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खाली बोरियां बेचकर बच्चों की सेहत बनाएगी सरकार
रुपेश मित्तल
Updated Fri, 07 Jun 2013 11:29 AM IST
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मिड डे मील योजना के तहत आए खाद्यान्न की खाली हुई बोरियों को अब कबाड़ में नहीं फेंका जा सकेगा। संबंधित कर्मचारियों को यह खाली बोरियां संभालकर रखनी होंगी और फिर इन्हें बेचकर मिला पैसा एमडीएम स्कीम में लगाया जाएगा।
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सभी विद्यालयों को खाली बोरियों को स्टाक रजिस्टर में प्रविष्टि दर्ज करने को कहा गया है और इन खाली बोरियों को बेचने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की होगी। कहां और कैसे बेची जाएंगी इसका फैसला डीईओ करेंगे।
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महानिदेशक मौलिक शिक्षा हरियाणा द्वारा जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को भेजे गए पत्र क्रमांक 4/29-2013 एमडीएम (1) दिनांक 29-05-2013 में यह निर्देश जारी किए गए हैं।
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पत्र में कहा गया है कि एमडीएम स्कीम के तहत एफसीआई के गोदामों से खाद्यान्न उठाया जाता है। जिन बोरियों में यह खाद्यान्न भरा होता है उनमें कम से कम 50 किग्रा वजन खाद्यान्न भरा होता है। खाद्यान्न की यह बोरियां या तो जूट बैग की होती हैं या प्लास्टिक के नए कट्टों के रूप में।
चतुर्थ संयुक्त पुर्ननिरीक्षण अभियान में उठी बात
पत्र में कहा गया है कि चतुर्थ संयुक्त पुर्ननिरीक्षण अभियान में एमडीएम के बेहतर संचालन और उचित बचत के लिए सुझाव मांगे गए थे। इसमें यह सुझाव आया था कि खाद्यान्न के लिए जिन बैग का प्रयोग होता है वे बढ़िया क्वालिटी के होते हैं।
जूट या प्लास्टिक के बैग के हिसाब से इनकी कीमत भी बाजार में 30 से 50 रुपये के बीच होती है। लेकिन, इन बैगों को विद्यालयों में खाली करने के बाद कबाड़ में फेंक दिया जाता है।
इससे गंदगी बढ़ती है जबकि इनका इनका फायदा उठाया जा सकता है। इन बोरियों को बेचकर इनसे प्राप्त होने वाली राशि को एमडीएम स्कीम में प्रयोग किया जा सकता है।
पत्र में कहा गया है कि विद्यालय मुखियाओं को इस बारे में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को अपने क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा मौलिक अधिकारी को निर्देश दिए जाने हैं।
पत्र में कहा गया है कि वे इस बात की सुनिश्चित करें कि भविष्य में खाली बोरियों को कबाड़ में न फेंका जाए और इनकी प्रविष्टि एमडीएम के स्टॉक रजिस्टर में तिथि अनुसार की जाए ताकि इनकी सही गिनती की जा सके। इसके अलावा बोरियों को सही तरीके से संभाल कर रखा जाए ताकि बेचने पर इनकी सही कीमत मिल सके।