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हरियाणा: तीन राज्यों में करारी हार के बाद भाजपा के लिए सुकून भरी खबर 

Thu, 20 Dec 2018 04:08 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Thu, 20 Dec 2018 04:08 PM IST
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Haryana Nagar Nigam election 2018 Results: BJP leads over congress
हरियाणा से भाजपा के लिए राहत भरी खबर
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा को लगे झटके के बीच उसके लिए हरियाणा से राहत का हल्का झोंका आया है। तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में मात खाने के बाद हरियाणा स्थानीय चुनाव में भाजपा के लिए अच्छी खबर आई है। अब तक के नतीजों के मुताबिक यहां पर भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। सभी पांच नगर निगमों में भाजपा के मेयर चुने गए हैं। 
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आज हरियाणा के पांच नगर निगम हिसार, रोहतक, करनाल, यमुनानगर और पानीपत के चुनाव परिणाम सामने आए हैं। यहां भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। सभी निगमों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। पांचों जगह भाजपा के मेयर चुने गए हैं। करनाल में रेणु बाला, हिसार में गौतम सरदाना, पानीपत में अवनीत कौर, यमुनानगर में मदन चौहान ने मेयर चुनाव जीता। वार्डों में भी भाजपा सबसे आगे है। 
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पढ़ें- हरियाणा: नगर निगम चुनाव में बीजेपी का परचम लहराया 

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बेशक चुनाव हरियाणा नगर निकाय का हो, लेकिन यहां मिली जीत भाजपा के लिए टॉनिक का काम करेगी। तीन राज्यों में करारी हार के बाद पार्टी सवालों से घिरी हुई है। नेतृत्व और रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। इस हार ने 2019 चुनाव को लेकर भाजपा को बड़ी चिंता में डाल दिया है। ऐसे में हरियाणा का नतीजा उसके लिए सुकून भरा साबित होगा।

कांटों भरा ताज 

हरियाणा में एमएल खट्टर के नेतृत्व में भाजपा सरकार है। उनके लिए सत्ता कांटों भरा ताज रहा है। जाट आरक्षण पर हुई सियासत और हिंसा को भला कौन भुला सकता है। फरवरी 2016 में  जाट आंदोलन के नाम पर हुई हिंसा को लेकर भाजपा की जमकर किरकिरी हुई थी। सियासी मजबूरियों के चलते उसके लिए फैसला लेना मुश्किल हो गया था। हिंसा का तांडव ऐसा था कि  भाजपा मंत्रियों, विधायकों के घरों को भी निशाना बनाया गया। इस पर राज्य और केंद्र सरकार दोनों चुप्पी साधे रहे। बड़े पैमाने पर सैकड़ों लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ था। लेकिन सियासी मजबूरियों के चलते खट्टर सरकार ने इनपर से केस वापस ले लिया था। 



न सिर्फ जाट बल्कि बाकी तबकों में भी भाजपा सरकार के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी थी। लेकिन उस घटना के 22 महीने बाद नगर निगम में भाजपा के पक्ष में जनादेश ने पार्टी को खासी राहत पहुंचाई है। तीन राज्यों में हार के चलते भाजपा पहले से ही कांग्रेस और विपक्ष के निशाने पर है। अगर हरियाणा में भी हार का सिलसिला जारी रहता तो भाजपा के लिए हालात और प्रतिकूल हो जाते। लेकिन लगता है कि हरियाणा की जनता ने भाजपा की लाज रख ली है। कम से कम वह एक और हार व अपमान से बच गई है।

हरियाणा में लोकसभा की 10 सीटें हैं। 2014 चुनाव में भाजपा ने 7 सीटों पर कब्जा जमाया था। आईएनएलडी को 2 और कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली थी। 2019 में भाजपा के लिए एक एक सीट का महत्व है। ऐसे में अगर वह हरियाणा में पिछले प्रदर्शन के आसपास भी रहे तो उसे फायदा होगा। यहां भी कांग्रेस उसे जबरदस्त चुनौती दे रही है। पूर्व सीएम भूपिंदर हुड्डा का जाटों में बड़ा जनाधार है और वह भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। 

 

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