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जोश और उमंग में डूबा केजरीवाल का गांव!

Fri, 27 Dec 2013 01:41 PM IST
जुबैर अहमद
जुबैर अहमद Updated Fri, 27 Dec 2013 01:41 PM IST
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happiness in paternal village of arvind kejriwal

दिल्ली के हज़ारों नागरिक शनिवार को अरविंद केजरीवाल के दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे।

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उनके साथ शामिल होंगे हरियाणा के हिसार ज़िले के गांव खेड़ा के दर्जनों लोग भी। खेड़ा केजरीवाल का पैतृक गांव है और वहां उनके परिवार की हवेली अब भी मौजूद है।

दो दिन पहले दिल्ली से 200 किलोमीटर का सफ़र तय करके जब मैं खेड़ा पहुंचा तो दर्जनों लोग मुझ से मिलने बाहर निकल आए।

उनके अंदर जोश था। केजरीवाल की जितना बढ़ा चढ़ा कर तारीफ कर सकते थे उन्होंने की। वो फिर मुझे उस हवेली को दिखाने ले गए जो केजरीवाल का पारिवारिक घर था।

हवेली में अब कोई नहीं रहता। अंदर से अब ये खंडहर सा हो गया है लेकिन इस पिछड़े गांव में आज भी ये सबसे उम्दा इमारत है।

केजरीवाल के परदादा ने इस हवेली को बनवाया था। केजरीवाल का परिवार इस पूरे गांव और इसके आस-पास के गांवों में सब से पैसे वाला परिवार है।

होनहार छात्र

happiness in paternal village of arvind kejriwal

कई साल पहले परिवार वाले करीब के एक कस्बे सिवानी में बस गए। अब सिवानी में केजरीवाल के दो चाचा और उनके परिवार वाले दो अलग-अलग घरों में रहते हैं। इन में से एक घर में अरविन्द केजरीवाल 1968 में पैदा हुए।

तारा चंद शर्मा खेड़ा गांव के एक बुज़ुर्ग हैं। ज़ोर से अपने हाथ छाती पर ठोकते हुए कहते हैं, "मेरी छाती ख़ुशी और गर्व के मारे फूल रही है। मेरा होनहार पोता दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने वाला है"।

उन्होंने केजरीवाल को पोता इसलिए कहा क्यूंकि उनके दादा के वह दोस्त थे। वह कहते हैं, "वह ईमानदार खानदान का ईमानदार सपूत है। हमें ऐसे नेता ही चाहिए।"

गांव के एक और व्यक्ति, संजय कुमार, केजरीवाल की उम्र के होंगे। वो कहते हैं, "केजरीवाल के परिवार के इस गांव पर बहुत उपकार हैं। वे सेठ थे और गांव में उन्होंने सरकार से अधिक सुविधाएं दी हैं। गांव में एक धर्मशाला है, एक बड़ा मंदिर है और एक स्कूल है। ये सब इस परिवार ने ही बनवाए हैं- हम सब गांव वालों के लिए।"

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'पढ़ने में बहुत तेज थे'

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केजरीवाल का व्यवसायी परिवार कई साल पहले खेड़ा से पांच किलोमीटर दूर सिवनी गांव में आकर इसलिए बस गया क्यूंकि वहां एक बड़ी मंडी है जहां उनका परिवार अपने व्यापार को बढ़ाना चाहता था और ऐसा ही हुआ।

एक गांव के नागरिक से दिल्ली के मुख्यमंत्री तक का सफ़र 45 वर्षीय केजरीवाल ने इस तेज़ी से तय किया कि लोग आज भी उनके बारे में अधिक जानकारी नहीं रखते। वो सार्वजनिक जीवन में केवल दो साल पहले ही आए हैं।

उनके बारे में उनके गांव वाले और उनके रिश्तेदारों को भी अधिक जानकारी नहीं। हां वह अब उन पर गर्व ज़रूर महसूस करते हैं। मैंने उनके चाचा गिरधारी लाल से पूछा केजरीवाल के बचपन के बारे में कुछ बताइए तो उन्होंने कहा, "वो पढ़ने में बहुत तेज़ थे और हमेशा पढ़ते रहते थे। अपने स्कूल के साथियों के साथ झगड़ा लड़ाई नहीं करते थे"।

उनकी पत्नी ने कहा, "केजरीवाल हिसार में अपने पिता के साथ रहते थे और स्कूल में पढ़ते थे। वो केवल शादियों या त्यौहारों में एक-दो घंटे के लिए आते थे और फिर वापस प्रणाम करके निकल जाते थे।"

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'जल्द ही प्रधानंत्री बनेंगे'

happiness in paternal village of arvind kejriwal

गिरधारी लाल को यह भी याद था कि उनका नाम केजरीवाल कैसे पड़ा, "वो पढ़ाई करने कोलकाता गए थे जहां उन्हें स्थानीए लोगों ने केजरीवाल बुलाना शुरू कर दिया क्यूंकि उसे लोगों ने मारवाड़ी समझ लिया। हम मारवाड़ी नहीं, बनिया हैं और हमेशा से हरियाणा के निवासी हैं"।

उनके चाचा ने ये भी कहा कि कोलकाता में वह मदर टेरेसा के होम में लोगों की सेवा भी किया करते थे।

केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई ने हरियाणा के लोगों को काफी प्रभावित किया है। दलजीत शर्मा खेड़ा गांव के भूतपूर्व सरपंच हैं। वो कांग्रेस के पुश्तैनी समर्थक हैं। लेकिन आज आम आदमी पार्टी के होकर रह गए हैं।

'पार्टी में शामिल होने के लिए बेचैन हैं'

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वह कहते हैं, "हम बस अब इंतज़ार में हैं कि वो कब इस गांव में आएं। यहां सभी उनकी पार्टी में शामिल होने के लिए बेचैन हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ कर सब का दिल जीत लिया है।"

उनके विचार दूसरे गांव वालों से मिलते-जुलते हैं। संजीव कुमार कहते हैं,"सुरक्षा लेने से मना करके, लाल बत्ती लेने से इनकार करके और बंगला लेने से मना करके उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि वह एक ईमानदार मुख्यमंत्री होंगे और इन सब बातों का इस गांव में काफी ज़ोरदार असर हुआ है।"

संजीव कुमार यहां तक कहने को मजबूर हो गए कि जल्द ही केजरीवाल प्रधानमंत्री पद पर होंगे।

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