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Fatehabad News: नहरों में पानी आया पर खेतों में खरीफ फसलों का सिंचाई संकट नहीं हुआ दूर
Mon, 28 Apr 2025 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 28 Apr 2025 11:23 PM IST
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फतेहाबाद। जिले में खरीफ की फसलों की बुवाई का समय चल रहा है। किसान बुवाई के लिए खेतों की सिंचाई करना चाह रहे हैं, लेकिन नहरों में पर्याप्त पानी नहीं है। ऐसे में किसान ट्यूबवेल के पानी से सिंचाई करने को मजबूर हैं।
वहीं उन क्षेत्रों में समस्या और भी गंभीर है जहां भूमिगम जल खराब है। हालांकि नहरों में 25 अप्रैल से पेयजल के पानी छोड़ दिया गया है। इससे लोगों की पेयजल की कमी से राहत मिली है। बता दें कि नहरों की सफाई करने के लिए जिले में 25 मार्च से लेकर 21 अप्रैल तक नहर बंदी के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद इसे आगे बढ़ाते हुए 25 अप्रैल से पानी छोड़ दिया गया है।
जिले में जहां आमतौर पर 8000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। वहीं इस बार केवल 2000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बारी-बारी से छोटे रजवाहों व नहरों में पानी दिया गया है। ऐसे में पेयजल की कमी से लोगों को तो राहत मिली है, मगर सिंचाई का संकट दूर नहीं हो सका है। वहीं लोगों में नहरबंदी के बारे में भ्रांति फैली है कि एक सप्ताह तक ही पानी छोड़ा गया है। इस बारे में सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी नहर में कितने दिन पानी चलेगा इसकी कोई सूचना नहीं है।
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किसान ट्यूबवेल से कर रहे सिंचाई
किसान धर्मपाल, महेंद्र, भाल सिंह, दरिया सिंह, प्रवीण कुमार और राम सिंह आदि ने बताया कि सब्जियों व हरे चारे की फसलों की बुवाई की हुई है। सिंचाई के अभाव में ये सूख रही हैं। जिन खेतों में ट्यूबवेल नहीं लगे हैं वे किसान ज्यादा प्रभावित हैं। वहीं इससे आगे की फसलों की बुवाई का उचित समय प्रभावित हो रहा है।
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पिछले एक माह से पेयजल व सिंचाई किल्लत से परेशान हैं। हालांकि नहरों में पानी छोड़ने के बाद पेयजल की किल्लत तो दूर हो गई लेकिन अब सिंचाई का संकट गहराया है। खरीफ फसलों की बुवाई करना मुश्किल हो गया है। प्रशासन को नहरों में पूरा छोड़ना चाहिए।
-सुक्खा, किसान, गांव सालम खेड़ा।
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नहर में कम पानी होने के कारण खेतों में सिंचाई करने के लिए बने खालों तक भी नहीं पहुंच रहा है। इससे खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। क्षेत्र में भूमिगत जल खराब है, जिस कारण उसे फसलों के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है। बिन पानी किसानों को परेशानी हो रही है।
-सतबीर, किसान गांव खाबड़ा कलां।
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नरमे की फसल की बुवाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है। पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इस बार फसलों की बुवाई नहीं कर पाया हूं। प्रशासन को जल्द नहरों में पानी छोड़ना चाहिए और और एक माह तक लगातार चलाना चाहिए।
-पवन किसान, गांव भूथन कलां।
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प्रशासन की ओर से सफाई करने के नाम पर नहरों में पानी बंद किया गया था। जिसके बाद भी मात्र पीने का ही पानी ही मिल रहा है। खेतों में सिंचाई के लिए परेशान हैं। पिछले करीब 10 सालों के बाद सिंचाई के पानी की किल्लत हुई है। प्रशासन को नहरों में पूरा पानी छुड़वाना चाहिए। -साधूराम किसान, गांव मेहूवाला।
