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Fatehabad News: जिले की गोशालाओं में तूड़ी की कमी, हरे चारे का भी संकट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2024 11:11 PM IST
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Shortage of grass in the cowsheds of the district, crisis of green fodder too
फतेहाबाद। जिले की गोशालाओं में तूड़ी का संकट छा गया है। मजबूरन गोशाला संचालकों को पराली की तूड़ी से काम चलाना पड़ रहा है, लेकिन इससे पशुओं के दूध उत्पादन पर असर पड़ता है। जो बेसहारा गायें हैं, उनकाे तो पेट भरने के लिए पराली मिल जाती है, लेकिन गोशालाओं में दूध देने वाली गायों के दूध उत्पादन पर इसका असर पड़ रहा है। वहीं भट्टू क्षेत्र की गोशालाओं में हरे चारे का भी संकट बना हुआ है।
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फतेहाबाद जिले में इस समय गोशालाओं में तूड़ी की मात्रा काफी कम पड़ गई है। पिछले साल गेहूं के कम उत्पादन व भट्टूकलां क्षेत्र में सेम की वजह से गेहूं की फसल के खराब होने के कारण तूड़ी की भयंकर कमी पड़ गई थी। रही सही कसर हरे चारे की कमी की वजह से पूरी हो गई, क्योंकि जुलाई माह में आई बाढ़ के कारण जिले के 189 गांव प्रभावित हुए थे और यहां पर हरा चारा पूरी तरह से नष्ट हो गया था। ऐसे में जिले की गोशालाओं के लिए उस समय हरे चारे की समस्या भी पैदा हो गई थी। हरे चारे की इस समस्या का तो किसी न किसी तरह से समाधान कर दिया गया, लेकिन गोशालाओं में दुधारू पशुओं के लिए तूड़ी न होने के कारण गोशाला संचालकों को परेशानी हो रही है। अब पराली की तूड़ी से काम चलाया जा रहा है। गोशाला संचालकों के अनुसार, सड़कों पर बेहसारा घूम रही गायों के लिए पराली की तूड़ी उनका पेट भरने के लिए काफी है, लेकिन दुधारू गायों के दूध उत्पादन में इससे कमी आ रही है। उन्होंने बताया कि इस बार पराली पंजाब व फतेहाबाद के अन्य क्षेत्रों से खरीदकर लाई गई है, स्टॉक की कमी तो नहीं है, लेकिन आने वाले दिनाें में दिक्कत आ सकती है।
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400 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही पराली
फतेहाबाद में इस समय 60 गोशालाएं व 7 नंदीशालाएं हैं। इनमें फिलहाल पराली की तूड़ी ही मंगवाई जा रही है। पराली गोशालाओं को 400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से मिलती है, जबकि गेहूं की तूड़ी या तूड़ा 750 रुपये प्रति क्विंटल तक पड़ जाता है। हालांकि दूध देने वाली गायों के लिए यह तूड़ी काफी फायदेमंद होती है, लेकिन तूड़ी कम होने के कारण गायों के दूध उत्पादन पर असर पड़ रहा है।
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कोट
सरकार की ओर से गायों के चारे व रखरखाव के लिए गोशालाओं को 3 रुपये प्रति गाय दिया जाता है। जोकि साल में एकमुश्त दिया जाता है। गायों की संख्या के हिसाब से यह राशि नाकाफी है। इसको बढ़ाया जाना चाहिए। गोशालाओं में तूड़ी की कमी को पराली से पूरा किया जा रहा है।
-अशोक भुक्कर, प्रधान जिला गोशाला संघ।
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