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किसान आंदोलन के कारण एयरपोर्ट पर नहीं पहुंच पा रहे विदेश जाने वाले यात्री
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कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब एवं हरियाणा के किसानों द्वारा टिकरी व कुंडली बॉर्डर पर लगाए धरने के कारण यहां से विदेश जाने व आने वाले यात्रियों के लिए दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है। यहां से करीब चार नागरिकों की सात दिसंबर की यूएसए के लिए फ्लाइट है लेकिन वे अभी तक दिल्ली नहीं पहुंच पा रहे है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एक युवक अपने पिता के देहांत के बाद अंतिम संस्कार में भी भाग नहीं ले पाया। ऐसे ही कई लोग विदेश व देश में फंसकर रह गए है जिन्होंने यहां आना था।
जानकारी अनुसार नहर कॉलोनी निवासी ईश्वर कौर पत्नी सतबीर सिंह ने सात दिसंबर को यूएसए जाना था। उसने वीजा ले रखा है और सात दिसंबर को उसकी इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाइट लेनी है। ईश्वर कौर के देवर गुरदीप सिंह ने बताया कि नजफगढ़ के पास झडोदाकलां के पास पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे है ताकि किसान झडोदाकलां से आगे न पहुंच सके। इस कारण वहां से एयरपोर्ट पर जाना असंभव हो गया है। ऐसे ही गांव रजाबाद के गुरनाम व उसकी पत्नी की आठ दिसंबर को यूएसए के लिए फ्लाइट है लेकिन वे अभी दिल्ली नहीं जा पा रहे है। जिले के गांव दिगोह के नसीब सिंह के पुत्र ने कनाडा से 6 दिसंबर को फतेहाबाद लौटना है लेकिन अभी पूरा परिवार इस असमंजस में है कि उसके बेटे का क्या होगा। नसीब सिंह का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को राय दी है कि वह टिकट रद्द करवाकर वहीं रह जाए। विदेशों में रह रहे किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे लोग भी यहां नहीं आ पा रहे है। फतेहाबाद के अल्फा सिटी निवासी मनजीत सिंह ने बताया कि उसका दामाद रिशू आस्ट्रेलिया रहता है। 29 नवंबर को उसके दामाद रिशू के पिता पुरुषोत्तम का देहांत हो गया। रिशू आंदोलन के कारण यहां नहीं आ सका। वह अपने मां-बाप का इकलौता लड़का है। पिता के दाह संस्कार में भाग न ले पाने पर उसने फेसबुक पर भावुक पोस्ट भी डाल रखी है। इसके अलावा फतेहाबाद-सिरसा के कई स्टूडेंट्स ऐसे भी है जो धान के सीजन में अपने गांव में आये हुए थे और यही फंसकर रह गए। अब वह वापिस जाए या टिकट रद्द करवाए, दोनों में से एक रास्ता चुनना है।
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जानकारी अनुसार नहर कॉलोनी निवासी ईश्वर कौर पत्नी सतबीर सिंह ने सात दिसंबर को यूएसए जाना था। उसने वीजा ले रखा है और सात दिसंबर को उसकी इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाइट लेनी है। ईश्वर कौर के देवर गुरदीप सिंह ने बताया कि नजफगढ़ के पास झडोदाकलां के पास पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे है ताकि किसान झडोदाकलां से आगे न पहुंच सके। इस कारण वहां से एयरपोर्ट पर जाना असंभव हो गया है। ऐसे ही गांव रजाबाद के गुरनाम व उसकी पत्नी की आठ दिसंबर को यूएसए के लिए फ्लाइट है लेकिन वे अभी दिल्ली नहीं जा पा रहे है। जिले के गांव दिगोह के नसीब सिंह के पुत्र ने कनाडा से 6 दिसंबर को फतेहाबाद लौटना है लेकिन अभी पूरा परिवार इस असमंजस में है कि उसके बेटे का क्या होगा। नसीब सिंह का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को राय दी है कि वह टिकट रद्द करवाकर वहीं रह जाए। विदेशों में रह रहे किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे लोग भी यहां नहीं आ पा रहे है। फतेहाबाद के अल्फा सिटी निवासी मनजीत सिंह ने बताया कि उसका दामाद रिशू आस्ट्रेलिया रहता है। 29 नवंबर को उसके दामाद रिशू के पिता पुरुषोत्तम का देहांत हो गया। रिशू आंदोलन के कारण यहां नहीं आ सका। वह अपने मां-बाप का इकलौता लड़का है। पिता के दाह संस्कार में भाग न ले पाने पर उसने फेसबुक पर भावुक पोस्ट भी डाल रखी है। इसके अलावा फतेहाबाद-सिरसा के कई स्टूडेंट्स ऐसे भी है जो धान के सीजन में अपने गांव में आये हुए थे और यही फंसकर रह गए। अब वह वापिस जाए या टिकट रद्द करवाए, दोनों में से एक रास्ता चुनना है।
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