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प्रतिमा की रहेगी सुरक्षा, गांव बुवान के दोनों पक्षों के 23 लोगों पर एफआईआर दर्ज
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टोहाना में भूख हड़ताल पर बैठे प्रताप खोबड़ा को जूस पिलाते समाज के लोग।
- फोटो : Fatehabad
गांव बुवान के पंचायत घर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगाने के बाद उपजे विवाद के मामले में पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों के 23 लोगों पर केस दर्ज कर लिया है। हालांकि, शांति बहाली की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही पुलिस फोर्स वापस लौटने लगी है। अभी कुछ दिन के लिए प्रतिमा की सुरक्षा में पुलिसकर्मी व रेपिड एक्शन फोर्स की एक कंपनी तैनात रहेगी। प्रतिमा का पांच लेयर की सुरक्षा में रखा गया है। बुधवार को गलियों में चहल-पहल शुरू हो गई। अर्धसैनिक बल एवं पुलिसकर्मियों को जलघर एवं स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। गांव की तमाम गलियों में नाकेबंदी को पूर्ण रूप से हटा लिया गया है।
डीएसपी गीतिका जाखड़ व अजायब सिंह की देखरेख में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी जारी है। टोहाना, फतेहाबाद तथा रतिया के पुलिसकर्मियों को गांव बुवान से वापस अपने कार्य स्थल पर भेज दिया गया है। सीआरपीएफ व आरएएफ की कंपनियों को जलघर तथा सरकारी स्कूल में ठहराया हुआ है। पिछले आठ दिनों से गांव बुवान में बनी हुई तनावपूर्ण स्थिति में बुधवार को काफी सुधार देखने को मिला। गांव की गलियों व बस स्टैंड पर हर समुदाय के लोग एवं बच्चे इधर-उधर टहलते हुए दिखाई दिए। 16 अगस्त से बुवान में प्रतिमा विवाद को लेकर विकट परिस्थितियां बनी हुई थी।
प्रतिमा लगाने वाले पक्ष की यह रही शिकायत
पुलिस को दी शिकायत में गांववासी महेंद्र सिंह ने बताया है कि गांव में पंचायत घर अनुसूचित जाति के घरों के बीच में बना हुआ है। वहां कई सालों से कूड़ा डाला जाता है। अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने 15 अगस्त को संविधान निर्माता डॉ.भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगाई थी। मगर कुछ लोगों ने इसका जातीय रंजिश के कारण विरोध किया। जातिसूचक शब्दों का प्रयोग भी करते थे। संविधान निर्माता की मूर्ति को खंडित करने का प्रयास किया गया। उपरोक्त लोग गांव बुवान में जातीय दंगा फसाद करवाना चाहते है। पुलिस ने शिकायत के बाद बुवान निवासी पवन कुमार, हीरालाल सरपंच, बलदेव प्रधान, दलबीर सिंह यादव, धर्मा शर्मा, इंद्र यादव (खंडू), इंद्राज यादव, अनिल मैहला, दीपक कंबोज, अनिल यादव, त्रिलोचन सिंह सहित 11 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153भन,504,511 आईपीसी 3(1)आर एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है।
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दूसरे पक्ष से बीडीपीओ की शिकायत पर केस दर्ज
दूसरी तरफ बीडीपीओ विनय प्रताप द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया है कि बुवान में पंचायत भूमि पर कब्जे करने की नीयत से रात के समय में अवैध निर्माण करके मूर्ति लगाने व शेड लगाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। पंचायत घर में आंगनबाड़ी केंद्र व पंचायत कार्य होते हैं। गांव का माहौल खराब करने के लिए करतार सिंह, मदनलाल, बलदेव, अंकुश, नीरज, इंद्र, बलविंदर, छिंदा, बलवंत, सतीश, संदीप व सुनील तथा कुछ अन्य लोग शामिल थे। पुलिस ने बीडीपीओ की शिकायत पर 12 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 447, 34 तहत केस दर्ज किया गया है।
कोट
गांव बुवान के मामले में दोनों पक्षों के लोगों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अब आगे की छानबीन की जाएगी।
अजायब सिंह, डीएसपी।
उधर, टोहाना में दूसरे दिन भी चला धरना, देर शाम को उठाया
