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Fatehabad News: राम का दिखा आसरा तो गांव का नाम पड़ा रामसरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jan 2024 11:33 PM IST
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When Ram's shelter appeared, the village was named Ramsara.
गांव रामसरा ​स्थित श्रीकृष्ण गोशाला।
फतेहाबाद। जिले के 259 गांवों में से मात्र एक गांव रामसरा का नाम ही भगवान श्रीराम के नाम पर है। गांव का नाम रामसरा होने के पीछे भी बड़ी रोचक कहानी है। विक्रमी संवत 1868 में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को गांव रामसरा बसा था। अब विक्रमी संवत 2080 चल रहा है। इस हिसाब से गांव को बसे हुए 212 साल हो चुके हैं।
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मान्यताओं के अनुसार हिसार जिले के गांव शाहपुर से तीन दोस्त चैनाराम इंदौरा, पूर्णसिंह बैनीवाल और गैनाराम शर्मा वहां से राजस्थान की तहसील भादरा गए थे। वहां के राजा के साथ उनके मतभेद होने के बाद तीनों वहां से चलते हुए इस क्षेत्र में आ गए। यहां एक भेड़ के बच्चे को हिंसक जानवर खा रहा था, उसकी मां ने अपने बच्चे को बचाने का प्रयास किया तो वह सफल हो गई। यह दृश्य देखकर तीनों दोस्त हैरान हो गए। फिर इसी क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए तीनों कुछ दिन के लिए दड़बा गांव में ठहर गए। मगर चैनाराम भेड़ के बच्चे के बचने की घटना से इतने प्रभावित हुए कि वह दड़बा छोड़कर जहां भेड़ का बच्चा बचा था वहां आ गए। चैनाराम ने कहा कि यहां राम का आसरा है। इसी कारण भेड़ का बच्चा बच पाया है। इसके बाद तीनों दोस्तों ने सूखा छड़ा स्थापित करके वहां रामसरा बसा दिया।
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नाथ संप्रदाय की समाध है आस्था का सबसे बड़ा केंद्र
गांव में नाथ पंथ की समाध है, जो आस्था का बड़ा केंद्र हैं। यहां बाबा बालनाथ, खूबनाथ व काशीनाथ की समाधियां हैं। मौजूदा दौर में इस समाध को बलराज दास महाराज संभाल रहे हैं। मान्यता है कि इस समाध के प्रभाव के चलते गांव में कभी भी ओलावृष्टि नहीं होती है। न ही कभी गांव में पशुओं को कोई रोग होता है। समाध पर हर साल मेला लगता है।
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गांव की आबादी है 4935
गांव रामसरा की आबादी 4935 है। आज भी गांव में राजस्थान के गांव मेहराणा से आए सेठ गोपीराम की हवेली नजर आती है। हालांकि, अब हवेली जर्जर हो चुकी है। गांव में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जल घर, मिनी बैंक, इफको का सब सेंटर, डाकखाना जैसी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में हैं।
कोट
हमारे गांव के इतिहास की सारी जानकारी बैनीवाल गोत्र के भई भाट जोधपुर के पबसाराव के पास माैजूद है। हमारे गांव के नाम में भगवान श्रीराम का नाम जुड़ा है, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।

महेंद्र सिंह शास्त्री, शिक्षक

गांव रामसरा का इतिहास 212 साल पुराना है। गांव में परिवहन सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी तरह की सुविधाएं हैं। भगवान श्रीराम के नाम पर पूरे जिले में एकमात्र हमारे गांव का नाम होना महत्वपूर्ण बात है।
महावीर प्रसाद इंदौरा, ग्रामीण
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