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बिन गुरु गीता का ज्ञान कैसे

Thu, 26 Nov 2015 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद Updated Thu, 26 Nov 2015 12:36 AM IST
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गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने को लेकर आए दिन सरकार द्वारा बयान तो दिए जाते रहे हैं लेकिन इसके लिए कोई पहल अब तक शुरू नहीं की गई है।
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उल्टा जिले में आधे से ज्यादा स्कूलों में संस्कृत अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। विभाग भी इसे लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। वर्तमान में विभाग के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो जिले में संस्कृत अध्यापकों के 232 पद हैं उनमें से 113 खाली पड़े हैं।

जिले में संस्कृत अध्यापकों के पदों का आंकड़ा

कैटेगरी              सीट           कार्यरत            खाली
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जनरल              100            85                   15
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एससी                 38             12                   26
बीसी ए                 29            15                     14
बीसी बी                16             6                      10
ईएसएम जनरल     16               0                      16
ईएसएम एससी      5                  0                      5
ईएसएम बीसी ए     5                  0                      5
ईएसएम बीसी बी    7                    0                   7
पीएचसी               6                      0                   6
ओएसएसपी         10                    1                     9

अध्यापकों के अभाव में भाषा से हो रहा मोह भंग
स्कूलों में संस्कृत के अध्यापकों की कमी के चलते विद्यार्थी भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जिसका नतीजा यह है कि वह ज्यादातर फिजिकल विषय की तरफ भाग रहे हैं। आए दिन संस्कृत परीक्षा में विद्यार्थियों का खराब परीक्षा परिणाम भी इसका गवाह है।

संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत जरूरी

सरकार अगले साल से गीता को पाठ्यक्रम में जोड़ने जा रही है। गीता व संस्कृत एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। गीता को पढ़ाने के लिए तथा भारतीय संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना जरूरी है और वह गुरू बिना पूरा नहीं हो सकता।


विभाग को गीता पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले अध्यापकों की कमी को दूर करने पर जोर लगाना होगा।

पद भरने की तरफ ध्यान दें सरकार
स्कूलों में संस्कृत अध्यापकों की कमी है जिस कारण से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्हें पढ़ाने के लिए अध्यापक चाहिए और इस कमी को सरकार को पूरा करना होगा ताकि विद्यार्थी गीता को भी अच्छे ढंग से पढ़ सकें।
सुदामा शास्त्री
 संस्कृत अध्यापक एवं वैदिक प्रवक्ता
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