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स्वामी श्रद्धानंद ने वैदिक ज्ञान को जन-जन तक फैलाया : चंदन शास्त्री
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फतेहाबाद। आर्य समाज फतेहाबाद की ओर से आर्य संन्यासी व गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती का बलिदान दिवस सुंदर नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में मनाया गया। इस अवसर पर आर्य समाज के पुरोहित पंडित दीपक शास्त्री ने वैदिक मंत्रों से हवन यज्ञ करवाया।
इस अवसर पर दयानंद ब्रह्म महाविद्यालय हिसार के शिक्षक चंदन शास्त्री ने स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के जीवन के बारे में विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने सामाजिक कुरीतियों का विरोध कर वैदिक ज्ञान को जन-जन तक फैलाने का काम किया।
वे एक निर्भीक संन्यासी थे, जिन्होंने अछूतोद्वार, दलितोद्धार व शुद्धि आंदोलन चलाकर आर्य समाज को नई दिशा दी। स्वामी श्रद्धानंद दयानंद सरस्वती की मान्यतानुसार वैदिक शिक्षा के लिए गुरुकुल कांगड़ी, गुरुकुल कुरुक्षेत्र और गुरुकुल इंद्रप्रस्थ की स्थापना करके वैदिक ज्ञान को जन-जन तक फैलाने का कार्य किया। चंदन शास्त्री ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों का जमकर विरोध किया और लोगों को इन सामाजिक कुरीतियों से बचने के लिए प्रेरित किया।
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इस दौरान पूर्व प्रधान बुधराम आर्य, बंसीलाल आर्य, आर्य समाज के प्रधान अरुण ग्रोवर, सचिव डॉ. राजवीर शास्त्री, राजेश मेहता, सतीश चौधरी, विजय निर्मोही, रोशन लाल गोदारा, नंदलाल आर्य, धर्मवीर मदान आदि मौजूद रहे।
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इस अवसर पर दयानंद ब्रह्म महाविद्यालय हिसार के शिक्षक चंदन शास्त्री ने स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के जीवन के बारे में विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने सामाजिक कुरीतियों का विरोध कर वैदिक ज्ञान को जन-जन तक फैलाने का काम किया।
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वे एक निर्भीक संन्यासी थे, जिन्होंने अछूतोद्वार, दलितोद्धार व शुद्धि आंदोलन चलाकर आर्य समाज को नई दिशा दी। स्वामी श्रद्धानंद दयानंद सरस्वती की मान्यतानुसार वैदिक शिक्षा के लिए गुरुकुल कांगड़ी, गुरुकुल कुरुक्षेत्र और गुरुकुल इंद्रप्रस्थ की स्थापना करके वैदिक ज्ञान को जन-जन तक फैलाने का कार्य किया। चंदन शास्त्री ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों का जमकर विरोध किया और लोगों को इन सामाजिक कुरीतियों से बचने के लिए प्रेरित किया।
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इस दौरान पूर्व प्रधान बुधराम आर्य, बंसीलाल आर्य, आर्य समाज के प्रधान अरुण ग्रोवर, सचिव डॉ. राजवीर शास्त्री, राजेश मेहता, सतीश चौधरी, विजय निर्मोही, रोशन लाल गोदारा, नंदलाल आर्य, धर्मवीर मदान आदि मौजूद रहे।