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Fatehabad News: जिले में घटने की बजाय बढ़ रहा जलभराव क्षेत्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Dec 2022 11:39 PM IST
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Waterlogged area increasing instead of decreasing in the district, sowing of wheat could not be done in 15 villages
फतेहाबाद के गांव शेखुपुर दड़ौली में खेत में भरा पानी। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। पहले से ही सेम की चपेट में आए फतेहाबाद जिले में जलभराव क्षेत्र कम होने की बजाय और बढ़ गया है। मानसून के सीजन में हुई बारिश का पानी अभी भी कई गांवों के खेतों में भरा हुआ है। जल निकासी न होने के कारण यहां पर गेहूं की बिजाई नहीं हो पा रही है। जिले में करीब 11 हजार एकड़ जमीन अब जलभराव क्षेत्र के अंतर्गत आ गई है।
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गौरतलब है कि सेम की समस्या से फतेहाबाद के कई गांव लंबे समय से जूझ रहे हैं। इन गांवों में सेम नाले भी लगाए गए हैं, लेकिन जब भी बारिश आती है, तो जल स्तर फिर से ऊपर आ जाता है। यहां तक कि भारी बारिश के कारण जमीन भी पानी को नहीं सोखती और पानी खेतों में ही जमा रह जाता है।
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ये गांव हैं जिले में सेमग्रस्त
फतेहाबाद के गांव जांडवाला बागड़, गोरखपुर, खाबड़ाकलां, ठुईयां, कुम्हारिया, काजलहेड़ी, एमपी रोही, भोडा होसनाक, शेखुपुर दड़ौली, किरढ़ान, रामसरा, ढाबीकलां, खाराखेड़ी, दैयड़ व बनमंदौरी गांव में सेम की सबसे अधिक समस्या है। इन गांवों का लगभग पूरा रकबा ही सेम की चपेट में है। इस बार जब भारी बारिश हुई तो इन गांवों के रकबे से पानी नहीं निकला और किसान अपने खेतों में गेहूं की बिजाई नहीं कर पाए।
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500 एकड़ और बढ़ा जलभराव क्षेत्र
फतेहाबाद में इस बार जलभराव क्षेत्र का रकबा 500 एकड़ बढ़ गया है। पहले जहां उपरोक्त गांवों में 10 हजार 500 एकड़ रकबा ही प्रभावित था, वहीं इस बार धांगड़, खजूरी जाटी व दहमन का करीब 500 एकड़ रकबा और जलभराव वाले क्षेत्रों में जुड़ गया है।
3800 एकड़ जमीन पर नहीं हो पाई गेहूं की बिजाई
गेहूं बिजाई का सीजन लगभग समाप्त होने को है लेकिन जिले का करीब 3800 एकड़ जमीन का रकबा ऐसा है जहां गेहूं की बिजाई नहीं हो पाई है। यहां पर किसानों के खेतों में अभी तक पानी भरा हुआ है। इनमें बड़ा रकबा एमपी रोही, भिरडाना, खजूरी जाटी, शेखुपुर दड़ौली, ठुईयां गांव का है।

जिले में इस बार 11 हजार एकड़ जमीन सेमग्रस्त व जलभराव से प्रभावित है। इसकी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी गई है। पहले से जलभराव का क्षेत्र बढ़ा है। यहां से पानी निकलने के बाद सैंपल लिए जाएंगे और पता किया जाएगा कि यहां पर पानी का लेवल कितना है और यह सेमग्रस्त है या नहीं।
बिजेंद्र सिंह, एडीओ, फतेहाबाद।
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