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जाटों के धरने का तीसरा दिन : जिले भर से महज कुछ लोग ही पहुंचे

Wed, 08 Jun 2016 12:55 AM IST
fatehabad
fatehabad Updated Wed, 08 Jun 2016 12:55 AM IST
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 अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के तत्वावधान में लगातार तीसरे दिन भी जाट समुदाय के लोगों ने गांव ढाणी गोपाल-भोजराज के चौक के पास खेतों में धरना दिया। मंगलवार को जिले भर से करीब 80 जाट समुदाय के लोगों ने धरने में शामिल होकर विरोध प्रदर्शन किया। जबकि दूसरी ओर पुलिस प्रशासन भी सतर्क था। शांतिपूर्वक ढंग से धरने पर बैठे जाट नेताओं ने सरकार की नाकामियों के खिलाफ भड़ास निकाली ।

        संघर्ष समिति के नेता सूबे सिंह ढाका ने कहा कि सरकार ने आरक्षण देने के साथ-साथ जाट समाज के लोगों पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने के लिए समझौता हुआ था। इसके बाद प्रदेश भर में आरक्षण आंदोलन वापस लिया गया था। अब सरकार वायदा खिलाफी कर रही है। उन्होंने कहा कि जाट समाज के कई लोग जेलों में बंद हैं। मगर सरकार उन्हें रियायत नहीं दे रही है।
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इसके खिलाफ उनका आंदोलन लगातार तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें रिहा नहीं कर दिया जाएगा। इस मौके पर हंसराज सिवाच गोरखपुर, रघुबीर सिंह गाजुवाला, महबीर सिंह ढाणी गोपाल, रामकुमार महला ढाणी भोजराज, राजेश कुमार फौजी ढाणी सांचला, बुधराम, साधुराम, हवा सिंह, कृष्ण कुमार, राजेंद्र सिंह, नरेश कुमार, बलजीत सिंह, रिसाल झाझडा, दलबीर ढिलो, मोनू बाजिया ढाणी डूल्ट, नफे सिंह फौजी नहला, मांगे राम ढिलो, रमेश फौजी गोरखपुर, रामनिवास, राजेन्द्र सिंह, सुरेश कुमार, होशियार सिंह आदि भी मौजूद थे ।  
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कानून व्यवस्था नहीं बिगड़ने देंगे: एएसपी
धरने के पास मौजूद रहे एएसपी गंगा राम पुनियां ने कहा कि कानून व्यवस्था किसी भी कीमत पर नहंीं बिगड़ने देंगेे। इसके लिए पर्याप्त मात्रा में सेना और पुलिस के जवान मौके पर तैनात हैं। उन्होंने कहा कि उपद्रव मचाने वाले समाज का भला नहीं कर सकते। इसलिए उपद्रवियों पर आंदोलनकारी भी विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था सुचारू रखना उनका दायित्व है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वह शांतिपूर्वक ढंग से अपनी आवाज को उठाएं।


युवाओं के पीछे हटने से कुंद हुई आंदोलन की धार
मौजूदा धरने प्रदर्शन में युवाओं की संख्या नाम मात्र नजर आ रही है। इसके पीछे पुलिस अधीक्षक ओपी नरवाल की सख्त कार्रवाई करने तथा गांव-गांव में जाकर जन जागरूकता अभियान का ही परिणाम है। इसके अलावा बीते दिन पुलिस विभाग से जारी आदेश का भी असर होता दिख रहा है, जिसमें कहा गया था कि धरने-प्रदर्शन में शामिल युवाओं को भविष्य में सेना या पुलिस की किसी भर्ती में शामिल होने का मौका नहीं दिया जाएगा।
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