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Fatehabad News: जिले में इस साल अधिक जले फसल के अवशेष, 144 एकड़ मेें जली गेहूं की फसल
Sun, 11 May 2025 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 11 May 2025 11:43 PM IST
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गांव मेहूवाला में रात के अंधेरे में लगाई गई गेहूं के फसल अवशेषों में आग। लाइब्रेरी
फतेहाबाद। जिले में इस बार गेहूं की फसल कटाई के बाद अवशेष जलाने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों ने कंबाइन से कटाई करवाने और भूसा बनाने के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों में आग लगाने से कई स्थानों पर आग फैल गई।
जिस कारण 60 किसानों की लगभग 144 एकड़ भूमि में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई थी। वहीं कुछ स्थानों पर अन्य कारणों से भी आग लगी है। कंबाइन से कटाई के बाद खेत में काफी मात्रा में अवशेष बच जाते हैं, जिन्हें साफ करने का किसानों को यह एक आसान और सस्ता तरीका लगता है। कई किसान भूसा बनाने के बाद बचे हुए अवशेषों को भी जला देते हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं होता कि छोटी सी लापरवाही से उनकी खड़ी फसल भी जल सकती है।
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कटाई के बाद खेतों में आग लगने की सूचनाएं इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक मिली है। इस बार जिले में कुल 118 स्थानों पर फसल अवशेषों में आग की सूचना मिली है।
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इस बार गेहूं की कटाई के दौरान मौसम परिवर्तनशील रहा था। इसके कारण आग तेजी से फैली है और आसपास के खेतों को भी अपनी चपेट में ले लिया था। वहीं जिले के विभिन्न गांवों में आग लगने की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझाया था। गांव हिजारावां में फसल अवशेष में आग बुझाने पहुंची अग्निशमन विभाग की गाड़ी आग की चपेट में आने से जल गई थी।
फसल अवशेष जलाने से न केवल मिट्टी की उर्वरता कम होती है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। धुएं के कारण सांस लेने में तकलीफ होती है और दृश्यता भी कम हो जाती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, आग लगने से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्मजीव भी नष्ट हो जाते हैं, जो मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेष न जलाएं और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
पर्यावरण को हो रहा है नुकसान
कृषि विभाग और पर्यावरण विभाग की ओर से फसल अवशेष जलाने के खतरों के बारे में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। किसानों को अवशेष न जलाने और उन्हें मिट्टी में मिलाकर खाद बनाने या अन्य उपयोगी तरीकों से इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। इसके बावजूद, कई किसान नियमों का उल्लंघन करते हुए खेतों में आग लगा रहे हैं।
इस बार जिले में आग लगने के मामले पिछले सालों की तुलना में अधिक मिला है। आग लगने की कॉल आते ही विभाग के कर्मचारियों ने तुरंत पहुंचकर आग बुझाई है।
-छल्लू राम, लिडिंग फायरमैन, फतेहाबाद।
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जिस कारण 60 किसानों की लगभग 144 एकड़ भूमि में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई थी। वहीं कुछ स्थानों पर अन्य कारणों से भी आग लगी है। कंबाइन से कटाई के बाद खेत में काफी मात्रा में अवशेष बच जाते हैं, जिन्हें साफ करने का किसानों को यह एक आसान और सस्ता तरीका लगता है। कई किसान भूसा बनाने के बाद बचे हुए अवशेषों को भी जला देते हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं होता कि छोटी सी लापरवाही से उनकी खड़ी फसल भी जल सकती है।
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अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कटाई के बाद खेतों में आग लगने की सूचनाएं इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक मिली है। इस बार जिले में कुल 118 स्थानों पर फसल अवशेषों में आग की सूचना मिली है।
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इस बार गेहूं की कटाई के दौरान मौसम परिवर्तनशील रहा था। इसके कारण आग तेजी से फैली है और आसपास के खेतों को भी अपनी चपेट में ले लिया था। वहीं जिले के विभिन्न गांवों में आग लगने की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझाया था। गांव हिजारावां में फसल अवशेष में आग बुझाने पहुंची अग्निशमन विभाग की गाड़ी आग की चपेट में आने से जल गई थी।
फसल अवशेष जलाने से न केवल मिट्टी की उर्वरता कम होती है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। धुएं के कारण सांस लेने में तकलीफ होती है और दृश्यता भी कम हो जाती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, आग लगने से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्मजीव भी नष्ट हो जाते हैं, जो मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेष न जलाएं और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
पर्यावरण को हो रहा है नुकसान
कृषि विभाग और पर्यावरण विभाग की ओर से फसल अवशेष जलाने के खतरों के बारे में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। किसानों को अवशेष न जलाने और उन्हें मिट्टी में मिलाकर खाद बनाने या अन्य उपयोगी तरीकों से इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। इसके बावजूद, कई किसान नियमों का उल्लंघन करते हुए खेतों में आग लगा रहे हैं।
इस बार जिले में आग लगने के मामले पिछले सालों की तुलना में अधिक मिला है। आग लगने की कॉल आते ही विभाग के कर्मचारियों ने तुरंत पहुंचकर आग बुझाई है।
-छल्लू राम, लिडिंग फायरमैन, फतेहाबाद।