टोहाना। गांव बुवान में प्रतिमा लगाने पक्ष के लोगों ने लघु सचिवालय के बाहर दूसरे दिन भी धरना जारी रखा। दूसरे दिन भी भीम आर्मी के जिला महासचिव प्रताप खोबडा ने अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल की। वह प्रशासन द्वारा मानी गई मांगों को लेकर लिखित में आश्वासन देने की मांग कर रहे थे। वहीं प्रतिमा की तरफ पत्थर व गोबर फेंकने के आरोप लगाते हुए दोषियों पर केस दर्ज करने की भी मांग की। बाद में तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर उन्हें प्रशासन द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर की लिखित कॉपी दिखाई गई। तब जाकर धरना उठाया गया।
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डीएसपी गीतिका जाखड़ व अजायब सिंह की देखरेख में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी जारी है। टोहाना, फतेहाबाद तथा रतिया के पुलिसकर्मियों को गांव बुवान से वापस अपने कार्य स्थल पर भेज दिया गया है। सीआरपीएफ व आरएएफ की कंपनियों को जलघर तथा सरकारी स्कूल में ठहराया हुआ है। पिछले आठ दिनों से गांव बुवान में बनी हुई तनावपूर्ण स्थिति में बुधवार को काफी सुधार देखने को मिला। गांव की गलियों व बस स्टैंड पर हर समुदाय के लोग एवं बच्चे इधर-उधर टहलते हुए दिखाई दिए। 16 अगस्त से बुवान में प्रतिमा विवाद को लेकर विकट परिस्थितियां बनी हुई थी।
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प्रतिमा लगाने वाले पक्ष की यह रही शिकायत
पुलिस को दी शिकायत में गांववासी महेंद्र सिंह ने बताया है कि गांव में पंचायत घर अनुसूचित जाति के घरों के बीच में बना हुआ है। वहां कई सालों से कूड़ा डाला जाता है। अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने 15 अगस्त को संविधान निर्माता डॉ.भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगाई थी। मगर कुछ लोगों ने इसका जातीय रंजिश के कारण विरोध किया। जातिसूचक शब्दों का प्रयोग भी करते थे। संविधान निर्माता की मूर्ति को खंडित करने का प्रयास किया गया। उपरोक्त लोग गांव बुवान में जातीय दंगा फसाद करवाना चाहते है। पुलिस ने शिकायत के बाद बुवान निवासी पवन कुमार, हीरालाल सरपंच, बलदेव प्रधान, दलबीर सिंह यादव, धर्मा शर्मा, इंद्र यादव (खंडू), इंद्राज यादव, अनिल मैहला, दीपक कंबोज, अनिल यादव, त्रिलोचन सिंह सहित 11 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153भन,504,511 आईपीसी 3(1)आर एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है।
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दूसरे पक्ष से बीडीपीओ की शिकायत पर केस दर्ज
दूसरी तरफ बीडीपीओ विनय प्रताप द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया है कि बुवान में पंचायत भूमि पर कब्जे करने की नीयत से रात के समय में अवैध निर्माण करके मूर्ति लगाने व शेड लगाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। पंचायत घर में आंगनबाड़ी केंद्र व पंचायत कार्य होते हैं। गांव का माहौल खराब करने के लिए करतार सिंह, मदनलाल, बलदेव, अंकुश, नीरज, इंद्र, बलविंदर, छिंदा, बलवंत, सतीश, संदीप व सुनील तथा कुछ अन्य लोग शामिल थे। पुलिस ने बीडीपीओ की शिकायत पर 12 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 447, 34 तहत केस दर्ज किया गया है।
कोट
गांव बुवान के मामले में दोनों पक्षों के लोगों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अब आगे की छानबीन की जाएगी।
अजायब सिंह, डीएसपी।
उधर, टोहाना में दूसरे दिन भी चला धरना, देर शाम को उठाया
टोहाना। गांव बुवान में प्रतिमा लगाने पक्ष के लोगों ने लघु सचिवालय के बाहर दूसरे दिन भी धरना जारी रखा। दूसरे दिन भी भीम आर्मी के जिला महासचिव प्रताप खोबडा ने अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल की। वह प्रशासन द्वारा मानी गई मांगों को लेकर लिखित में आश्वासन देने की मांग कर रहे थे। वहीं प्रतिमा की तरफ पत्थर व गोबर फेंकने के आरोप लगाते हुए दोषियों पर केस दर्ज करने की भी मांग की। बाद में तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर उन्हें प्रशासन द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर की लिखित कॉपी दिखाई गई। तब जाकर धरना उठाया गया।

गांव बुवान में प्रतिमा की सुरक्षा में तैनात आरएएफ के जवान।- फोटो : Fatehabad