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सराहनीय पहल : ललौदा के शिक्षित-युवा सरपंच की नई सोच से पानी की बर्बादी पर लगी रोक

Tue, 05 Jul 2016 01:05 AM IST
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fatehabad Updated Tue, 05 Jul 2016 01:05 AM IST
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रिचार्जिंग बोर चालू करवाकर बर्बाद होने वाले पानी को कर रहे जमींदोज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

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युवा और शिक्षित सरपंचों ने नई सोच और आधुनिक तकनीक के सहारे गांव को विकास के नए मार्ग पर ले जाने के लिए काम करना शुरू कर दिया है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया है ललौदा गांव के नवनिर्वाचित सरपंच बलविंद्र सिंह ने। इन्होंने नई सोच का परिचय देते हुए गांव के तालाब के पास रिचार्जिंग बोर शुरू करवाया है, जो न केवल भूमिगत जलस्तर में सुधार कर रहा है बल्कि पानी की बर्बादी को रोकने में भी कारगर है। सरकार द्वारा इसे डार्क जोन एरिया घोषित किया गया है। इससे अब इस क्षेत्र में ट्यूबवेल लगाने के लिए भी सरकार और प्रशासन से मंजूरी लेनी पड़ती है, जो लंबी और मुश्किल प्रक्रिया है।


    सरपंच बलविंद्र सिंह को पता चला कि 10-12 साल पहले गांव में रिचार्जिंग बोर लगवाया गया था। उन्होंने देखा कि यह रिचार्जिंग बोर का अस्तित्व खत्म होने को है। फिर उन्होंने पंचायत की सहायता से इस रिचार्ज बोर को नए सिरे से तैयार करवाकर चालू करवाया। रिचार्जिंग बोर में जाली आदि लगाकर ऐसी व्यवस्था की गई है कि बरसात का अतिरिक्त पानी विभिन्न स्तरों से होता हुआ छनकर इसके माध्यम से जमीन में चला जाए। इससे अब गांव का तालाब भी ओवरफ्लो नहीं होता है। साथ ही उन्होंने आसपास के किसानों को भी सुविधा दी है कि वे चाहें तो इस बोर के पास इंजन रखकर यहां से अपने खेतों के लिए सिंचाई का पानी ले सकते हैं।
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31 वर्षीय सरपंच बलविंद्र सिंह ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से 2012 में हिंदी से एमए की और गांव में एक स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्य किया।
    सरपंच बलविंद्र का मानना है कि टोहाना जैसे डार्क जोन क्षेत्र में इस प्रकार के रिचार्जिंग बोर सभी पंचायतों द्वारा लगवाए जाने चाहिए ताकि भूमिगत जलस्तर को फिर से ठीक किया जा सके। इसके अलावा उनका मानना है कि यदि हम चाहें तो गांव के सुधार, पर्यावरण व जल संरक्षण के बहुत से कार्य बिना पैसे केवल लोगों के सहयोग से ही कर सकते हैं। गांव के विकास को लेकर उन्होंने अपने मन में जो तस्वीर बनाई है, उसमें वे सबके सहयोग से रंग भरना चाहते हैं।
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