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Fatehabad News: वाजिब दाम नहीं मिलने से मिट्टी में मिल गई फूलों की महक, फसल पर चलाया ट्रैक्टर

Sat, 28 Feb 2026 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 28 Feb 2026 11:20 PM IST
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Unable to get a fair price, the soil lost its fragrance to the flowers, and a tractor ran over the crop
गांव बिसला में गेंदा फूल की फसल को नष्ट करता किसान। संवाद
फतेहाबाद। शादियों के सीजन में गेंदा फूल की फसल से होने वाली आमदनी की उम्मीद किसानों के लिए भारी घाटे में बदल गई है। मंडियों में न्यूनतम भाव मिलने और बढ़ती लागत के कारण किसान अपनी मेहनत से उगाई फसल को मंडी तक ले जाने के बजाय खेत में ही ट्रैक्टर से नष्ट करने को मजबूर हैं।
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किसान वेद प्रकाश, राम गोपाल और कृष्ण ने बताया कि एक एकड़ में गेंदा फूल उगाने पर पौध, खाद, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर लगभग 50 हजार रुपये खर्च आते हैं। अक्तूबर में रोपाई के समय उम्मीद थी कि शादियों के सीजन में मांग बढ़ने से लाभ होगा, लेकिन अब प्रति किलो फूल 10 से 20 रुपये में बिक रहा है।
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किसानों ने कहा कि तुड़वाई की मजदूरी भी प्रति किलो 5 रुपये है, जिससे खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही। किसानों ने कहा कि फसल की पूरी मेहनत व्यर्थ जा रही है और खेत में खड़ी फसल नष्ट करना उनके लिए मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से भारी झटका है। यह सीजन मुनाफे के बजाय घाटे का बन गया है।
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अनुदान का अभाव



फूलों की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि उन्हें बागवानी विभाग से कोई अनुदान नहीं मिला। यदि सरकार की ओर से समय पर आर्थिक सहायता या संरक्षित बाजार की सुविधा मिलती, तो उन्हें फसल नष्ट करने की नौबत नहीं आती। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब तो फसल पर हुआ खर्च निकाल पाना मुश्किल हो गया है।

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दिल्ली-जयपुर की दूरी और भाड़े का बोझ

शहर की मंडी में फूलों की रोजाना की खपत दो क्विंटल के लगभग है। ऐसे में किसानों को अपनी अपनी उपज लेकर दिल्ली स्थित गाजीपुर मंडी या जयपुर जैसी बड़ी मंडियों में जाना पड़ता है। ट्रेन की सुविधा नहीं होने के कारण दिल्ली या जयपुर तक माल ले जाने का भाड़ा ही इतना अधिक हो जाता है कि वहां बेचने से उन्हें नुकसान ही होता है। वहां आढ़ती अपनी मनमर्जी के अनुसार फूलों के भाव लगाता है। जिससे उनका परिवहन का खर्च भी पूरा नहीं होता।



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पिछले 15 वर्षों से फूलों की खेती कर रहा हूं। इस बार गेंदा फूल का भाव 10 से लेकर 25 रुपये के बीच रहा है। इससे फसल उपजाने पर खर्च हुई लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय आढ़ती कौड़ियों के भाव पर खरीदारी कर रहे हैं। वहीं बागवानी विभाग की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है।

-रामगोपाल, किसान।

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इस बार शादियों के सीजन में बाजार में फूलों की खपत उम्मीद से बहुत कम है। फूलों जैसी जल्द खराब होने वाली फसल के लिए कोल्ड स्टोरेज या प्रोसेसिंग यूनिट की भी कमी है। ऐसे में फूलों को बेच पाना काफी मुश्किल हो गया है। बागवानी विभाग से अपील है कि किसानों की आर्थिक सहायता की जाए।

-संदीप, किसान गांव खजुरी।

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जिले में फूलों की खेती करने वाले किसान लागत खर्च भी नहीं निकल पाने से काफी निराश हैं। यदि सरकार ने जल्द ही उचित मुआवजा या भावांतर योजना सहायता प्रदान नहीं की, तो आने वाले समय में किसान फूलों की खेती से पूरी तरह किनारा कर लेंगे।


- अनूप, किसान गांव खजुरी।

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पिछले कई वर्षों से गेंदा फूल सहित सब्जियों की खेती करता हूं। इस बार बाजार में फूलों का भाव सब्जी के भाव से कम रहा है। ऐसे में प्रति एकड़ पर 10 से 20 हजार ुपये का नुकसान हुआ है। गेंदा फूल की पौध का खर्च 20 हजार रुपये प्रति एकड़ हैं।

-संता सिंह, किसान गांव बिसला।

:: फूलों व सब्जियाें की खेती करने वाले किसानों के लिए उचित अनुदान का प्रावधान है। बागवानी विभाग की ओर से फूलों के रकबे की गिरदावरी का काम जारी है।

- डॉ. राजेश कुमार, जिला बागवानी अधिकारी, फतेहाबाद।

गांव बिसला में गेंदा फूल की फसल को नष्ट करता किसान। संवाद

गांव बिसला में गेंदा फूल की फसल को नष्ट करता किसान। संवाद

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