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रेलवे डिस्पेंसरी पर लटका ताला
Gurgaon
Updated Tue, 21 May 2013 05:30 AM IST
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गुड़गांव। अगर कहीं सफर के लिए जा रहे हैं तो पहले से ही अपनी दवा आदि का बंदोबस्त कर लें। बदन झुलसाती गर्मी में रेलवे की स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा मंहगा पड़ सकता है। रेलवे स्टेशन पर बनाई गई डिस्पेंसरी पर ताला लटका है। जिस कारण यहां आने वाले यात्रियों के साथ रेलवे के कर्मचारियों को खासी परेशानी हो रही है। आलम यह है कि यहां मामूली बुखार, सिरदर्द, चक्कर आना जैसी बीमारियों के लिए भी प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं है। डिस्पेंसरी पर ताला किसने, क्यों, कब से लटकाया है, इस बारे में रेलवे के अधिकारियों के पास भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।
स्टेशन परिसर में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की सहूलियत के लिए रेलवे की ओर से डिस्पेंसरी बनाई गई है। सफर के दौरान अगर किसी यात्री को कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आती है तो डिस्पेंसरी की मदद से उसे प्राथमिक उपचार कर राहत देने का प्रावधान है लेकिन गुड़गांव की डिस्पेंसरी में संसाधनों के अभाव में ताला लटका है। ताला कब खुलता है, यह न अधिकारियों को पता है, न कर्मचारियों को और न ही यात्रियों को।
ऐसे हैं हालात
स्टेशन अधीक्षक आरके मीणा के अनुसार, डिस्पेंसरी को नियमित रूप से खोलने के सख्त निर्देश हैं। डिस्पेंसरी दोपहर में एक से तीन बजे तक खोली जा रही है। पिछले दो दिन से डिस्पेंसरी नियमित खुल रही है। उन्होंने कहा कि यहां एक ही डॉक्टर की नियुक्ति है। तय समय में जितने मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया जा सकता है, दिया जा रहा है।
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दैनिक यात्री संघ भी नाराज
डिस्पेंसरी की अव्यवस्थाओं और संसाधनों के अभाव से दैनिक यात्री संघ भी खासा नाराज है। दैनिक यात्री कोआर्डिनेशन कमेटी, दिल्ली-रेवाड़ी सेक्शन के प्रधान पीएल वर्मा ने कहा कि विश्व स्तरीय शहर बनते गुड़गांव में रेलवे सुविधाओं के नाम पर महज खानापूर्ति है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले घोषित बजट में गुड़गांव स्टेशन को मेडिकल हब के रूप में विकसित करने की घोषणा हुई थी, लेकिन आज तक डिस्पेंसरी का स्वरूप नहीं सुधारा गया है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्थाओं तक पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार कर यात्रियों और कर्मचारियों को राहत प्रदान करनी चाहिए।
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स्टेशन परिसर में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की सहूलियत के लिए रेलवे की ओर से डिस्पेंसरी बनाई गई है। सफर के दौरान अगर किसी यात्री को कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आती है तो डिस्पेंसरी की मदद से उसे प्राथमिक उपचार कर राहत देने का प्रावधान है लेकिन गुड़गांव की डिस्पेंसरी में संसाधनों के अभाव में ताला लटका है। ताला कब खुलता है, यह न अधिकारियों को पता है, न कर्मचारियों को और न ही यात्रियों को।
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ऐसे हैं हालात
स्टेशन अधीक्षक आरके मीणा के अनुसार, डिस्पेंसरी को नियमित रूप से खोलने के सख्त निर्देश हैं। डिस्पेंसरी दोपहर में एक से तीन बजे तक खोली जा रही है। पिछले दो दिन से डिस्पेंसरी नियमित खुल रही है। उन्होंने कहा कि यहां एक ही डॉक्टर की नियुक्ति है। तय समय में जितने मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया जा सकता है, दिया जा रहा है।
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दैनिक यात्री संघ भी नाराज
डिस्पेंसरी की अव्यवस्थाओं और संसाधनों के अभाव से दैनिक यात्री संघ भी खासा नाराज है। दैनिक यात्री कोआर्डिनेशन कमेटी, दिल्ली-रेवाड़ी सेक्शन के प्रधान पीएल वर्मा ने कहा कि विश्व स्तरीय शहर बनते गुड़गांव में रेलवे सुविधाओं के नाम पर महज खानापूर्ति है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले घोषित बजट में गुड़गांव स्टेशन को मेडिकल हब के रूप में विकसित करने की घोषणा हुई थी, लेकिन आज तक डिस्पेंसरी का स्वरूप नहीं सुधारा गया है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्थाओं तक पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार कर यात्रियों और कर्मचारियों को राहत प्रदान करनी चाहिए।