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Fatehabad News: सजावट की चमक फीकी पड़ी, अब सुरक्षा ने बदली डिवाइडर की तस्वीर
Thu, 16 Jul 2026 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 16 Jul 2026 10:51 PM IST
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फतेहाबाद। शहर के मुख्य रोड पर डिवाइडर से हटाई गई ग्रिल। संवाद
फतेहाबाद। सिरसा-हिसार रोड पर बने डिवाइडरों से लोहे की ग्रिल हटाने का काम शुरू हो गया है। मोड़ और यू-टर्न पर ग्रिल की वजह से वाहन चालकों को सामने से आने वाले वाहनों को देखने में परेशानी हो रही थी, जिससे हादसों की आशंका बढ़ रही थी। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यह मुद्दा उठने के बाद नगर परिषद ने जोखिम वाले स्थानों से ग्रिल हटाने का निर्णय लिया।
सबसे पहले इन्हीं जगहों पर काम शुरू किया गया है। नगर परिषद इससे पहले भी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लघु सचिवालय और शिवपुरी के सामने डिवाइडरों पर रखे सजावटी गमले हटा चुकी है। इन स्थानों पर गमलों से टकराकर कई मोटरसाइकिल सवार दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। अब ग्रिल हटाने की कार्रवाई भी उसी क्रम का हिस्सा मानी जा रही है।
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सुंदरता की योजना, सुरक्षा की चुनौती
करीब दो वर्ष पहले शहर के प्रमुख मार्गों की सुंदरता बढ़ाने के उद्देश्य से डिवाइडरों पर बड़े सजावटी गमले और लोहे की ग्रिल लगाई गई थीं। उस समय इसे शहर के सुंदरीकरण की अहम पहल माना गया था लेकिन अब अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि कई स्थानों पर यही ग्रिल यातायात में बाधा बन रही थी। विशेषकर मोड़, कट और यू-टर्न पर ग्रिल के कारण दृश्यता प्रभावित होती थी। सामने से आने वाले वाहन समय पर दिखाई नहीं देते थे जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता था। सड़क सुरक्षा समिति ने इस स्थिति का आकलन करने के बाद जोखिम वाले स्थानों से ग्रिल हटाने की सिफारिश की जिस पर अब अमल किया जा रहा है।
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पहले लगाने पर लाखों खर्च, अब हटाने पर भी खर्च
नगर परिषद ने करीब सवा दो करोड़ रुपये की लागत से सिरसा रोड पर सेतिया पैलेस के सामने से हिसार रोड पर लघु सचिवालय तक डिवाइडरों का निर्माण कराया था। इसके बाद डिवाइडरों पर बड़े गमले और लोहे की ग्रिल लगाने में भी लाखों रुपये खर्च किए गए। अब इन्हीं ग्रिलों को हटाने पर फिर राशि खर्च हो रही है। शहर की सामाजिक संस्थाओं से जुड़े विनोद अरोड़ा, प्रवीण कुमार और हरदीप सिंह का कहना है कि डिवाइडरों की योजना बनाते समय यातायात की जरूरतों और दृश्यता का ध्यान रखा जाता तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। उनका मानना है कि बेहतर योजना से सार्वजनिक धन के इस अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता था।
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सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यातायात व्यवस्था को देखते हुए इन्हें हटाने का निर्णय लिया गया है। जहां पर दिक्कत है वहां से ग्रिल को हटाया जा रहा है।
- सुमित चोपड़ा, एमई।
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सबसे पहले इन्हीं जगहों पर काम शुरू किया गया है। नगर परिषद इससे पहले भी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लघु सचिवालय और शिवपुरी के सामने डिवाइडरों पर रखे सजावटी गमले हटा चुकी है। इन स्थानों पर गमलों से टकराकर कई मोटरसाइकिल सवार दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। अब ग्रिल हटाने की कार्रवाई भी उसी क्रम का हिस्सा मानी जा रही है।
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सुंदरता की योजना, सुरक्षा की चुनौती
करीब दो वर्ष पहले शहर के प्रमुख मार्गों की सुंदरता बढ़ाने के उद्देश्य से डिवाइडरों पर बड़े सजावटी गमले और लोहे की ग्रिल लगाई गई थीं। उस समय इसे शहर के सुंदरीकरण की अहम पहल माना गया था लेकिन अब अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि कई स्थानों पर यही ग्रिल यातायात में बाधा बन रही थी। विशेषकर मोड़, कट और यू-टर्न पर ग्रिल के कारण दृश्यता प्रभावित होती थी। सामने से आने वाले वाहन समय पर दिखाई नहीं देते थे जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता था। सड़क सुरक्षा समिति ने इस स्थिति का आकलन करने के बाद जोखिम वाले स्थानों से ग्रिल हटाने की सिफारिश की जिस पर अब अमल किया जा रहा है।
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पहले लगाने पर लाखों खर्च, अब हटाने पर भी खर्च
नगर परिषद ने करीब सवा दो करोड़ रुपये की लागत से सिरसा रोड पर सेतिया पैलेस के सामने से हिसार रोड पर लघु सचिवालय तक डिवाइडरों का निर्माण कराया था। इसके बाद डिवाइडरों पर बड़े गमले और लोहे की ग्रिल लगाने में भी लाखों रुपये खर्च किए गए। अब इन्हीं ग्रिलों को हटाने पर फिर राशि खर्च हो रही है। शहर की सामाजिक संस्थाओं से जुड़े विनोद अरोड़ा, प्रवीण कुमार और हरदीप सिंह का कहना है कि डिवाइडरों की योजना बनाते समय यातायात की जरूरतों और दृश्यता का ध्यान रखा जाता तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। उनका मानना है कि बेहतर योजना से सार्वजनिक धन के इस अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता था।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यातायात व्यवस्था को देखते हुए इन्हें हटाने का निर्णय लिया गया है। जहां पर दिक्कत है वहां से ग्रिल को हटाया जा रहा है।
- सुमित चोपड़ा, एमई।