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Fatehabad News: नशे दलदल में फंस रहा युवा, शौक के लिए कर रहे शुरुआत

Fri, 26 Jun 2026 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Fri, 26 Jun 2026 12:56 AM IST
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Youth are getting trapped in the quagmire of drug abuse, starting out merely for the sake of the thrill.
शहर का नशा मुक्ति केंद्र। 
फतेहाबाद। जिले में 15 से 30 वर्ष के युवाओं में मेडिकल नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बावजूद युवा इंजेक्शन, नशे की गोलियां और कैप्सूल के जाल में फंस रहे हैं। नशे की दलदल में फंसने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। कुछ युवा दोस्तों की संगत में महज शौक के लिए इसकी शुरुआत करते हैं और धीरे-धीरे इसके आदी हो जाते हैं। वहीं, कई मामलों में पारिवारिक कलह और पत्नी से विवाद के कारण मानसिक तनाव के चलते युवाओं ने मेडिकल नशे को सहारा बना लिया है।
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नागरिक अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार मेडिकल नशे की लत का सबसे ज्यादा शिकार गरीब और मजदूर वर्ग के परिवारों के युवा हो रहे हैं जिससे उनके घर पूरी तरह बर्बाद हो रहे हैं। हालांकि कई युवाओं ने नशा छोड़कर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की है और नशे के आदी हो रहे युवाओं को नशा न करने की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
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सुधार की राह ओएसटी और नशा मुक्ति केंद्र बने सहारा

नशा की लत छुड़ाने में राहत की किरण भी दिखाई दे रही है। जिले के कई युवाओं ने मजबूत इच्छाशक्ति और नशा मुक्ति केंद्रों की मदद से इस लत को पूरी तरह छोड़ दिया है। नशा छोड़ने के बाद कई युवा अब एक सामान्य और गरिमामय जीवन जी रहे हैं और अपने परिवार के साथ बेहद खुश हैं।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही ओएसटी (ओपियोड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी) की गोलियां भी युवाओं को इस लत से बाहर निकालने में काफी मददगार साबित हो रही हैं, जिससे उनकी नशे की निर्भरता धीरे-धीरे खत्म हो रही है।


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कुर्की से तस्करों पर कसा शिकंजा
नशे के इस काले कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए जिला पुलिस ने पिछले दिनों एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 कुख्यात नशा तस्करों की करीब 62 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क की है। वहीं पुलिस प्रशासन का साफ संदेश है कि नशे की कमाई से बनाई गई किसी भी संपत्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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नागरिक अस्पताल में दाखिल नशे के मरीजों की स्थिति
साल-ओपीडी-दाखिल मरीज
2021-1622-106
2022-2768-419
2023-2452-251
2024-2231-244
2025-3274-228
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मैं 16 वर्ष आयु में दोस्तों के साथ मेडिकल नशा करना सीख गया था। इसके बाद मैंने परिवार की हालात देखकर व मां-बाप को रोते देखकर ओएसटी लेकर दवाई लेकर नशा छोड़ दिया है। इसके बाद मुझे एक नई जिंदगी मिली है। अब में परिवार के साथ खुश हूं और विवाह-शादियों में सजावट का काम करता हूं।

-विक्की, किट्टी कैलाश कॉलोनी।

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मैं परिवार में मनमुटाव के कारण मेडिकल नशा करने लगा था। इससे में पूरी तरह से बर्बाद हो गया। मैंने नागरिक अस्पताल से दवाई लेकर पिछले एक साल से नशा छोड़ दिया है और अब मैं मजदूरी करता हूं। नशा छोड़ने के बाद मुझे दोबारा जिंदगी मिली है। मेरी युवाओं अपील है कि वें नशा से बचकर रहें।

कमल कुमार, गांव धीड़।

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मैं साल 2018 मेडिकल नशा करने लगा रहा था। अब मैंने 2 सालों से लेना बंद कर दिया है। मैं शादीशुदा हूं और मेरे 2 बच्चे हैं। मैं ई-रिक्शा चलाता हूं और सिंगिंग करता हूं, लाइव शो करता हूं। मेरा युवाओं से कहना है कि अगर नशे के दलदल में फस गए तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। मेरा अनुभव है कि युवा पहले शौक के तौर पर नशा करते हैं और बाद में इसके आदी हो जाते हैं।


-बलजिंद्र सिंह, भाटिया कॉलोनी, फतेहाबाद।
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नशे के दलदल में फंसे युवा नशा मुक्ति केंद्र में नशा छोड़ने के लिए आ रहे हैं। नागरिक अस्पताल से हर साल कई युवा नशा की लत को छोड़कर अपना काम कर रहे हैं।
- डॉ. गिरीश कुमार, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।
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