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Fatehabad News: कोर्ट-कचहरी के काम चिकित्सकों से न करवाएं, पीएचसी-सीएचसी में बैठेंगे डॉक्टर तब सुधरेगी व्यवस्था
Sun, 14 Jan 2024 03:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 14 Jan 2024 03:44 PM IST
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फतेहाबाद/भूना। इस समय गांवों में खोले गए पीएचसी और सीएचसी केवल एमएलआर काटने या रेफर करने तक सीमित हो गए हैं। जिला मुख्यालय तक के नागरिक अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक नहीं है। इसी कारण मरीजों की न बेहतर जांच हो पा रही है और न ही उन्हें पूरी दवाइयां मिल रही हैं।
गर्भवती को भी डिलिवरी के लिए रेफर ही किया जा रहा है क्योंकि महिला चिकित्सक नहीं होती। इन परिस्थितियों से आम जन को निजात दिलाने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए प्रदेश सरकार को बड़े कदम उठाने होंगे। सबसे पहले चिकित्सकों को कोर्ट-कचहरी के कामों से मुक्त करना होगा। हर पीएचसी व सीएचसी स्तर पर चिकित्सक नियुक्त करने होंगे। चिकित्सकों को जरूरी सुविधाएं नियुक्ति स्थल तक उपलब्ध करवाना होंगी। या राजस्थान की तर्ज पर सरकारी चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस की भी छूट देनी होगी। तब जाकर स्वास्थ्य सेवाओं का बिगड़ा हुआ ढांचा सुदृढ़ हो पाएगा। यह कहना है, जनमंच के जरिये स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अपनी राय देने वाले जागरूक लोगों की।
प्रदेश सरकार द्वारा सबसे ज्यादा बजट स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर खर्च किया जाता है। बजट जनता के खून-पसीने की कमाई होती है। अस्पतालों को मिलने वाले भारी-भरकम बजट का सदुपयोग किया जाना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, विभिन्न प्रकार के टेस्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। मरीज शारीरिक व आर्थिक रूप से वैसे ही परेशान होते हैं । अगर उन्हें ये चीजें बाहर से करवानी पड़ेंगी तो ये उनके लिए कोढ़ में खाज जैसी स्थिति बन जाती है। दवाइयां भी मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध होनी चाहिए ताकि उनका सरकारी अस्पतालों पर विश्वास बढ़े तथा वे बेहिचक सरकारी अस्पताल में अपना इलाज करवा सकें।
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-धर्मपाल गोयल, समाजसेवी
लोगों के स्वास्थ्य को लेकर सरकार को गंभीर होना चाहिए। वर्तमान समय में सबसे बड़ी मुख्य जरूरत बीमारी के उपचार से संबंधित है। इसलिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व अन्य सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर के अतिरिक्त मेडिसिन की सुविधा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ब्लॉक के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक का पद रिक्त होना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। कई जगह तो स्थिति ऐसी है कि पीएचसी या सीएचसी स्तर पर भी गर्भवती की डिलिवरी करवाने की व्यवस्था नहीं है।
-कांता दूहन, पर्वतारोही
जिले के अधिकांश सीएचसी केंद्रों में लंबे समय से डॉक्टर के कई पद खाली पड़े हैं। इस कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में धक्के खाने पड़ रहे हैं। सीएचसी केंद्र मात्र एमएलआर काटने तक सीमित रह गए हैं। परंतु सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए और लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। या फिर राजस्थान की तरह सरकारी चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस की भी छूट दे देनी चाहिए, ताकि कम से कम मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं तो पर्याप्त मिल सकें।
-पवन कुमार सिंगला, व्यापारी
सरकारी चिकित्सकों का नौकरी से मोह इसलिए भी भंग हो जाता है क्योंकि उनसे चिकित्सा के अलावा कोर्ट-कचहरी के कार्य भी करवाए जाते हैं। इस कारण चिकित्सक का तनाव और बढ़ जाता है। सरकार को ऐसे प्रयास करने चाहिए कि एक चिकित्सक प्राइवेट अस्पताल में जितना पैसा लेता है, उसको उस स्तर की सैलरी और अन्य सुविधाएं सरकारी स्तर पर दी जाएं। इससे उनका रुझान सरकारी सेवाओं में बना रहेगा। मौजूदा समय में सरकारी सेवा को छोड़कर अधिकांश चिकित्सक प्राइवेट अस्पतालों में सेवाएं ज्यादा देने को उत्सुक रहते हैं।
-सुरेश सरदाना, सामाजिक कार्यकर्ता
मौजूदा दौर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे मशीन की सुविधा नहीं है। इसके लिए लोगों को फतेहाबाद जिला मुख्यालय या अग्रोहा मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। इससे मरीज परेशान होते हैं और आर्थिक रूप से भी काफी चपत लगती है। सीएचसी केंद्र में मरीजों की सुविधा के लिए अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे मशीन तथा अन्य समस्याओं का समाधान सरकार को तुरंत प्रभाव से करना चाहिए। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार को बड़े प्रयास नहीं कर पाई है। चिकित्सकों की भर्ती भी हर साल होती रहनी चाहिए।
-सुधीर गोदारा, समाजसेवी
स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में प्रदेश का ग्रामीण आंचल काफी पिछड़ा हुआ है। प्रदेश सरकार को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक की तरह सुविधाएं देनी चाहिए। मोहल्ले में ही लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके। चिकित्सकों को फील फ्री माहौल देना होगा। उनमें सुरक्षा का भाव बढ़ाने से लेकर उचित सैलरी देनी होगी। मौजूदा दौर में ग्रामीण आंचल के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मोटा खर्च करना पड़ रहा है। सरकारी क्षेत्र में सुविधाओं की कमी के चलते लोग प्राइवेट अस्पतालों पर ज्यादा निर्भर हैं।
