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सुहाने सफर पर भारी पड़ रहा रोडवेज में परिचालकों का टोटा, 40 पद खाली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Nov 2021 12:21 AM IST
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There is a shortage of operators in the roadways on the pleasant journey, 40 posts are vacant
फतेहाबाद बस स्टैंड से रोडवेज बस में सवार होकर जाती सवारियां। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। रोडवेज में एक बार फिर कर्मचारियों का टोटा होने से यात्रियों के सुहाने सफर में अड़चनें पैदा हो गई है। फतेहाबाद डिपो 40 परिचालकों की कमी से जूझ रहा है। ओवरटाइम बंद होने के कारण एक परिचालक से चार दिन ड्यूटी लेने के बाद उसे अगले चार दिनों के लिए रेस्ट यानी छुट्टी देनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में अगर ड्यूटी पर बुलाए गए परिचालकों में से कोई बीमार हो जाए या आपातकालीन छुट्टी ले ले, तो अधिकारियों के पास कोई विकल्प नहीं है। संबंधित रूट पर बस का फेरा मिस ही करना पड़ता है। परिचालकों के अभाव में नए रूटों पर भी बसों का परिचालन करवाने में अधिकारी असमर्थतता जता रहे हैं।
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दरअसल, रोडवेज डिपो से 80 से 90 बसों को रूट पर चलाया जा रहा है। डिपो में फिलहाल 120 परिचालक कार्यरत हैं। मगर बसों की संख्या व रूटों के हिसाब से 160 परिचालकों की आवश्यकता है। पहले रोडवेज प्रशासन द्वारा चालक परिचालकों को ओवरटाइम दिया जाता था। इसलिए परिचालक रेस्ट करने की बजाय ओवरटाइम कर लेते थे। इससे उनको वेतन के अलावा अच्छा खासा पैसा ओवरटाइम के रूप में मिल जाता था। मगर अब ओवरटाइम बंद होने के कारण परिचालक चार दिन ड्यूटी करके चार दिन का रेस्ट ले रहे हैं। इससे ड्यूटी सेक्शन में काम कर रहे अधिकारियों के लिए व्यवस्था बनाने में परेशानियां उठानी पड़ रही है।
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ये हैं कमी होने के दो प्रमुख कारण
22 परिचालक बन गए सब इंस्पेक्टर
पिछले दिनों पदोन्नति होने के बाद फतेहाबाद डिपो के 22 परिचालक सब इंस्पेक्टर बन गए थे। इन परिचालकों के स्थान पर नए परिचालकों की व्यवस्था हुई नहीं है। इस कारण कमी बन गई है।
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किलोमीटर स्कीम की बसों पर भी सरकारी परिचालक
प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई किलोमीटर स्कीम की बसों पर भी सरकारी परिचालक नियुक्त किए हुए हैं। इस स्कीम के तहत चल रही बसों पर चालक निजी फर्म का, जबकि परिचालक रोडवेज का होता है। फतेहाबाद डिपो से 20 किलोमीटर स्कीम की बसें चल रही हैं।
लॉकडाउन से पहले चल रहे सभी रूट भी नहीं हो सके बहाल
परिचालकों की कमी के कारण ही लॉकडाउन से पहले चल रहे सभी रूटों को रोडवेज प्रशासन बहाल नहीं कर सका है। अभी भी कई ग्रामीण रूट ऐसे हैं, जहां लॉकडाउन से पहले बसें जाती थी, लेकिन लॉकडाउन के बाद बसें नहीं आ रही हैं। गांव शक्करपुरा, गदली, बबनपुर ढाणी, सहनाल, गुरुसर, ढाणी लांबा आदि गांवों के ग्रामीण लॉकडाउन के बाद से ही बसों की परिचालन व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
फतेहाबाद डिपो में 120 परिचालक हैं, जबकि जरूरत 160 की है। ओवरटाइम नहीं मिलेगा तो परिचालक अतिरिक्त ड्यूटी क्यों करेंगे। सरकार को बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए परिचालकों की भर्ती करनी चाहिए।

राजू बिश्नोई, जिला उपप्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन
यह सही है कि डिपो में परिचालकों की कमी बनी हुई है। 22 परिचालकों के सब इंस्पेक्टर बनने के बाद उनके स्थान पर और परिचालक नहीं मिल पाए हैं। फिर भी व्यवस्था बनाकर काम चला रहे हैं। आरएस पूनिया, महाप्रबंधक, फतेहाबाद डिपो
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