{"_id":"617b936a454e3837bf78ea35","slug":"forgery-in-the-salary-fixation-of-the-clerk-with-the-seal-and-signature-of-the-section-officer-in-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा: अनुभाग अधिकारी की मुहर व हस्ताक्षर से लिपिक के वेतन निर्धारण में किया फर्जीवाड़ा, डीईओ भिवानी ने सही भेजी थी फाइल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा: अनुभाग अधिकारी की मुहर व हस्ताक्षर से लिपिक के वेतन निर्धारण में किया फर्जीवाड़ा, डीईओ भिवानी ने सही भेजी थी फाइल
Fri, 29 Oct 2021 11:54 AM IST
प्रमोद कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: प्रमोद कुमार
Updated Fri, 29 Oct 2021 11:54 AM IST
सार
हरियाणा में जो लिपिक के वेतन निर्धारण में गड़बड़ी की गई थी, वह शिक्षा निदेशालय में हुई थी। भिवानी के डीईओ की ओर से सही फाइल भेजी गई थी। लिपिक को सैनिक सेवा का लाभ देते हुए निर्धारित किया गया था वेतन। अनुभाग अधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर के जरिये गड़बड़ी की गई थी।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हरियाणा सेकेंडरी शिक्षा निदेशालय में अनुभाग अधिकारी की मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर लिपिक के वेतन निर्धारण में फर्जीवाड़ा किया गया है। अनुभाग अधिकारी ने निदेशालय में शिकायत देकर खुद इस मामले को उजागर किया है। भिवानी के डीईओ अजीत सिंह ने सैनिक सेवा का लाभ देते हुए लिपिक दिनेश कुमार का वेतन निर्धारित कर फाइल निदेशालय को भेजी थी, जिसमें किसी कर्मचारी ने गड़बड़ी कर डाली। अनुभाग अधिकारी जगपाल ने निदेशक सेकेंडरी शिक्षा व स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिकायत देकर फर्जीवाड़े की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें-रेवाड़ी सामूहिक दुष्कर्म कांड: थोड़ी देर बाद सुनाई जाएगी तीनों दोषियों को सजा, पांच आरोपी किए गए हैं बरी
विज्ञापन
विभाग में मचा हड़कंप
भिवानी के डीईओ अजीत सिंह ने तोशाम खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक दिनेश कुमार का वेतन निर्धारण भूतपूर्व सैनिक सेवा के आधार पर किया है। इसमें वेतन थोड़ा कम-ज्यादा हो सकता है, लेकिन फर्जी हस्ताक्षर व मुहर लगाने का काम निदेशालय में ही हुआ। मामला उजागर होने के बाद शिक्षा निदेशालय में हड़कंप मचा हुआ है। चूंकि, इसमें निदेशालय स्तर के कर्मचारी-अधिकारी शामिल हो सकते हैं। परमार ने कहा कि मामले में उच्च स्तरीय जांच हुई तो शिक्षा विभाग के और अधिकारी भी नपेंगे। डीईओ भिवानी अजीत सिंह ने बताया कि लिपिक ने कोर्ट केस किया था।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें-चंडीगढ़: टीबीआरएल की तकनीक और धमाकेदार प्रयोग देख गदगद हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बोले-मन गई मेरी दिवाली
मैंने सिर्फ फाइल भेजी थी
कोर्ट के निर्देशों के बाद निदेशालय से नए सिरे से वेतन निर्धारित करने की अनुमति ली और फाइल बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी। इसमें अनुभाग अधिकारी की मुहर व फर्जी हस्ताक्षर निदेशालय में ही किए गए। अभी वेतन निर्धारित ही हुआ है, कोई राशि किसी ने नहीं निकाली है। इसमें भी निदेशालय स्तर पर ही चूक हुई, क्योंकि वेतन निर्धारण को अंतिम रूप उच्च अधिकारियों ने ही देना होता है। उन्होंने तो सिर्फ फाइल भेजी थी।