{"_id":"6172fad3b95b022bc81d0756","slug":"the-increased-price-of-gas-cylinders-removed-the-smoke-of-ujjwala-scheme-women-burning-the-stove-fatehabad-news-hsr615120335","type":"story","status":"publish","title_hn":"गैस सिलिंडर के बढ़े दाम ने निकाला उज्जवला योजना का धुआं, चूल्हा फूंक रहीं महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गैस सिलिंडर के बढ़े दाम ने निकाला उज्जवला योजना का धुआं, चूल्हा फूंक रहीं महिलाएं
विज्ञापन
गांव हसंगा में चूल्हे पर खाना बनाती महिला कृष्णा देवी।
- फोटो : Fatehabad
भूना। केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना का सिलिंडर के बढ़ते दामों के चलते दम निकलने लगा है। हालात ये है कि मुफ्त में गैस सिलिंडर पाने वाले परिवार अब फिर से चूल्हे पर धुआं फूंकने लगे हैं। बढ़ती कीमतों और सब्सिडी बंद होने के कारण ज्यादातर गरीब परिवार गैस सिलिंडर रिफिल ही नहीं करवा पा रहे हैं। भूना में करीब 5863 कनेक्शनधारक गैस सिलिंडर नहीं भरा पा रहे। ऐसे में अब भी महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे पर ही लकड़ी और उपलों से आग जलाकर खाना बनाना पड़ रहा है। गैस के दामम बढ़कर 920 रुपये प्रति सिलिंडर तक पहुंच गए है।
गौरतलब है कि करीब पांच साल पहले उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों का गैस सिलिंडर का कनेक्शन दिया गया। योजना के तहत इंडेन गैस एजेंसी भूना, गणपति भारत गैस वितरण लहरियां, सोमबीर भारत गैस ग्रामीण वितरक गोरखपुर व सत साहेब भारत गैस ग्रामीण वितरण भिरड़ाना सहित चार गैस वितरण एजेंसियों के माध्यम से 11 हजार 723 कनेक्शन दिए गए। इनमें से सिर्फ 5860 गैस सिलिंडर ही रिफिल हो रहे हैं जबकि 5863 सिलिंडर नहीं भरवाए जा रहे हैं।
2018 में सात और श्रेणियां भी जोड़ी गई थी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में वर्ष 2016 के दौरान गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिताने वाले परिवारों की महिला सदस्यों को कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था। इसके बाद अप्रैल 2018 में इस योजना का विस्तार कर इसमें सात और श्रेणियों अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, पीएमएवाई, एएवाई, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, चाय बागान, वनवासी, द्वीप समूह की महिला लाभार्थियों को भी शामिल किया गया।
विज्ञापन
धीरे-धीरे खत्म हो गई सब्सिडी
गांव हसंगा निवासी विधवा कृष्णा देवी जेवलिया ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत के दौरान सब्सिडी के रूप में लगभग 40 प्रतिशत धनराशि कनेक्शन धारक के खाते में पहुंचती थी। धीरे-धीरे यह धनराशि कम होती चली गई। वर्तमान में बैंक खाते में महज 17 रुपये ही सब्सिडी के तौर पर आ रहे हैं, जो नाकाफी हैं। योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला, उसके बाद केवल दो बार ही गैस सिलिंडर भरवा पाए हैं। बाद में कीमतें इतनी बढ़ गईं कि गैस से खाना बनाना संभव नहीं रहा।
कोट
सरकार ने निशुल्क गैस चूल्हा और सिलिंडर तो दे दिया, लेकिन गैस के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा दिए। ऐसे में गरीब परिवार गैस सिलिंडर भरवाने की सोच भी नहीं सकते हैं।
अंगेजो देवी, भूना
हर महीने घरेलू गैस के दाम बढ़ जाते हैं। पहले खाते में रुपये वापस आ जाते थे, लेकिन अब तो वह भी बंद हो गया है। मजबूरी में लकड़ी से चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ता है।
शीला देवी, भूना
कोट
गैस के दाम बढ़ने के अलावा अन्य कारणों की वजह से भी सिलिंडर रिफिल नहीं करवाए जा रहे हैं। गरीब लोग ज्यादातर गैस की जगह चूल्हे का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। यह सही है कि उज्जवला योजना के लाभार्थियों द्वारा सिलिंडर रिफिल करवाने में कमी दर्ज हो रही है।
संदीप सांगवान, जिला सहायक पूर्ति एवं डिलिंग अधिकारी
विज्ञापन
गौरतलब है कि करीब पांच साल पहले उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों का गैस सिलिंडर का कनेक्शन दिया गया। योजना के तहत इंडेन गैस एजेंसी भूना, गणपति भारत गैस वितरण लहरियां, सोमबीर भारत गैस ग्रामीण वितरक गोरखपुर व सत साहेब भारत गैस ग्रामीण वितरण भिरड़ाना सहित चार गैस वितरण एजेंसियों के माध्यम से 11 हजार 723 कनेक्शन दिए गए। इनमें से सिर्फ 5860 गैस सिलिंडर ही रिफिल हो रहे हैं जबकि 5863 सिलिंडर नहीं भरवाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
2018 में सात और श्रेणियां भी जोड़ी गई थी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में वर्ष 2016 के दौरान गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिताने वाले परिवारों की महिला सदस्यों को कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था। इसके बाद अप्रैल 2018 में इस योजना का विस्तार कर इसमें सात और श्रेणियों अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, पीएमएवाई, एएवाई, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, चाय बागान, वनवासी, द्वीप समूह की महिला लाभार्थियों को भी शामिल किया गया।
विज्ञापन
धीरे-धीरे खत्म हो गई सब्सिडी
गांव हसंगा निवासी विधवा कृष्णा देवी जेवलिया ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत के दौरान सब्सिडी के रूप में लगभग 40 प्रतिशत धनराशि कनेक्शन धारक के खाते में पहुंचती थी। धीरे-धीरे यह धनराशि कम होती चली गई। वर्तमान में बैंक खाते में महज 17 रुपये ही सब्सिडी के तौर पर आ रहे हैं, जो नाकाफी हैं। योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला, उसके बाद केवल दो बार ही गैस सिलिंडर भरवा पाए हैं। बाद में कीमतें इतनी बढ़ गईं कि गैस से खाना बनाना संभव नहीं रहा।
कोट
सरकार ने निशुल्क गैस चूल्हा और सिलिंडर तो दे दिया, लेकिन गैस के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा दिए। ऐसे में गरीब परिवार गैस सिलिंडर भरवाने की सोच भी नहीं सकते हैं।
अंगेजो देवी, भूना
हर महीने घरेलू गैस के दाम बढ़ जाते हैं। पहले खाते में रुपये वापस आ जाते थे, लेकिन अब तो वह भी बंद हो गया है। मजबूरी में लकड़ी से चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ता है।
शीला देवी, भूना
कोट
गैस के दाम बढ़ने के अलावा अन्य कारणों की वजह से भी सिलिंडर रिफिल नहीं करवाए जा रहे हैं। गरीब लोग ज्यादातर गैस की जगह चूल्हे का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। यह सही है कि उज्जवला योजना के लाभार्थियों द्वारा सिलिंडर रिफिल करवाने में कमी दर्ज हो रही है।
संदीप सांगवान, जिला सहायक पूर्ति एवं डिलिंग अधिकारी