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रूस-यूक्रेन युद्ध: जान बचाकर आई तो अब यही चिंता, डिग्री नहीं मिली तो टूट जाएगा डॉक्टर बनने का सपना

Thu, 03 Mar 2022 11:59 PM IST
भूपेंद्र सिंह विकास छिंपा, संवाद न्यूज एजेंसी, भूना, फतेहाबाद (हरियाणा)
विकास छिंपा, संवाद न्यूज एजेंसी, भूना, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 03 Mar 2022 11:59 PM IST
सार

भूना के किसान ने दो एकड़ जमीन बेचकर अपनी बेटी को यूक्रेन पढ़ने भेजा था। अब चिंता सता रही है कि बेटी बनने के सपने का क्या होगा। 

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The girl student who returned from Ukraine to Fatehabad is now worried about the future
अपनी बेटी प्रियाजोत के साथ किसान गुरदीप सिंह। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भूना के किसान गुरदीप सिंह की बेटी प्रियाजोत ने डॉक्टर बनने का सपना देखा। नवंबर 2020 में किसान पिता ने बेटी का सपना पूरा करने के लिए दो एकड़ जमीन बेचकर उसे यूक्रेन भेज दिया। रूस से जंग के कारण यूक्रेन में तबाही मची हुई है। बेटी तो सकुशल घर लौट आई है, लेकिन अब उसके भविष्य की चिंता परिजनों को सताने लगी है। 

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भूना के मध्यम वर्ग के किसान गुरदीप अब तक बेटी की मेडिकल की पढ़ाई पर करीब 20 लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं। अगर यूक्रेन की पढ़ाई का आधार समाप्त होता है तो किसान की बेटी के सपने अधूरे रह जाएंगे और किसान का जमीन बेचने का मकसद भी पूरा नहीं हो पाएगा। गुरदीप सिंह कहते हैं कि अगर यूक्रेन में हालात सही नहीं हुए तो उन्हें जीवन भर मलाल रहेगा कि जमीन बेचने के बावजूद वह बेटी को डॉक्टर नहीं बना पाए।
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भारत में मेडिकल की पढ़ाई महंगी, इसलिए यूक्रेन का चुना विकल्प
किसान गुरदीप सिंह बताते हैं कि बेटी प्रियाजोत ने बारहवीं की पढ़ाई मेडिकल संकाय से की थी। 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसने डॉक्टर बनकर सेवा करने का सपना संजोया। उसके परिवार में चर्चा की। भारत में मेडिकल की पढ़ाई निजी कॉलेजों में बेहद महंगी है, उतना पैसा परिवार के पास नहीं था। इसलिए बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए यूक्रेन भेजने का विचार बनाया।
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गुरदीप सिंह की वृद्ध माता इंद्रकौर व पत्नी गुरमीत कौर ने भी मनोबल बढ़ाया। किसान ने दो एकड़ जमीन बेचकर बेटी को यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी। बेटी प्रियाजोत का पासपोर्ट बनवाया और वीजा लगने के बाद यूक्रेन भेज दिया। बेटी प्रियाजोत लवीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी यूक्रेन में द्वितीय वर्ष की छात्रा है।

नवंबर 2020 को प्रियाजोत ने यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा पास करके वह जुलाई में वापस आ गई थी। मगर द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा को लेकर वह अगस्त 2021 में फिर यूक्रेन चली गई थी। जिसे परीक्षा देने के बाद जुलाई में आना था। मगर अब यूक्रेन व रूस के बीच युद्ध होने के कारण प्रियाजोत को बीच में ही घर लौटना पड़ा।


भारत में ही विकल्प देने की मांग
विद्यार्थियों व उनके परिजनों ने केंद्र सरकार से यूक्रेन से लौट रहे मेडिकल विद्यार्थियों के लिए देश में ही आगे की पढ़ाई पूरी करने का विकल्प देने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि अगर सरकार ऐसी सुविधा देती है, तो उनके बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होगा।

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