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Fatehabad News: जिले में धान 1509 के भाव में भारी गिरावट, सरकारी खरीद में आई कमी

Sat, 11 Oct 2025 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 11 Oct 2025 11:12 PM IST
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There has been a sharp drop in the price of 1509 paddy in the district, and a decrease in government procurement.
फतेहाबाद की पुरानी अनाज मंडी में रखी धान की ढेरियां। 
फतेहाबाद। जिले की मंडियों में धान की खरीद प्रक्रिया जारी है, लेकिन बासमती की प्रमुख किस्म 1509 के भाव में हुई गिरावट ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी हैं। पिछले कई दिनों से धान की सरकारी खरीद में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर निजी खरीदार इस मौके का फायदा उठा रहे हैं। निजी खरीद व्यापारी धान की फसल को सस्ते भाव में खरीद रहे हैं, इससे किसानों को फसल हुई लागत का खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
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किसानों के अनुसार, धान की किस्म 1509 का उचित बाजार भाव लगभग 3500 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में उन्हें मात्र 2500 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच का भाव मिल रहा है। भाव में आई कमी से किसानों को प्रति क्विंटल का एक हजार रुपये की गिरावट दर्ज हुई है, जिसने किसानों की कमर तोड़ दी है। कम भाव पर फसल बिकने से किसानों को उनकी लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।
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धान की 1509 किस्म, जो अपनी कम अवधि और बेहतर गुणवत्ता के लिए जानी जाती है, पिछले कुछ वर्षों में किसानों के लिए अच्छी आय का स्रोत रही है। मगर इस साल पहले जहां बारिश से फसल का उत्पादन कम हुआ है वहीं अब भाव की कमी ने किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।
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खरीद शुरू होने के शुरुआती दिनों में धान की भाव 3800 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा था। लेकिन अब पिछले एक सप्ताह से इसके भाव में कमी आई है। किसानों का कहना है कि डीजल, खाद और बीज की बढ़ती कीमतों के कारण खेती की लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में, यदि धान का उचित भाव नहीं मिलता है, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

फतेहाबाद की पुरानी अनाज मंडी में फसल लेकर पहुंचे गांव भूथन कलां के किसान चांदी राम, पवन और राजकुमार आदि ने बताया कि उनको 3500 प्रति क्विंटल के भाव की उम्मीद की थी। लेकिन अब 2500 प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इससे खेत की जुताई से लेकर रोपाई तक की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में प्रशासन को निजी खरीदारों पर ध्यान देना चाहिए और फसलों का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
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