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संत गोपालदास के फोन के बाद अनशन जारी रखने की बनी रणनीति, अब सीएम दरबार में पहुंचेगा मसला
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Strategy to continue the fast after the call of sant gopal dass
- फोटो : Fatehabad
शहर में नशे के खिलाफ 20 दिन से अनशन पर बैठे प्रवीन काशी का मसला अब सीएम दरबार में पहुंचेगा। पहले ये माना जा रहा था कि पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद बुधवार को ये अनशन समाप्त कर दिया जाएगा लेकिन संत गोपालदास के फोन के बाद सारी परिस्थितियां बदल गई और अब अनशन बदस्तूर जारी रखने का फैसला कर लिया है।
मंगलवार तक प्रशासन के नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई के आश्वासन व तीन नशा मुक्ति केंद्रों के आश्वासन पर अनशनकारी प्रवीन काशी व प्रशासन के बीच सहमति लगभग बन गई थी। यहां तक की ड्यूटी पर तैनात खुफिया विभाग के कर्मचारियों तक को सूचित कर दिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार शहीद सुखदेव के नाती विशाल नैयर इस मामले में सीएम के राजनीतिक सचिव दीपक मंगला के संपर्क में थे और उनके समझाने के बाद ही अनशन खत्म करने पर सहमति बनी थी। वहीं पुलिसिया कार्रवाई ने सारी स्थिति बदल दी। उधर मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की। इस बीच संत गोपालदास को मामले की जानकारी मिलते ही उन्होंने काशी से फोन पर बात की और इन परिस्थितियों में अनशन न तोड़ने की सलाह दी।
उधर चूंकि एसपी विजय प्रताप सिंह विभाग की किसी बैठक के लिए चंडीगढ़ गए हुए हैं ऐसे में उनके पीछे जबरन धरना उठाने वाले एसएचओ सुरेंद्र कंबोज के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई के सवाल पर डीसी धीरेंद्र खड़गटा पीछे हट गए हैं। उन्होंने अनशनकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि ये पुलिस कप्तान का मामला है और इस पर वो कोई बात नहीं करेंगे। इस पर फैसला पुलिस कप्तान ही लेंगे।
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मंगलवार रात इस तरह हुआ घटनाक्रम
‘मैं रात को सोया हुआ था, एक बजे के करीब शहर थानाध्यक्ष अपने पूरे दल-बल के साथ पहुंचे और मुझे कहते कि आपकी तबियत बहुत खराब है, आपको अस्पताल दाखिल करवाना है। मैने उनसे पूछा कि मेरी तबियत खराब है, ये आपको कैसे मालूम है तो उन्होंने 21 जुलाई की तारीख का एक सरकारी पत्र दिखाया। जब उनसे दोबारा पूछा कि कोई चिकित्सक साथ हैं तो उन्होंने एक शख्स की ओर इशारा कर दिया जिसके पास मेरी जांच के लिए बुनियादी उपकरण तक नहीं थे। इसके बाद मेरे और मेरे साथियों के मोबाइल फोन ले लिए और अस्पताल में मरीजों के बीच एक खाली बेड पर लिटा दिया। इसके बाद मुझे एक घंटे तक पानी तक नहीं दिया गया। सुबह साढ़े नौ बजे तक जब कोई उपचार शुरू नहीं किया और महज बीपी चेक किया गया तो मैं लौट आया।’
जैसा अनशनकारी प्रवीन काशी ने ‘अमर उजाला’ को बताया।
प्रशासन का पक्ष जानने के लिए डीसी धीरेंद्र खड़गटा को दो बार फोन किया गया, लेकिन उन्होने फोन नहीं उठाया।
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मंगलवार तक प्रशासन के नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई के आश्वासन व तीन नशा मुक्ति केंद्रों के आश्वासन पर अनशनकारी प्रवीन काशी व प्रशासन के बीच सहमति लगभग बन गई थी। यहां तक की ड्यूटी पर तैनात खुफिया विभाग के कर्मचारियों तक को सूचित कर दिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार शहीद सुखदेव के नाती विशाल नैयर इस मामले में सीएम के राजनीतिक सचिव दीपक मंगला के संपर्क में थे और उनके समझाने के बाद ही अनशन खत्म करने पर सहमति बनी थी। वहीं पुलिसिया कार्रवाई ने सारी स्थिति बदल दी। उधर मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की। इस बीच संत गोपालदास को मामले की जानकारी मिलते ही उन्होंने काशी से फोन पर बात की और इन परिस्थितियों में अनशन न तोड़ने की सलाह दी।
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उधर चूंकि एसपी विजय प्रताप सिंह विभाग की किसी बैठक के लिए चंडीगढ़ गए हुए हैं ऐसे में उनके पीछे जबरन धरना उठाने वाले एसएचओ सुरेंद्र कंबोज के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई के सवाल पर डीसी धीरेंद्र खड़गटा पीछे हट गए हैं। उन्होंने अनशनकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि ये पुलिस कप्तान का मामला है और इस पर वो कोई बात नहीं करेंगे। इस पर फैसला पुलिस कप्तान ही लेंगे।
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मंगलवार रात इस तरह हुआ घटनाक्रम
‘मैं रात को सोया हुआ था, एक बजे के करीब शहर थानाध्यक्ष अपने पूरे दल-बल के साथ पहुंचे और मुझे कहते कि आपकी तबियत बहुत खराब है, आपको अस्पताल दाखिल करवाना है। मैने उनसे पूछा कि मेरी तबियत खराब है, ये आपको कैसे मालूम है तो उन्होंने 21 जुलाई की तारीख का एक सरकारी पत्र दिखाया। जब उनसे दोबारा पूछा कि कोई चिकित्सक साथ हैं तो उन्होंने एक शख्स की ओर इशारा कर दिया जिसके पास मेरी जांच के लिए बुनियादी उपकरण तक नहीं थे। इसके बाद मेरे और मेरे साथियों के मोबाइल फोन ले लिए और अस्पताल में मरीजों के बीच एक खाली बेड पर लिटा दिया। इसके बाद मुझे एक घंटे तक पानी तक नहीं दिया गया। सुबह साढ़े नौ बजे तक जब कोई उपचार शुरू नहीं किया और महज बीपी चेक किया गया तो मैं लौट आया।’
जैसा अनशनकारी प्रवीन काशी ने ‘अमर उजाला’ को बताया।
प्रशासन का पक्ष जानने के लिए डीसी धीरेंद्र खड़गटा को दो बार फोन किया गया, लेकिन उन्होने फोन नहीं उठाया।