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Fatehabad News: पांच साल में सात बार टीकाकरण जरूरी, फिर भी मां-बाप कर रहे लापरवाही

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jan 2024 10:02 PM IST
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Vaccination is necessary seven times in five years, yet parents are negligent
फतेहाबाद। शिशु के जन्म से पांच साल में सात बार टीकाकरण करना जरूरी। लेकिन शिशु के पूर्ण टीकाकरण को लेकर मां-बाप गंभीर नहीं है। शेड्यूल के मुताबिक टीकाकरण समय पर नहीं करवा रहे हैं। जबकि टीकाकरण गंभीर बीमारियों से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। जिले में अप्रैल माह से लेकर नवंबर माह तक 10630 बच्चों में से 9729 बच्चों का टीकाकरण हुआ है।
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टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग आशा वर्कर को रिपोर्ट के मुताबिक मानदेय भी दे रहा है। जन्म से लेकर एक वर्ष तक बच्चे के टीकाकरण पर आशा वर्कर को 100 रुपये, 1 से 2 वर्ष तक के बच्चे के टीकाकरण पर 50 रुपये और 5 वर्ष के बच्चे के टीकाकरण पर भी 50 रुपये का भुगतान किया जाता है। शिशु के जन्म लेने से लेकर 16 साल तक स्वास्थ्य विभाग गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण कर रहा है। टीकाकरण से बच्चों को खसरा, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी समेत गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। टीकाकरण को लेकर जिले में बुधवार और शुक्रवार को सेशन लगाए जाते है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में कभी भी टीकाकरण करवा सकते हैं।
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शिशु के जन्म के बाद ये होता है टीकाकरण शुरू
जन्म के समय : बीसीजी, ओपीवी, हेपेटाइटिस बी,
छह सप्ताह पर : ओपीवी पहली, पेंटावेलेंट पहली, आइपीवी पहली, रोटा पहली और पीसीवी पहली डोज
10 सप्ताह पर : ओपीवी दूसरी, पेंटावेलेंट और रोटा की दूसरी डोज
14 सप्ताह पर : ओपीवी तीसरी, पेंटावेलेंट तीसरी, आईपीवी, रोटा तीसरी और पीसीवी दूसरी डोज
9 से 12 माह : एमआर पहली डोज, पीसीवी बूस्टर, जेई
16 से 24 माह : एमआर दूसरी डोज, डीपीटी बी, ओपीवी बी, जेई
5 से 6 साल : डीपीटी बूस्टर डोज
10 साल : टीडी
16 साल : टीडी

-------------------------------------स्वास्थ्य विभाग शिशुओं के टीकाकरण को लेकर गंभीर है। टीकाकरण रोग प्रतिरोधी होते है जो कि शरीर में इम्यूनिटी बूस्ट करता है। जिन बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगाया जाता है वह उस गंभीर बीमारी के होने से बचाता है। पल्स पोलिया अभियान के कारण ही पोलियो जैसी गंभीर बीमारी पर काबू पाया गया है। मां-बाप को चाहिए कि वह समय सारिणी के मुताबिक बच्चे का टीकाकरण जरूर करवाएं।
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-डॉ. कुलदीप चौधरी, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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