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Fatehabad News: अनुसूचित जाति जनजाति आयोग की टीम ने माना, कब्जा हटाने के दौरान लोगों के साथ ज्यादती हुई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2024 03:13 AM IST
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The team of Scheduled Caste and Tribe Commission admitted that people were subjected to atrocities during the removal of encroachment.
धरना स्थल पर मौजूद संगठनों व मौजूद लोगों का सम्मानित करते हुए आयोग की टीम
रतिया। रतिया में तीन दिन पहले नगरपालिका प्रशासन द्वारा अग्रवाल धर्मशाला के पास छुड़वाए गए कब्जे के मामले में मंगलवार को अनुसूचित जाति आयोग की टीम चेयरमैन प्रो. रविंद्र बलियाला के नेतृत्व में विवादित स्थल पर पहुंची। टीम ने इस जमीन पर धरना देकर बैठे लोगों के बीच नगरपालिका अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। इस दौरान अधिकारी काफी असहज नजर आए।
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टीम ने माना कि यहां कब्जा हटाने से पहले उन्हें बसाने की कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने सहानुभूति जताते हुए कहा कि परिवारों के साथ ज्यादती हुई है और इस मामले में सख्त कार्रवाई होगी। आयोग की टीम ने नगरपालिका अधिकारियों से जमीन संबंधित पूरा रिकॉर्ड मांगा। परिवारों पर पुलिस से मारपीट के आरोपों के संबंध में पुलिसकर्मियों की भी जानकारी और रिकॉर्ड सहित 29 जुलाई को अधिकारियों को चंडीगढ़ तलब किया गया है।
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मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेकर भेजी टीम
मीडिया की सुर्खियां बनते ही मामला मुख्यमंत्री दरबार में पहुंचा तथा अनुसूचित जाति आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लिया। मंगलवार को चेयरमैन रविंद्र बलियाला, उपाध्यक्ष विजय बड़गुर्जर, सदस्य रवि तारावाली, रतनलाल बामनिया मौके पर पहुंचे और धरनारत लोगों से पूरी जानकारी ली। पीड़ित परिवार से पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद उन्होंने नगरपालिका सचिव संदीप भुक्कल, पालिका अभियंता सुनील लांबा से कब्जाई गई जगह खाली करवाने के बारे में नियमों की जानकारी मांगी तो अधिकारी इसका ठोस जवाब नहीं दे पाए। आयोग की टीम ने नगरपालिका अधिकारियों को जमकर फटकारा और पूरा रिकाॅर्ड मांगा। उन्होंने मामले को लेकर जिला नगर आयुक्त संजय बिश्नोई को भी तलब किया, लेकिन वे समय पर नहीं पहुंचे तो टीम ने इस पर भी गुस्सा प्रकट किया। उन्होंने संजय बिश्नोई को वहां मौजूद आमजन के बीच ही स्पष्ट कहा कि नगरपालिका अधिकारियों द्वारा यह कार्रवाई नियमों को ताक पर रखकर की गई है। हालांकि, डीएमसी संजय बिश्नोई नियमों के तहत कार्रवाई करने और आयोग को नगरपालिका का रिकॉर्ड दिखाने लगे तो आयोग चेयरमैन ने उन्हें व अन्य अधिकारियों को इस मामले से संबंधित पूर्ण रिकॉर्ड सहित 29 जुलाई को आयोग के चंडीगढ़ कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए।
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डेढ़ घंटे तक सवाल पूछती रही टीम, पसीने से तर-बतर हो गए अधिकारी
आयोग के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले की समाचार पत्र में फोटो देखी, उसमें कुछ पुलिस कर्मचारी महिलाओं व छोटी लड़कियों को गर्मी में तपती सड़क पर घसीटते हुए ले जाते दिखे हैं। आयोग ने लोगों से मारपीट के आरोपों पर संबंधित पुलिसकर्मियों की जानकारी मांगी है। करीब डेढ़ घंटा तक टीम कड़ी धूप में अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के बीच खड़ा करके जवाब तलबी करती रही, अधिकारी पसीने से तर-बतर नजर आए। वहीं, धरना दे रहे किसान संगठन और पीड़ित परिवार ने आयोग की टीम को अपनी मांगों का मांग पत्र देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के परिवार को बेघर करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हो।

पीड़ित परिवारों ने कहा, उनके बिजली मीटर और राशन कार्ड इसी स्थान के
पीड़ित परिवार ने आयोग की टीम को बताया कि उनका परिवार पिछले 80 सालों से इस स्थान पर रह रहा है। उनके बिजली का मीटर, पानी का कनेक्शन, राशन कार्ड, वोटर कार्ड और आधार कार्ड, आर्म लाइसेंस सहित अन्य सरकारी दस्तावेज भी इसी स्थान के पत्ते पर बने हुए हैं। उन्होंने आयोग की टीम के समक्ष आरोप लगाया कि उन्हें मात्र एक घंटा पहले जगह खाली करने की सूचना दी गई थी। उन्होंने अधिकारियों से पांच दिन की मोहलत मांगी थी, लेकिन अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनते हुए उन पर लाठीचार्ज करते हुए आशियानों पर बुलडोजर चला दिया। बीमार और गर्भवती महिला को छुट्टी देने का मामला भी परिवार ने आयोग के सामने उठाया। आयोग की टीम ने पीड़ित परिवार का पक्ष सुनने के बाद उन्हें आश्वासन दिया कि आयोग पीड़ित परिवार के साथ है तथा न्याय दिलवाले में पूर्ण सहयोग करेंगे

धरनास्थल से उपयुक्त को किया फोन
पीड़ित परिवार की बात सुनने के बाद आयोग की टीम ने तहसीलदार विजय कुमार के माध्यम से उपायुक्त राहुल नरवाल से धरना स्थल पर फोन पर बात करते हुए उन्हें निर्देश दिया कि प्रशासन परिवारों को नागरिक अस्पताल में मुख्य डॉक्टरों की टीम की देखरेख में इलाज दिलाए। मामले के समाधान तक शेल्टर होम बनाकर इनके खाने पीने की व्यवस्था अपने स्तर पर करें।


कोट
आयोग की टीम ने सारी जानकारी ली है। पुलिस व प्रशासन को 29 जुलाई को पूरे रिकाॅर्ड सहित चंडीगढ़ बुलाया है। उसके बाद पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करके मुख्यमंत्री को दी जाएगी। मामले में अगर किसी भी अधिकारी की लापरवाही मिली तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। प्रथम स्तर पर प्रतीत होता है कि कब्जा कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया है।



-प्रो. रविंद सिंह बलियाला, चेयरमैन, हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग
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