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लोगों में जागरूकता आने से मलेरिया मुक्त हो रहा जिला, सावधानी अभी भी जरूरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 24 Apr 2022 10:33 PM IST
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The district is becoming malaria-free due to awareness among the people, caution is still necessary
नगर परिषद कार्यालय में रखी फॉगिंग मशीन। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। मलेरिया का वर्ष 2017 से पहले जिले में प्रकोप था। पांच साल पहले जांच में हर 10वां मरीज मलेरिया से पीड़ित मिल रहा था। लेकिन अब लोगों में जागरूकता आने से जिला मलेरिया मुक्त होने की ओर अग्रसर है। जिले में वर्ष 2020 में कोई भी मलेरिया पीड़ित मरीज नहीं मिला, वर्ष 2021 में मलेरिया का सिर्फ एक मरीज मिला है। वहीं इस वर्ष अब तक कोई भी मलेरिया का केस नहीं मिला है।
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बता दें कि वर्ष 2013 में जिले में मलेरिया के 992 केस मिले थे, जो कि अपने आप में रिकॉर्ड था। लेकिन मलेरिया को लेकर अब हालात बदल चुके हैं। अब पिछले पांच सालों में मलेरिया के कुल ही 8 मरीज मिले हैं। वर्ष 2021 जिले में एक मरीज मिला था जबकि वर्ष 2020 में जिले में कोई भी मरीज नहीं मिला था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मानते हैं कि लोगों में मलेरिया को लेकर जागरूकता आई है और खुद को इस बीमारी से बचा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मलेरिया को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। इसके प्रति उतना ही जागरूक रहने की जरूरत है जितना हम पहले थे। ये मच्छर रात के समय काटता है, ऐसे में अपने आप को मच्छरों से बचाना ही बचाव का रास्ता है।
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वर्ष मलेरिया केस मिले
2013 992
2014 368
2015 107
2016 59
2017 42
2018 2
2019 5
2020 0
2021 1
2022 0
ये हैं मलेरिया बीमारी फैलने के कारण
मलेरिया बुखार मादा एनाफिलिस नामक मच्छर के काटने से फैलता है। मलेरिया का मच्छर रुके हुए गंदे पानी में पनपता है और यह रात के समय काटता है।
मलेरिया बुखार के लक्षण
ठंड लगना, कंपकंपी, सिर दर्द, उल्टी एवं चक्कर आना, तेज बुखार एवं अत्याधिक पसीने के साथ बुखार का कम होना, जी मचलाना आदि मलेरिया बुखार के लक्षण हैं। ये लक्षण दिखने पर जांच जरूर करवाएं।
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बीमारी से खुद को ऐसे बचाएं
रात को पूरी बाजू के कपड़े पहनकर सोना चाहिए।
रात के समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
अपने घरों के दरवाजे व खिड़कियों पर जाली लगवाएं।
पानी के सभी बर्तन, टंकी आदि को ढक कर रखें।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पानी से भरे गड्ढों में मिट्टी भर दें।
टायरों को बिखरे पड़े न रहन दें, बिखरें टायरों में पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं।
स्वास्थ्य विभाग पहले खुद करता था फॉगिंग, नगर निकाय, पंचायत नहीं दिखा रहे रुचि
मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग पहले खुद फॉगिंग करता था। लेकिन फॉगिंग का जिम्मा अब पंचायत और नगर निकाय के पास है। नगर निकाय के पास हालात ये है कि फॉगिंग मशीनें नहीं हैं और अगर हैं तो सही काम नहीं कर रही है। अधिकारी भी इसको लेकर रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पंचायतों में भी ये ही हालात है, मुश्किल से करीब 10 फीसदी पंचायतों के पास ही फॉगिंग मशीनें हैं।

कोट
मलेरिया के केसों में पिछले चार से पांच सालों में कमी आई है। लेकिन इसको लेकर सावधानी बरतनी जरूरी है। मलेरिया को लेकर अगर कोई भी लक्षण हैं तो स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करवाएं और स्लाइड बनवाएं। यहां पर जांच निशुल्क है। अगर मलेरिया की पुष्टि होती है तो दो सप्ताह तक उपचार लें। उपचार पूरा लेना चाहिए, अधूरे उपचार से दोबारा वायरस सक्रिय हो सकता है। लोग अपने घर व आसपास की सफाई रखें।
-डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी अधिकारी
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