:: जिले की नहरों में पेयजल के लिए पानी छोड़ा गया है। जनस्वास्थ्य विभाग को जल्द से जल्द जलघरों के टैंक भरने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं पीछे से पानी कम छोड़ा गया है, जिससे बारी-बारी से सभी नहरों में पानी चलाया गया है। अभी तक नहरों में कितने दिन पानी चलाया जाएगा इसके बारे में कोई जानकारी प्राप्त नहीं है।
-नरेश कुमार भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद।
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वहीं उन क्षेत्रों में समस्या और भी गंभीर है जहां भूमिगम जल खराब है। हालांकि नहरों में 25 अप्रैल से पेयजल के पानी छोड़ दिया गया है। इससे लोगों की पेयजल की कमी से राहत मिली है। बता दें कि नहरों की सफाई करने के लिए जिले में 25 मार्च से लेकर 21 अप्रैल तक नहर बंदी के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद इसे आगे बढ़ाते हुए 25 अप्रैल से पानी छोड़ दिया गया है।
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जिले में जहां आमतौर पर 8000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। वहीं इस बार केवल 2000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बारी-बारी से छोटे रजवाहों व नहरों में पानी दिया गया है। ऐसे में पेयजल की कमी से लोगों को तो राहत मिली है, मगर सिंचाई का संकट दूर नहीं हो सका है। वहीं लोगों में नहरबंदी के बारे में भ्रांति फैली है कि एक सप्ताह तक ही पानी छोड़ा गया है। इस बारे में सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी नहर में कितने दिन पानी चलेगा इसकी कोई सूचना नहीं है।
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किसान ट्यूबवेल से कर रहे सिंचाई
किसान धर्मपाल, महेंद्र, भाल सिंह, दरिया सिंह, प्रवीण कुमार और राम सिंह आदि ने बताया कि सब्जियों व हरे चारे की फसलों की बुवाई की हुई है। सिंचाई के अभाव में ये सूख रही हैं। जिन खेतों में ट्यूबवेल नहीं लगे हैं वे किसान ज्यादा प्रभावित हैं। वहीं इससे आगे की फसलों की बुवाई का उचित समय प्रभावित हो रहा है।
पिछले एक माह से पेयजल व सिंचाई किल्लत से परेशान हैं। हालांकि नहरों में पानी छोड़ने के बाद पेयजल की किल्लत तो दूर हो गई लेकिन अब सिंचाई का संकट गहराया है। खरीफ फसलों की बुवाई करना मुश्किल हो गया है। प्रशासन को नहरों में पूरा छोड़ना चाहिए।
-सुक्खा, किसान, गांव सालम खेड़ा।
नहर में कम पानी होने के कारण खेतों में सिंचाई करने के लिए बने खालों तक भी नहीं पहुंच रहा है। इससे खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। क्षेत्र में भूमिगत जल खराब है, जिस कारण उसे फसलों के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है। बिन पानी किसानों को परेशानी हो रही है।
-सतबीर, किसान गांव खाबड़ा कलां।
नरमे की फसल की बुवाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है। पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इस बार फसलों की बुवाई नहीं कर पाया हूं। प्रशासन को जल्द नहरों में पानी छोड़ना चाहिए और और एक माह तक लगातार चलाना चाहिए।
-पवन किसान, गांव भूथन कलां।
प्रशासन की ओर से सफाई करने के नाम पर नहरों में पानी बंद किया गया था। जिसके बाद भी मात्र पीने का ही पानी ही मिल रहा है। खेतों में सिंचाई के लिए परेशान हैं। पिछले करीब 10 सालों के बाद सिंचाई के पानी की किल्लत हुई है। प्रशासन को नहरों में पूरा पानी छुड़वाना चाहिए। -साधूराम किसान, गांव मेहूवाला।
:: जिले की नहरों में पेयजल के लिए पानी छोड़ा गया है। जनस्वास्थ्य विभाग को जल्द से जल्द जलघरों के टैंक भरने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं पीछे से पानी कम छोड़ा गया है, जिससे बारी-बारी से सभी नहरों में पानी चलाया गया है। अभी तक नहरों में कितने दिन पानी चलाया जाएगा इसके बारे में कोई जानकारी प्राप्त नहीं है।
-नरेश कुमार भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद।