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पराली समस्या : 14 सरपंचों को नोटिस जारी, लटकी निलंबन की तलवार

Wed, 06 Nov 2019 11:15 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 06 Nov 2019 11:15 PM IST
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straw problem, notice issued to 14 sarpanches, parali, pollution, fatehabad
लघु सचिवालय के सभागार में पत्रकारवार्ता को संबोधित करते उपायुक्त धीरेन्द्र खडग़टा, साथ है पुलिस - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। जिला उपायुक्त धीरेन्द्र खड़गटा ने बताया कि जिले के विभिन्न गांवों में धान की पराली में आग लगाई गई और ऐसी घटनाओं को रोकने में सहयोग न देने वाले सरपंचों व नंबरदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। गांव साधनवास, जमालपुर शेखां, शक्करपुरा, कन्हड़ी, लाम्बा, बबनपुर, कुदनी, तलवाड़ा, अलीका, पिरथला, हुकमावाली, ललौदा, हड़ोली तथा कलोठा गांव के सरपंचों को नोटिस जारी किया गया है।
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इसी प्रकार से गांव जमालपुर शेखा के तीन नंबरदार, टोहाना के तीन नंबरदार, साधनवास के तीन नंबरदार तथा भूना के 14 नंबरदारों को भी नोटिस जारी किया गया है। इन गांवों में विभिन्न स्थानों पर आगजनी की घटना हुईं। सरपंचों व नंबरदारों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया इसलिए नोटिस जारी किए गए। वे बुधवार को लघु सचिवालय के सभागार में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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इस अवसर पर उपायुक्त ने बताया कि जिला में पराली जलाए जाने की घटनाओं में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले वर्ष 1312 पराली जलाने की घटनाएं घटित हुई थी, जो इस वर्ष अब तक 625 है। उन्होंने बताया कि जिला के किसानों ने सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सहायता और संसाधनों का इस्तेमाल कर पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाया है। उन्होंने बताया कि जिला में हरसैक से मिली 895 स्थानों की रिपोर्ट में से 270 स्थान गलत पाए गए। सही पाए गए स्थानों वाले किसानों पर 190 एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा मुकदमे दर्ज करने की प्रक्रिया लगतार जारी है। उपायुक्त ने बताया कि ऐसे गांवों के 14 सरपंचों को नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया गया है कि उन्होंने अपने गांव में पराली जलाने की सूचना प्रशासन को उपलब्ध क्यों नहीं करवाई। 24 नवंबरदारों को भी नोटिस जारी जवाब लिया गया है। दो दिन में अगर इनका जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो इन पर निलंबन की कार्रवाई भी की जाएगी।
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57 गांव ऐसे भी, जहां पराली जलाने की एक भी घटना नहीं, मिलेंगे 20 लाख
उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने बताया कि जिला के 57 ऐसे गांव हैं, जहां पर एक भी पराली जलाने की घटना नहीं घटी है। उपायुक्त ने कहा कि ऐसे गांव जहां 50 प्रतिशत से अधिक धान का रकबा है और वहां पर पराली जलाने की एक भी घटना घटित नहीं हुई है, तो ऐसे गांवों को 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायत डी-प्लान के माध्यम से दी जाएगी। इस राशि से ग्राम पंचायत पराली प्रबंधन के लिए शेड निर्माण या पराली प्रबंधन मशीनों/उपकरणों के रखरखाव के लिए शेड बनवा सकती है।
फिलहाल 15 बेलर जुटे पराली प्रबंधन में, सौ का प्रशासन ने रखा लक्ष्य
उपायुक्त ने बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन बारे अनेक गोष्ठियां व सेमिनार आयोजित कर जागरूक किया गया है। जिला में पराली प्रबंधन के लिए 15 बेलर सब्सिडी रेट पर कार्य कर रहे हैं। अभी 100 बेलर का लक्ष्य रखते हुए 5 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन मांग गए हैं, जिनमें 223 इच्छुक किसानों ने आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इन किसानों को सरकार की ओर से अनुदान राशि प्रदान करते हुए कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। उपायुक्त ने बताया कि जिला में आगजनी की घटनाओं पर नजर रखने के लिए 30 टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें लगातार फील्ड में निगरानी कर रही है और लोगों को समझाने के साथ-साथ उन पर सख्त कार्रवाई भी कर रहे हैं। 30 टीमों की रिपोर्ट के लिए 3 नाइट टीम भी बनाई गई है, जो उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्यवाही कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आगजनी की घटना होने पर 47 स्थानों पर फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने का काम भी किया है।

डीएसपी की अगुवाई में स्पेशल एक्शन गु्रप गठित, सीआईए-स्पेशल स्टाफ रहेगा शामिल
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक विजय प्रताप सिंह ने बताया कि पराली न जलाने तथा आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के लिए डीएसपी की देखरेख में एक्शन ग्रुप बनाया गया है। सीआईए स्टाफ सहित रतिया व टोहाना में भी स्पेशल स्टाफ नियुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि चौकी इंचार्ज और संबंधित क्षेत्र के ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारी भी आगजनी की घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि डीजीपी के आदेशों की पालना में पुलिस विभाग के अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा संबंधित अधिकारियों के साथ जहां धान की कटाई हो चुकी है, वहां का भी निरीक्षण किया जाएगा। पत्रकारवार्ता में नगराधीश नवीन कुमार, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ बलवंत सहारण सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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