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सीएम ने संभाली कमान: खाद की कालाबाजारी व तस्करी रोकने को बनेंगे उड़न दस्ते, राज्य की सीमाओं पर होगी नाकेबंदी
Sun, 24 Oct 2021 09:33 AM IST
प्रमोद कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: प्रमोद कुमार
Updated Sun, 24 Oct 2021 09:33 AM IST
सार
हरियाणा में लगातार डीएपी खाद की किल्लत बढ़ रही है। अब इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। खाद की कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। गौरतलब है कि खाद की कमी से जूझ रहे किसान हिंसा पर उतारू हो चुके हैं।
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सीएम मनोहर लाल।
- फोटो : एएनआई
विस्तार
डीएपी की किल्लत को लेकर प्रदेश में मची हाहाकार के बीच खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कमान संभाल ली है। उन्होंने यहां रविवार को उच्चस्तरीय पुलिस, कृषि और प्रशासनिक अधिकारियों से साथ समीक्षा बैठक के बाद खाद की कालाबाजारी और तस्करी रोकने को अंतरराज्यीय सीमाओं पर नाकेबंदी और सभी जिलों में उड़नदस्ते बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही खाद की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की। उन्होंने बताया कि मंडाविया ने 31 अक्तूबर तक हरियाणा को खाद के 6 और अतिरिक्त रैक देने पर सहमति जताई है।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि बाजार में इस साल डीएपी खाद पिछले साल की तुलना में 11 हजार मीट्रिक टन अधिक मात्रा में उपलब्ध है। प्रदेश के किसानों के लिए 24 रैक डीएपी उपलब्ध है, 5 रैक और आएगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री की सहमति के बाद 6 अतिरिक्त रैक (16 हजार मीट्रिक टन) डीएपी आएगी और 31 अक्तूबर तक प्रदेश के पास कुल 11 रैक और उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष राज्य में जहां 24 अक्तूबर तक 87,000 मीट्रिक टन डीएपी की बिक्री की गई थी, वहीं इस वर्ष अब तक 98,000 मीट्रिक टन की बिक्री की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिस क्षेत्र के किसानों को पहले डीएपी की जरूरत है वहां पहले सप्लाई की जाए।
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6 जिलों में होगी नाकेबंदी, प्रशासनिक सचिव नियुक्त
उच्चस्तरीय बैठक में सीएम ने डीएपी खाद की उपलब्धता व डिमांड पर चर्चा की। उन्होंने प्रदेश के सीमावर्ती जिलों रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, भिवानी, नूंह और झज्जर के उपायुक्तों व पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में नाके लगाकर प्रदेश से बाहर जाने वाले वाहनों की जांच-पड़ताल करें, ताकि डीएपी खाद को प्रदेश से बाहर अवैध तौर पर न ले जाया जा सके। उन्होंने डीएपी की मांग से बनी परिस्थितियों पर पैनी नजर रखने के लिए उक्त 6 जिलों के लिए तुरंत प्रभाव से प्रशासनिक सचिवों को इंचार्ज नियुक्त कर दिया है, वे संबंधित जिलों में 25 अक्तूबर से 27 अक्तूबर तक मौजूद रहेंगे।
पंजीकरण के आधार पर खाद वितरण करें
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन किसानों ने रबी फसलों के लिए ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करवाया है, उसके अनुसार ही किसानों को डीएपी खाद का वितरण किया जाए, ताकि असल किसानों को समय पर डीएपी उपलब्ध हो सके। उन्होने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि वे आवश्यकता के अनुसार ही डीएपी की खरीद करें, अतिरिक्त भंडारण न करें ताकि सभी किसानों को समान रूप से वितरित किया जा सके।