पर्व नजदीक आते ही इन मिट्टी के दीयों की मांग भी काफी बढ़ने लग जाती है और कुम्हार भी तेजी से इन दीयों को तैयार करने में दिन रात एक किए हुए है। ऐसे में उन्हें इस बार उम्मीद है कि उनकी दिवाली भी रोशन रहेगी। मिट्टी के दीये व अन्य सामान को बनाने में माता-पिता के साथ उनके बच्चे भी हाथ बंटाते देखे जा सकते हैं। मशीनी चाक से मिट्टी को आकार देकर नए-नए दीये व अन्य सामान तैयार करने में संबंधित लोग जुटे हैं।
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आबादी बढ़ने से दीयों की बिक्री भी बढ़ी : रामकुमार
रामकुमार प्रजापत का कहना है कि वे पिछले 50 साल से दीये बना रहे है ये उनका पुश्तैनी काम है। पहले वे चाक के माध्यम से मिट्टी के बर्तन व दिए तैयार करते थे लेकिन अब बिजली की मशीन आने से काफी सुविधा हुई है। इससे कई तरह के आकार के दीयों व मिट्टी के बर्तनों को तैयार किया जा सकता हैं। दीपावली पर दीयों की बिक्री करने से जो मुनाफा होता है, उससे ही घर की रोजी रोटी चलती है। जबकि चाइनीज लाइटों का असर भी थोड़ा पड़ता है, लेकिन अब आबादी बढ़ने से दीयों की खरीद भी बढ़ने लगी है।
इस बार कारोबार बेहतर रहने की उम्मीद : रामचंद्र
दयालपुर के रामचंद्र का कहना है कि दीयों के व्यापार से उनकी रोजी रोटी ही चल पाती है। दीपावली पर्व के लिए दीये तैयार किए जा रहे हैं, जो कि लोग काफी पसंद करते हैं। उम्मीद है कि इस बार भी दीपावली त्योहार पर बेहतर कारोबार होगा। हालांकि चाइनीज लाइटों का असर अब दीयों पर पड़ने लगा है। इससे बिक्री कम होती है। लोग ज्यादातर घरों को सजाने के लिए चाइनीज लाइटों का प्रयोग करते हैं। ऐसे में आज के समय में इस कारोबार से सिर्फ रोजी रोटी ही चलाई जा सकती है। इस बार प्रधानमंत्री की अपील के बाद बेहतर कारोबार होने की उम्मीद है।
परिवार का होता है पालन पोषण : राजकुमार
मुख्य बाजार के समीप रहने वाले 65 वर्षीय राजकुमार का कहना है कि वे पिछले कई सालों से मिट्टी के बर्तन तैयार करने का काम कर रहे हैं। हर बार दीपावली पर दीये भी तैयार करते हैं। इससे रोजी रोटी ही चल पाती है, जिससे परिवार का पालन पोषण ही हो पाता है। जबकि अब बाजार में चाइनीज लाइटें भी आ गई हैं। इन लाइटों का ज्यादा असर दीयों के व्यापार पर नहीं पड़ता, क्योंकि मिट्टी के दीये पूजा के लिए शुभ होते हैं। हर व्यक्ति मिट्टी के दीये जरूरत खरीदता है।