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बच्चों को पढ़ाई व बीमार पति को देखभाल का समय न देकर कोरोना महामारी में जुटी हैं महिला डॉक्टर, जनता मदद करे ये ही सम्मान
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कोरोना महामारी को छह माह का समय हो चुका है और संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। जांच और सैंपलिंग की गुना बढ़ चुकी है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। हम इस संक्रमण से बचे रहे इसके लिए भगवान के रूप में अगर कोई काम कर रहा है तो वह डॉक्टर। इसमें महिला चिकित्सक भी किसी से पीछे नहीं है। अपने परिवार और खासकर बच्चों को समय न देकर दिनरात ड्यूटी में लगी हैं। किसी ने छह माह से छुट्टी नहीं ली तो कोई खुद की तबीयत खराब होने पर दवाई लेकर काम में जुटा है। यहां तक कि घर-घर जाकर सैंपलिंग कर रही हैं कि प्रभावित लोग संक्रमण न फैला सकें। लेकि लोग के स्पोर्ट न करने और अभद्र व्यवहार करने के बावजूद महिला चिकित्सक जुटी हुई हैं। बदौलत जिले में 45 हजार लोगों के सैंपल लिए जा चुके हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में महिला चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना महामारी में अगर उन्हें सम्मान देना चाहते हैं तो सिर्फ ये है कि जब टीम उनके घर सैंपल लेने पहुंचती है तो अभद्र व्यवहार न करें।
बच्ची को समय नहीं दे पाती लेकिन हार नहीं मानी : डॉ.नेहा
मैं होम्योपैथिक स्पेशलिस्ट हूं। कोरोना महामारी की शुरूआत के बाद ट्रेनिंग देकर फ्लू क्लीनिक में ड्यूटी लगाई गई। पिछले छह माह से फ्लू क्लीनिक में डयूटी कर रही हूं। ड्यूटी कभी सुबह तो कभी शाम को होती है। शाम को अचानक ज्यादा मरीज आने पर देर तक ड्यूटी करनी पड़ती है। घर में सास-ससुर, पति व छह साल की बच्ची है। यहां पर ड्यूटी लगने के कारण बच्ची को समय नहीं दे पा रही हूं। यहां तक कि उसे पढ़ाने तक का समय नहीं दे पाती। क्यों कि ड्यूटी जरूरी है। खुद सुरक्षा को लेकर उपाय कर रही हूं लेकिन डर रहता है। पति कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। खुद भी आइसोलेट रही। लेकिन कभी हार नहीं मानी है। फ्लू क्लीनिक में परिवार के सदस्यों की तरह जुटे हुए हैं। - डॉ.नेहा, फ्लू क्लीनिक फतेहाबाद।
परिवार छोड़कर सैंपल के लिए डोर टू डोर जा रहे लेकिन लोग मदद नहीं कर रहे : डॉ. सविन
मैं आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर के पद पर हूं। मार्च माह से ड्यूटी फ्लू क्लीनिक में लगी है। घर पर सात साल की बेटी है और पति है। पति की तबीयत ठीक नहीं रहती और बेटी को पढ़ाई का समय नहीं दे पाती ूं लेकिन बावजूद इसके कोरोना महामारी में जुटे हुए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा सैंपलिंग की जा सके। लेकिन लोग मदद नहीं कर रहे हैं, सैंपलिंग के दौरान अभद्र व्यवहार करते हैं लेकिन हमारा मनोबल कम नहीं हुआ है। संक्रमित केस मिलने पर हम उनके संपर्क में आए लोगों के घर में सैंपल लेने के लिए जाते हैं। गेट के बाहर खड़े होकर डोर बेल बजाते रहते हैं लेकिन 10 में से 8 परिवार गेट ही नहीं खोलते हैं। यहां तक कि वह बाजार में घूम रहे होते हैं। हालात यहां तक हैं कि फ्लू क्लीनिक में लगी महिला चिकित्सकों ने परिवार में दिक्कतें होने के बावजूद छुट्टी तक नहीं ली है। मानसिक तनाव के साथ-साथ कई बार शरीर भी टूटने लगता है लेकिन हमेशा दवाई खाकर मन को समझाकर फिर काम में जुट जाते हैं। लोगों से अपील है कि वह टीम के साथ अभद्र व्यवहार न करें बल्कि मदद करें ये ही उनके लिए सम्मान है। - डॉ.सविन, फ्लू क्लीनिक।
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बच्ची को समय नहीं दे पाती लेकिन हार नहीं मानी : डॉ.नेहा
मैं होम्योपैथिक स्पेशलिस्ट हूं। कोरोना महामारी की शुरूआत के बाद ट्रेनिंग देकर फ्लू क्लीनिक में ड्यूटी लगाई गई। पिछले छह माह से फ्लू क्लीनिक में डयूटी कर रही हूं। ड्यूटी कभी सुबह तो कभी शाम को होती है। शाम को अचानक ज्यादा मरीज आने पर देर तक ड्यूटी करनी पड़ती है। घर में सास-ससुर, पति व छह साल की बच्ची है। यहां पर ड्यूटी लगने के कारण बच्ची को समय नहीं दे पा रही हूं। यहां तक कि उसे पढ़ाने तक का समय नहीं दे पाती। क्यों कि ड्यूटी जरूरी है। खुद सुरक्षा को लेकर उपाय कर रही हूं लेकिन डर रहता है। पति कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। खुद भी आइसोलेट रही। लेकिन कभी हार नहीं मानी है। फ्लू क्लीनिक में परिवार के सदस्यों की तरह जुटे हुए हैं। - डॉ.नेहा, फ्लू क्लीनिक फतेहाबाद।
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परिवार छोड़कर सैंपल के लिए डोर टू डोर जा रहे लेकिन लोग मदद नहीं कर रहे : डॉ. सविन
मैं आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर के पद पर हूं। मार्च माह से ड्यूटी फ्लू क्लीनिक में लगी है। घर पर सात साल की बेटी है और पति है। पति की तबीयत ठीक नहीं रहती और बेटी को पढ़ाई का समय नहीं दे पाती ूं लेकिन बावजूद इसके कोरोना महामारी में जुटे हुए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा सैंपलिंग की जा सके। लेकिन लोग मदद नहीं कर रहे हैं, सैंपलिंग के दौरान अभद्र व्यवहार करते हैं लेकिन हमारा मनोबल कम नहीं हुआ है। संक्रमित केस मिलने पर हम उनके संपर्क में आए लोगों के घर में सैंपल लेने के लिए जाते हैं। गेट के बाहर खड़े होकर डोर बेल बजाते रहते हैं लेकिन 10 में से 8 परिवार गेट ही नहीं खोलते हैं। यहां तक कि वह बाजार में घूम रहे होते हैं। हालात यहां तक हैं कि फ्लू क्लीनिक में लगी महिला चिकित्सकों ने परिवार में दिक्कतें होने के बावजूद छुट्टी तक नहीं ली है। मानसिक तनाव के साथ-साथ कई बार शरीर भी टूटने लगता है लेकिन हमेशा दवाई खाकर मन को समझाकर फिर काम में जुट जाते हैं। लोगों से अपील है कि वह टीम के साथ अभद्र व्यवहार न करें बल्कि मदद करें ये ही उनके लिए सम्मान है। - डॉ.सविन, फ्लू क्लीनिक।
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