-दीपक भांभू, जागरूक युवा
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गर्भवती को भी डिलिवरी के लिए रेफर ही किया जा रहा है क्योंकि महिला चिकित्सक नहीं होती। इन परिस्थितियों से आम जन को निजात दिलाने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए प्रदेश सरकार को बड़े कदम उठाने होंगे। सबसे पहले चिकित्सकों को कोर्ट-कचहरी के कामों से मुक्त करना होगा। हर पीएचसी व सीएचसी स्तर पर चिकित्सक नियुक्त करने होंगे। चिकित्सकों को जरूरी सुविधाएं नियुक्ति स्थल तक उपलब्ध करवाना होंगी। या राजस्थान की तर्ज पर सरकारी चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस की भी छूट देनी होगी। तब जाकर स्वास्थ्य सेवाओं का बिगड़ा हुआ ढांचा सुदृढ़ हो पाएगा। यह कहना है, जनमंच के जरिये स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अपनी राय देने वाले जागरूक लोगों की।
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प्रदेश सरकार द्वारा सबसे ज्यादा बजट स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर खर्च किया जाता है। बजट जनता के खून-पसीने की कमाई होती है। अस्पतालों को मिलने वाले भारी-भरकम बजट का सदुपयोग किया जाना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, विभिन्न प्रकार के टेस्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। मरीज शारीरिक व आर्थिक रूप से वैसे ही परेशान होते हैं । अगर उन्हें ये चीजें बाहर से करवानी पड़ेंगी तो ये उनके लिए कोढ़ में खाज जैसी स्थिति बन जाती है। दवाइयां भी मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध होनी चाहिए ताकि उनका सरकारी अस्पतालों पर विश्वास बढ़े तथा वे बेहिचक सरकारी अस्पताल में अपना इलाज करवा सकें।
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-धर्मपाल गोयल, समाजसेवी
लोगों के स्वास्थ्य को लेकर सरकार को गंभीर होना चाहिए। वर्तमान समय में सबसे बड़ी मुख्य जरूरत बीमारी के उपचार से संबंधित है। इसलिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व अन्य सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर के अतिरिक्त मेडिसिन की सुविधा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ब्लॉक के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक का पद रिक्त होना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। कई जगह तो स्थिति ऐसी है कि पीएचसी या सीएचसी स्तर पर भी गर्भवती की डिलिवरी करवाने की व्यवस्था नहीं है।
-कांता दूहन, पर्वतारोही
जिले के अधिकांश सीएचसी केंद्रों में लंबे समय से डॉक्टर के कई पद खाली पड़े हैं। इस कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में धक्के खाने पड़ रहे हैं। सीएचसी केंद्र मात्र एमएलआर काटने तक सीमित रह गए हैं। परंतु सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए और लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। या फिर राजस्थान की तरह सरकारी चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस की भी छूट दे देनी चाहिए, ताकि कम से कम मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं तो पर्याप्त मिल सकें।
-पवन कुमार सिंगला, व्यापारी
सरकारी चिकित्सकों का नौकरी से मोह इसलिए भी भंग हो जाता है क्योंकि उनसे चिकित्सा के अलावा कोर्ट-कचहरी के कार्य भी करवाए जाते हैं। इस कारण चिकित्सक का तनाव और बढ़ जाता है। सरकार को ऐसे प्रयास करने चाहिए कि एक चिकित्सक प्राइवेट अस्पताल में जितना पैसा लेता है, उसको उस स्तर की सैलरी और अन्य सुविधाएं सरकारी स्तर पर दी जाएं। इससे उनका रुझान सरकारी सेवाओं में बना रहेगा। मौजूदा समय में सरकारी सेवा को छोड़कर अधिकांश चिकित्सक प्राइवेट अस्पतालों में सेवाएं ज्यादा देने को उत्सुक रहते हैं।
-सुरेश सरदाना, सामाजिक कार्यकर्ता
मौजूदा दौर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे मशीन की सुविधा नहीं है। इसके लिए लोगों को फतेहाबाद जिला मुख्यालय या अग्रोहा मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। इससे मरीज परेशान होते हैं और आर्थिक रूप से भी काफी चपत लगती है। सीएचसी केंद्र में मरीजों की सुविधा के लिए अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे मशीन तथा अन्य समस्याओं का समाधान सरकार को तुरंत प्रभाव से करना चाहिए। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार को बड़े प्रयास नहीं कर पाई है। चिकित्सकों की भर्ती भी हर साल होती रहनी चाहिए।
-सुधीर गोदारा, समाजसेवी
स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में प्रदेश का ग्रामीण आंचल काफी पिछड़ा हुआ है। प्रदेश सरकार को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक की तरह सुविधाएं देनी चाहिए। मोहल्ले में ही लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके। चिकित्सकों को फील फ्री माहौल देना होगा। उनमें सुरक्षा का भाव बढ़ाने से लेकर उचित सैलरी देनी होगी। मौजूदा दौर में ग्रामीण आंचल के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मोटा खर्च करना पड़ रहा है। सरकारी क्षेत्र में सुविधाओं की कमी के चलते लोग प्राइवेट अस्पतालों पर ज्यादा निर्भर हैं।
-दीपक भांभू, जागरूक युवा