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Fatehabad News: रूसी सेना में भर्ती की जारी सूची में फतेहाबाद के दो युवक भी शामिल, 20 दिन से परिजनों से नहीं कोई संपर्क

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Sep 2025 10:44 PM IST
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The ongoing recruitment list of the Russian army includes two youths from Fatehabad, with no contact with their families for 20 days
फतेहाबाद। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव कुम्हारिया के दो युवक रूस में फंसे हैं और पिछले 20 दिनों से उनका अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। स्टडी वीजा पर रूस गए अंकित जांगड़ा (23) और विजय पूनिया (25) को कथित रूप से नौकरी का लालच देकर रूसी सेना में भर्ती कर यूक्रेन सीमा पर भेज दिया गया है।
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परिजनों ने मंगलवार को फिर लघु सचिवालय पहुंचकर अधिकारियों से गुहार लगाई कि उनके बेटों को सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। अंकित के भाई रघुबीर जांगड़ा ने बताया कि विदेश मंत्रालय द्वारा हाल ही में रूस में फंसे 27 भारतीय नागरिकों की सूची जारी की गई है, जिसमें अंकित और विजय का नाम भी शामिल है। इससे परिजनों को उम्मीद जगी है कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है।
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पीएम मोदी के नाम की सवामणी रखने का संकल्प : अंकित के भाई रघुबीर ने बताया कि परिवार बेहद चिंतित है। हर वक्त फोन की ओर नजरें रहती हैं, उम्मीद होती है कि शायद कोई संदेश आए।
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रघुबीर ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। हमने उनके नाम की सवामणी बोली है। जब हमारे बेटे वापस आएंगे तो भोग लगाकर सवामणी करेंगे। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्य मानसिक तनाव में हैं, माता-पिता की तबीयत भी बिगड़ रही है और घर में खाना-पीना लगभग बंद हो गया है।
वीडियो कॉल पर युवकों ने लगाई थी मदद की गुहार

परिजनों के अनुसार, रूस और यूक्रेन की सीमा पर फंसे अंकित और विजय पहले व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से परिवार को अपनी स्थिति की जानकारी देते थे। उन्होंने बताया था कि उन्हें जबरन युद्ध में भेजा जा रहा है और किसी तरह बचा लिया जाए। 10 सितंबर की रात विजय ने अपने दोस्त रमेश कुमार को फेसबुक मैसेंजर पर मैसेज भेजा था, जिसमें बताया गया कि उसका व्हाट्सएप डिलीट कर दिया गया है।

स्टडी वीजा पर गए, नौकरी का दिया था झांसा

रघुबीर ने बताया कि भाई अंकित जांगड़ा फरवरी 2025 में मॉस्को स्थित एमएसएलयू कॉलेज में भाषा कोर्स के लिए स्टडी वीजा पर गया था। वहीं विजय पूनिया कुछ समय पहले दोबारा रूस गया था। रघुबीर जांगड़ा ने बताया कि दोनों को एक महिला एजेंट ने रूसी सेना में नौकरी दिलवाने का झांसा दिया। उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 20 लाख रुपये और फिर हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये वेतन देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उन्हें सीधे सेना की वर्दी पहना कर युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। यहां तक कि उनका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया।


परिजन लगातार कर रहे प्रयास

परिजनों ने बताया कि वे कई बार विदेश मंत्रालय, जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। परिवार ने केंद्र सरकार से अपील की है कि अंकित और विजय को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए।
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