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अब विदेश से शव लाना होगा आसान: हरियाणा सरकार बनाएगी विशेष सहायता कोष, ये हैं शर्तें
Wed, 06 May 2026 09:47 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Wed, 06 May 2026 09:47 PM IST
सार
इसके लिए विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के साथ समन्वय कर शवों को भारत लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की योजना है। हरियाणा विदेश सहयोग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ऐसी नीति तैयार कर रही है।
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सीएम सैनी
- फोटो : ANI
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विस्तार
विदेशों में बेहतर भविष्य की तलाश में गए हरियाणा के युवाओं की मौतों और उनके परिवारों की बेबसी के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रभावित परिवारों के लिए विशेष सहायता कोष बनाने का फैसला किया है। हाल के महीनों में सामने आए दर्दनाक मामलों खासकर यूक्रेन-रूस युद्ध में फंसे युवाओं ने इस जरूरत को और अधिक गंभीर बना दिया है, जहां परिवारों को शव वापस लाने के लिए महीनों इंतजार और भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।
हरियाणा विदेश सहयोग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसमें सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया और शर्तें स्पष्ट होंगी। प्रस्तावित नीति के तहत केवल वैध वीजा पर विदेश गए लोगों को ही कवर किया जाएगा। सरकार न सिर्फ आर्थिक मदद देगी, बल्कि विदेशों में फंसे लोगों और उनके परिजनों को तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी।
इसके लिए विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के साथ समन्वय कर शवों को भारत लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की योजना है। अधिकारियों का कहना है कि विदेश में दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में परिवारों को भारी आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रूस से शव लाने में ही 20 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जो कई परिवारों के लिए काफी मुश्किल होता है।
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हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने ही रूस से हरियाणा के चार युवाओं के शव लाए गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इसे लेकर काफी चिंता जता चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर इस मामले में कोई नीति बनाने को कहा था। इस पर अधिकारियों ने अपना प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अब जल्द ही उच्च अधिकारी इसमें निर्णय लेंगे। इस संबंध में जल्द ही बैठक होने वाली है।
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हरियाणा विदेश सहयोग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसमें सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया और शर्तें स्पष्ट होंगी। प्रस्तावित नीति के तहत केवल वैध वीजा पर विदेश गए लोगों को ही कवर किया जाएगा। सरकार न सिर्फ आर्थिक मदद देगी, बल्कि विदेशों में फंसे लोगों और उनके परिजनों को तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी।
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इसके लिए विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के साथ समन्वय कर शवों को भारत लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की योजना है। अधिकारियों का कहना है कि विदेश में दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में परिवारों को भारी आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रूस से शव लाने में ही 20 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जो कई परिवारों के लिए काफी मुश्किल होता है।
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हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने ही रूस से हरियाणा के चार युवाओं के शव लाए गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इसे लेकर काफी चिंता जता चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर इस मामले में कोई नीति बनाने को कहा था। इस पर अधिकारियों ने अपना प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अब जल्द ही उच्च अधिकारी इसमें निर्णय लेंगे। इस संबंध में जल्द ही बैठक होने वाली है।