फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   Waterlogging has washed away the hopes and dreams of farmers

Fatehabad News: खेतों में जलभराव से किसानों की बह गई उम्मीदें और टूट गए सपने

Sat, 13 Sep 2025 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 13 Sep 2025 10:47 PM IST
विज्ञापन
Waterlogging has washed away the hopes and dreams of farmers
भूना। रहनखेड़ी गांव के किसान खेतों में जलभराव में डूबी हुई धान की फसल दिखाते हुए
भूना। पिछले दिनों 31 अगस्त से 5 सितंबर के बीच रहनखेड़ी और लहरिया गांव समेत आसपास के इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
विज्ञापन

खेतों में इतना जलभराव हो गया है कि करीब 200 एकड़ से अधिक धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। कई किसान ऐसे हैं, जिनकी पूरी जीविका इसी फसल पर टिकी थी। उनके अनुसार खेतों में अब सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है और किसानों की आंखों में आंसू। अब उम्मीदें बह गई हैं और सपने टूट गए हैं।
विज्ञापन

---

इलाज का सपना अब अधूरा रह गया

रहनखेड़ी गांव के किसान रणधीर सिंह की 15 एकड़ में खड़ी धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई। रणधीर की किडनी फेल हो चुकी है और वह इलाज के लिए इस फसल पर निर्भर थे। उम्मीद थी कि इस बार अच्छी पैदावार होगी, फसल बिकेगी और इलाज संभव हो पाएगा। लेकिन अब खेतों में सिर्फ पानी है और दिल में एक अधूरा सपना।
विज्ञापन
विज्ञापन


---

कर्ज के बोझ तले दबा किसान, अब किससे उम्मीद करें
रहनखेड़ी गांव के हरपाल सिंह की कहानी और भी दर्दनाक है। बीते साल बेटी की शादी, बेटे को विदेश भेजने की कोशिश में वह पहले ही कर्ज में डूब चुके थे। फर्जी एजेंटों ने लाखों रुपये हड़प लिए और अब हालात ये हैं कि करीब 50 लाख का कर्ज उनके सिर पर है। 20 एकड़ की फसल थी, जिसे बेचकर वह कर्ज उतारने की आस लगाए बैठे थे। लेकिन अब उनके हिस्से में सिर्फ बर्बादी आई है।

---
मां की दवाई तक नहीं जुटा पा रहे दिलबाग सिंह
दिलबाग सिंह की 15 एकड़ धान की फसल जलभराव के कारण पूरी तरह नष्ट हो गई। उनकी बुजुर्ग मां पैरालिसिस से पीड़ित हैं और अच्छे अस्पताल में इलाज की जरूरत है। दिलबाग की आंखें भर आती हैं जब वो कहते हैं “सारा सहारा इसी फसल पर था, अब मां का इलाज भी मुश्किल हो गया है।

---
जलभराव बना प्राकृतिक आपदा, नहीं दिख रही कोई राहत

इन किसानों की ऐसी कहानियां अकेली नहीं हैं। भूना क्षेत्र के कई गांवों में सैकड़ों किसान ऐसे ही हालात से जूझ रहे हैं। खेतों में पानी लगा है और राहत के नाम पर अब तक कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया। प्राकृतिक आपदा ने इन गांवों के अरमानों को निगल लिया है। अब किसान सिर्फ इंतजार कर रहे हैं, किसी सरकारी मदद का, किसी उम्मीद की किरण का।


---

किसानों की मांग – फसल के मुआवजे की व्यवस्था हो जल्द
समाजसेवी एवं किसान बाबा बक्शीश सिंह, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि केसर सिंह, किसान नेता कमल सिंह बराड़, गुरविंदर सिंह तथा बलदेव सिंह गिल ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द फसल के नुकसान का सर्वे कर मुआवजा दिया जाए, ताकि वह दोबारा खड़े हो सकें। साथ ही ऐसे किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की भी मांग उठ रही है जो बीमारी, कर्ज या पारिवारिक संकट से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed