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Fatehabad News: अविश्वास प्रस्ताव ने तोड़ा सियासी भरोसा...ज्योति की गई कुर्सी, अब अनु सरबटा के भट्टूकलां पंचायत समिति की चेयरपर्सन की उम्मीद

Thu, 22 Jan 2026 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 22 Jan 2026 10:55 PM IST
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The no-confidence motion broke political trust... Jyoti's chair was vacated, now Anu Sarbata hopes to become the chairperson of Bhattukalan Panchayat Committee.
फतेहाबाद के भटटूकलां पंचायत समिति चेयरपर्सन के ​खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद भाजपा
फतेहाबाद। भट्टूकलां पंचायत समिति की चेयरपर्सन ज्योति लूणा की कुर्सी वीरवार को गिर गई। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार बलवान सिंह का समर्थन करने की वजह से उनकी कुर्सी पर संकट आ गया था। पूर्व विधायक दुड़ाराम खेमा का लगातार विरोध इस घटनाक्रम का मुख्य कारण बना। एडीसी अनुराग ढालिया की अध्यक्षता में लघु सचिवालय में हुई बैठक में 21 सदस्यों में से 18 ने लूणा के खिलाफ मतदान किया, जिसके बाद उनका पद समाप्त हो गया।
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अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग में 18 सदस्यों ने लिया भाग
13 जनवरी 2026 को 17 सदस्यों ने एडीसी से मुलाकात कर अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुलाने की मांग की थी। उस बैठक में 18 सदस्य उपस्थित हुए और वोटिंग के दौरान ज्योति लूणा के खिलाफ मतदान किया। अब ज्योति लूणा के पद से हटने के बाद अनु सरबटा का चेयरपर्सन बनना तय है। यह पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है, और पूर्व विधायक दुड़ाराम खेमे ने उनकी जगह अनु सरबटा को चेयरपर्सन बनाने का निर्णय लिया है। उपाध्यक्ष बंसीलाल ने बताया कि पहले यह तय हुआ था कि ढाई-ढाई साल के लिए ज्योति और अनु सरबटा दोनों चेयरपर्सन के पद पर कार्य करेंगे, लेकिन अब यह समझौता टूट गया है।
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पिछले प्रयासों में बची थी लूणा की कुर्सी
इससे पहले 2024 में भी लूणा की कुर्सी गिराने की कोशिश की गई थी, लेकिन उस समय वह अपनी कुर्सी बचाने में सफल रही थीं। दिसंबर 2024 में आयोजित एक बैठक में सिर्फ ज्योति लूणा ही उपस्थित हुई थीं, जिसके कारण अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका था।
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कुर्सी बचाने के लिए हुए कई प्रयास
ज्योति लूणा को दिसंबर 2022 में भट्टू पंचायत समिति का चेयरपर्सन बनाया गया था और 2024 में कई बार उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, लेकिन एडीसी के छुट्टी पर होने और हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के कारण वोटिंग में देरी होती रही। अंततः 22 जनवरी 2026 को दूसरी बार वोटिंग करवाई गई और इस बार पूर्व विधायक के खेमे की मजबूती के कारण ज्योति लूणा की कुर्सी चली गई।
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चेयरपर्सन को हटाने पर भाजपा में श्रेय की सियासी खींचतान तेज, भाजपा जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक के बीच बढ़ सकती हैं दूरियां
भट्टूकलां पंचायत समिति की चेयरपर्सन ज्योति लूणा के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव वीरवार को बहुमत से पारित हो गया। विधानसभा चुनावों में भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का समर्थन करने के कारण ज्योति लूणा को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा, लेकिन अब भाजपा के अंदर श्रेय लेने की सियासी खींचतान तेज हो गई है।
हाल ही में भाजपा के दो प्रमुख नेता जिलाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा और पूर्व विधायक दुड़ाराम के बीच सियासी सर्दी-गर्मी का दौर शुरू हो गया है। यह खींचतान तब और बढ़ गई जब भट्टूकलां पंचायत समिति की चेयरपर्सन के पद से ज्योति लूणा की विदाई के बाद भाजपा में इसका श्रेय लेने की होड़ लग गई। भट्टूकलां पंचायत समिति के सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अलग-अलग नेताओं से मुलाकात की और आभार जताया। प्रवीण जोड़ा और दुड़ाराम दोनों ही इस राजनीतिक मोर्चे पर अपनी हिस्सेदारी का दावा करते हुए अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इस घटनाक्रम से संबंधित पोस्ट कर रहे हैं, जिससे साफ प्रतीत हो रहा है कि वे इसे अपनी राजनीतिक जीत मानते हैं।


तीन दिन पहले ''ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे'' पर थिरके थे दोनों नेता
राजनीति में रिश्ते कब पलटी मार लें, इसका कोई भरोसा नहीं। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा और पूर्व विधायक दुड़ाराम की सियासी मित्रता भी इस समय कुछ इसी तरह की स्थिति में पहुंच गई है। कुछ समय पहले तक ऐसा लग रहा था कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान दोनों के बीच शीतयुद्ध बहुत गहरा हो चुका है, और अब सुलह की कोई उम्मीद नहीं थी। लेकिन डीएमसी के हटने के बाद दोनों नेता एक बार फिर साथ नजर आए थे। तीन दिन पहले, दुड़ाराम के जन्मदिन पर आयोजित पार्टी में दोनों नेताओं ने ''ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे'' गाने पर डांस भी किया था, और सब कुछ ठीक-ठाक नजर आ रहा था, लेकिन अब समिति के सदस्यों से अलग-अलग मुलाकातों के बाद लग रहा है कि शीतयुद्ध अभी थमा नहीं है। जिलाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा अब यह जताना चाहते हैं कि संगठन सबसे बड़ा है, जबकि पूर्व विधायक दुड़ाराम अपनी सत्ता और प्रभाव का संकेत देते हुए यह दिखाना चाहते हैं कि दुकान नंबर आठ अभी भी सत्ताओं का केंद्र है।
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