{"_id":"6633e0ffc00408e50d070014","slug":"worrying-the-remains-of-wheat-are-being-set-on-fire-after-harvesting-fatehabad-news-c-127-1-shsr1016-116321-2024-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिंताजनक : गेहूं कटाई के बाद अवशेषों में लगाई जा रही आग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिंताजनक : गेहूं कटाई के बाद अवशेषों में लगाई जा रही आग
विज्ञापन
फतेहाबाद जिले के गांव सनियाना-साहू रोड पर खेत में जलते अवशेष।
फतेहाबाद। जिले में खेतों में गेहूं कटाई के बाद अवशेष जलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वीरवार को भी जिले में कई जगहों पर अवशेषों में आग लगा दी गई। सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया।
जानकारी के अनुसार टोहाना क्षेत्र के गांव कूदनी में वीरवार को 12 एकड़ में अवशेष जलाए गए। इसके अलावा सनियाना-साहू रोड पर भी खेत में अवशेषों में आग लगा दी गई। जिले में पिछले एक सप्ताह में ही करीब 17 जगहों पर फसल अवशेषों को जलाने के मामले सामने आ चुके हैं। गांव मानावाली में भी एक दिन पहले ही रात के समय अवशेष जलाए गए थे।
नाम न छापने की शर्त पर कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि खेतों को अगली फसल की बिजाई के लिए जल्दी खाली करने के उद्देश्य से कई किसान गेहूं के अवशेषों में आग लगा देते हैं। बार-बार समझाने के बाद भी ऐसे किसान जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। खेतों में अवशेष जलाने से मित्र कीट भी मर जाते हैं, इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति पर भी गहरा असर पड़ता है।
विज्ञापन
-- -- -- -- --
धान के सीजन में पराली जलाने के आते हैं मामले
वहीं, धान के सीजन में पराली जलाने के मामले में भी फतेहाबाद जिला प्रदेश के टॉप पांच जिलों में शामिल हैं। हर साल धान की फसल लेने के बाद किसान पराली में आग लगा देते हैं, जिससे कई दिनों तक धुएं का गुबार आसमान में छाया रहता है। उससे पर्यावरण प्रदूषण भी खूब होता है। हालांकि, पिछले कई सालों से चल रहे जागरुकता अभियानों के बाद पराली जलाने के मामले कम हुए हैं। किसानों ने जागरुकता दिखाते हुए पराली की गांठें बनाने पर फोकस किया है।
-- -- -- -- -
गेहूं या अन्य किसी भी फसल के अवशेषों को जलाने के लिए खेतों में आग नहीं लगानी चाहिए। खेतों में आग लगाने से मित्र कीट खत्म हो जाते हैं। इससे खेत की मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी प्रभावित होती है। किसानों को इस विषय में पूरी तरह जागरूक होने की जरूरत है।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार टोहाना क्षेत्र के गांव कूदनी में वीरवार को 12 एकड़ में अवशेष जलाए गए। इसके अलावा सनियाना-साहू रोड पर भी खेत में अवशेषों में आग लगा दी गई। जिले में पिछले एक सप्ताह में ही करीब 17 जगहों पर फसल अवशेषों को जलाने के मामले सामने आ चुके हैं। गांव मानावाली में भी एक दिन पहले ही रात के समय अवशेष जलाए गए थे।
विज्ञापन
नाम न छापने की शर्त पर कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि खेतों को अगली फसल की बिजाई के लिए जल्दी खाली करने के उद्देश्य से कई किसान गेहूं के अवशेषों में आग लगा देते हैं। बार-बार समझाने के बाद भी ऐसे किसान जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। खेतों में अवशेष जलाने से मित्र कीट भी मर जाते हैं, इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति पर भी गहरा असर पड़ता है।
विज्ञापन
धान के सीजन में पराली जलाने के आते हैं मामले
वहीं, धान के सीजन में पराली जलाने के मामले में भी फतेहाबाद जिला प्रदेश के टॉप पांच जिलों में शामिल हैं। हर साल धान की फसल लेने के बाद किसान पराली में आग लगा देते हैं, जिससे कई दिनों तक धुएं का गुबार आसमान में छाया रहता है। उससे पर्यावरण प्रदूषण भी खूब होता है। हालांकि, पिछले कई सालों से चल रहे जागरुकता अभियानों के बाद पराली जलाने के मामले कम हुए हैं। किसानों ने जागरुकता दिखाते हुए पराली की गांठें बनाने पर फोकस किया है।
गेहूं या अन्य किसी भी फसल के अवशेषों को जलाने के लिए खेतों में आग नहीं लगानी चाहिए। खेतों में आग लगाने से मित्र कीट खत्म हो जाते हैं। इससे खेत की मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी प्रभावित होती है। किसानों को इस विषय में पूरी तरह जागरूक होने की जरूरत है।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग