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Fatehabad News: पौष्टिकता की कमी से नहीं धुल पा रहा कुपोषण का दाग
Thu, 31 Aug 2023 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 31 Aug 2023 11:23 PM IST
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फतेहाबाद में जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की टीम स्कूलों में छात्रों की स्क्रीनिंग करते हुए।
फतेहाबाद। प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों में कुपोषण को रोकने की जिम्मेदारी सौंपी है। तीनों विभागों की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 76 साल बाद भी कुपोषण का दाग धुल नहीं पा रहा है। स्कूलों में और आम कैंपों में जांच के दौरान बच्चे कुपोषण का शिकार मिल रहे हैं। बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। इस कारण बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
निरोगी हरियाणा और जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की स्क्रीनिंग रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। निरोगी हरियाणा द्वारा जिले में वीरवार तक एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग हुई और इसमें 125 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। इसके अलावा स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कर रही जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की टीम को अप्रैल से अगस्त माह तक 91 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 1904 बच्चों की स्क्रीनिंग हुई है। इसमें 49 लड़के और 42 लड़कियां कुपोषण का शिकार मिली हैं।
स्कूलों में चावल की रेसिपी पसंद नहीं कर रहे छात्र
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र कुपोषण का शिकार न हो इसको लेकर मिड-डे मील दिया जा रहा है। बावजूद इसके कुपोषण का दाग दूर नहीं हो रहा है। विशेषज्ञों से जब बात की गई तो सामने आया कि मिड-डे मील में चावल की रेसिपी ज्यादा दी गई है और गेहूं की रेसिपी कम है। यानि 60 फीसदी चावल आइटम है तो 40 फीसदी गेहूं की सामग्री दी जा रही है। कुक भी चावल रेसिपी बनाकर संतुष्ट है। क्योंकि उन्हें ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती है। इसका असर छात्रों की सेहत पर पड़ रहा है। गेहूं की रेसिपी की बात की जाए तो दलिया नमकीन दिया जाता है, जिसे छात्र खाना पसंद नहीं करते हैं।
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स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील दिया जा रहा है, लेकिन बजट इतना कम है कि रेसिपी बन ही नहीं पा रही है। इसके अलावा जो रेसिपी दी गई है उसे छात्र खाना पसंद नहीं करते हैं। चावल की रेसिपी को कम करके गेहूं को बढ़ावा दिया जाए, ताकि कुपोषण को खत्म किया जा सके।
देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
निरोगी हरियाणा के तहत जिले में 4 लाख 62 हजार लोगों की स्क्रीनिंग होनी है। अब तक एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इसमें 125 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। इसके पीछे कारण ये है कि बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। इसको लेकर माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है।
- मेजर डॉ.शरद तुली, उप सिविल सर्जन
जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की तरफ से स्कूलों में जाकर टीमें छात्रों की स्क्रीनिंग कर रही है। स्क्रीनिंग के दौरान जो छात्र कुपोषण का शिकार मिल रहे हैं उनके मां-बाप को जागरूक किया जा रहा है। जरूरत अनुसार जांच भी करवाई जा रही है, ताकि कमियों का पता चल पाए और समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।
- सुखदेव सिंह, मैनेजर, जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र
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निरोगी हरियाणा और जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की स्क्रीनिंग रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। निरोगी हरियाणा द्वारा जिले में वीरवार तक एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग हुई और इसमें 125 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। इसके अलावा स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कर रही जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की टीम को अप्रैल से अगस्त माह तक 91 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 1904 बच्चों की स्क्रीनिंग हुई है। इसमें 49 लड़के और 42 लड़कियां कुपोषण का शिकार मिली हैं।
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स्कूलों में चावल की रेसिपी पसंद नहीं कर रहे छात्र
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र कुपोषण का शिकार न हो इसको लेकर मिड-डे मील दिया जा रहा है। बावजूद इसके कुपोषण का दाग दूर नहीं हो रहा है। विशेषज्ञों से जब बात की गई तो सामने आया कि मिड-डे मील में चावल की रेसिपी ज्यादा दी गई है और गेहूं की रेसिपी कम है। यानि 60 फीसदी चावल आइटम है तो 40 फीसदी गेहूं की सामग्री दी जा रही है। कुक भी चावल रेसिपी बनाकर संतुष्ट है। क्योंकि उन्हें ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती है। इसका असर छात्रों की सेहत पर पड़ रहा है। गेहूं की रेसिपी की बात की जाए तो दलिया नमकीन दिया जाता है, जिसे छात्र खाना पसंद नहीं करते हैं।
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स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील दिया जा रहा है, लेकिन बजट इतना कम है कि रेसिपी बन ही नहीं पा रही है। इसके अलावा जो रेसिपी दी गई है उसे छात्र खाना पसंद नहीं करते हैं। चावल की रेसिपी को कम करके गेहूं को बढ़ावा दिया जाए, ताकि कुपोषण को खत्म किया जा सके।
देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
निरोगी हरियाणा के तहत जिले में 4 लाख 62 हजार लोगों की स्क्रीनिंग होनी है। अब तक एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इसमें 125 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। इसके पीछे कारण ये है कि बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। इसको लेकर माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है।
- मेजर डॉ.शरद तुली, उप सिविल सर्जन
जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की तरफ से स्कूलों में जाकर टीमें छात्रों की स्क्रीनिंग कर रही है। स्क्रीनिंग के दौरान जो छात्र कुपोषण का शिकार मिल रहे हैं उनके मां-बाप को जागरूक किया जा रहा है। जरूरत अनुसार जांच भी करवाई जा रही है, ताकि कमियों का पता चल पाए और समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।
- सुखदेव सिंह, मैनेजर, जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र